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Moradabad News: सुंदर कक्षाएं कर रहीं खुद पर अभिमान...बच्चे कहां हैं? सवालों में स्कूल चलो अभियान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:42 AM IST
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Beautiful classrooms take pride in themselves... but where are the children? The 'School Chalo Abhiyan' (Let's Go to School Campaign) faces questions.
मुरादाबाद। सुंदर स्कूल है। खेलने के लिए अच्छा मैदान। आरओ का पानी मिलता है। टॉयलेट भी साफ-सुथरे हैं। यहां कुछ भी पब्लिक स्कूलों से कम नहीं है। लेकिन बच्चे यहां फिर भी नहीं आते। अब कुछ तो कमियां होंगी ही। नहीं तो स्कूल चलो अभियान के नाम पर सरकार ने मोटी रकम खर्च कर दी। मुहल्ले से लेकर गांवों तक रैलियां निकाल गईं लेकिन लोग फिर भी अपने बच्चों को परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने को तैयार नहीं हैं। अमर उजाला की टीम ने जब मिशन कायाकल्प के तहत संवारे गए स्कूलों का हाल जाना बच्चों की संख्या कहीं दस थी तो कहीं 12। कुछ ऐसे भी स्कूल हैं जहां नामांकन तो भरपूर हो गए लेकिन स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या बेहद चिंताजनक मिली। पेश ही रिपोर्ट।
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यह सुविधाएं मिलीं इन स्कूलों में
अच्छा फर्नीचर
एलईडी के माध्यम से संचालित होने वालीं स्मार्ट क्लास
हर क्लास में पंखा
स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ
साफ-सुथरे टॉयलेट
योग्य शिक्षक-शिक्षिकाएं

चौकी पर बैठक कर करते हैं भोजन
कंपोजिट विद्यालय गंज गांधी पार्क में कक्षा 1 से 8 तक कुल 80 बच्चे हैं। दो शिक्षक और एक शिक्षामित्र कार्यरत हैं। प्रधानाध्यापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारे यहां व्यवस्थागत और शैक्षणिक स्तर पर निजी स्कूलों की तर्ज पर सभी सुविधाएं हैं। यहां तक कि बच्चे मिड डे मील भी चौकी पर बैठकर खाते हैं। इसके बावजूद अभिभावकों का बहुत ज्यादा सकारात्मक रुझान देखने को नहीं मिलता है। यहां लोकाशेड, अशोक नगर, चंद्रनगर और कंजरी सराय क्षेत्र से बच्चे आते हैं। अधिकतर अभिभावक श्रमिक वर्ग से हैं। एक बच्चे के अभिभावक गुरहट्टी पर एक दुकान में काम करते हैं। जब उनके बच्चे का दाखिला आरटीई के अंतर्गत निजी स्कूल में नहीं हुआ था, तब वह हमारे यहां पर पूछताछ करने के लिए आए थे। हमने उनको स्मार्ट क्लास की सुविधा, स्कूल के अच्छे परिवेश व अन्य सुविधाओं की जानकारी दी, तब उन्होंने हमारे यहां दाखिला करवाया।
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81 बच्चों से अब रह गए 22 बच्चे
प्राथमिक स्कूल मानपुर में छात्र नामांकन 22 है। विद्यालय में दो शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। प्रभारी प्रधानध्यापिका आयशा नूर ने बताया कि चार वर्ष पहले उनके यहां पर नामांकन 81 था। इसके बाद मूल विद्यालय जर्जर होने की वजह से स्कूल आदर्श नगर, एसएस इंटर कॉलेज में स्थानांतरित हुआ और अब दो साल से कंपोजिट स्कूल गांधी पार्क में संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां पर स्कूल का पूरा भवन अलग है। आधुनिक शिक्षा के हिसाब से सभी सुविधाएं हैं। हम अभिभावकों को प्रोत्साहित करते हैं तो कोठीवाल नगर के पास गुलशन नगर मोहल्ले से बच्चे आते हैं। आयशा नूर का कहना है कि यदि विद्यालय का मूल भवन बन जाए तो छात्र संख्या बहुत बढ़ सकती है।
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शैक्षिक गुणवत्ता की जानकारी देकर दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बच्चों का कराया दाखिला
प्राथमिक स्कूल पुलिस लाइन में छात्र नामांकन 40 हैं। सहायक अध्यापिका सुचि शर्मा ने बताया कि विद्यालय में सभी बच्चे चक्कर की मिलक और जिगर कालोनी से आते हैं। उन्होंने कहा कि दो व्यक्ति पुलिस विभाग में ही चतुर्थ श्रेणी वर्ग में कार्यरत हैं। जब वह विद्यालय के सामने से निकलते थे तो बच्चों को स्मार्ट क्लास में पढ़ते हुए देखते थे। फिर हमने उनको शैक्षिक गुणवत्ता की जानकारी देकर प्रोत्साहित किया, तब उन्होंने अपने दो बच्चों का दाखिला करवाया। अब उनके दो छोटे भाई बहन जिनका कम उम्र की वजह से दाखिला नहीं हो पाया है, उनको भी पढ़ाते हैं ताकि अगले वर्ष उनका इसी स्कूल में दाखिला हो सके। उन्होंने कहा कि जो बच्चे पढ़ते हैं उनके माता-पिता दोनों ही मजदूरी या फैक्टरियों में काम करने चले जाते हैं। वहां के दुकानदारों और बच्चाें से ही संपर्क कर नामांकन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।


निजी स्कूलों से अच्छा पढ़ाऊंगा... तब हुए दो दाखिला
ब्लॉक भगतपुर टांडा के उच्च प्राथमिक विद्यालय मानपुर चौकी में दस बच्चों का नामांकन है, जबकि गांव की आबादी तीन हजार है। दो शिक्षक कार्यरत हैं। प्रधानाध्यापक मामचंद सिंह ने बताया कि कई सरकारी नौकरी वाले लोग हैं, जो गांव में ही रहते हैं लेकिन उनके बच्चे शहर में पढ़ने के लिए जाते हैं। एक व्यक्ति डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करते हैं और एक टेलर हैं, मैंने उन दोनों को निजी स्कूलों से अच्छी पढ़ाई करवाने का आश्वासन दिया, तब उन्होंने दाखिला करवाया। हमारे यहां सबसे बड़ी समस्या स्कूल का भवन नहीं होने की है। स्कूल किसान सेवा केंद्र के एक कमरे में संचालित हो रहा है। मैंने इसी कमरे को पूरी तरह से व्यवस्थित किया है। शैक्षिक गुणवत्ता के सुधार के हिसाब से यहां पर सभी चीजें करने का प्रयास कर रहा हूं। बस यही समस्या है कि साथ ही बराबर में आंगनबाड़ी केंद्र के दो कमरों में कन्या क्रिमोत्तर उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट मानपुर भी संचालित हो रहा है। कम नामांकन की एक वजह यह भी है कि अगल-बगल में दो जूनियर स्कूल हो गए हैं।


मजदूरी करने शहर जाते हैं, पर बच्चे मांटेसरी में पढ़ाते हैं
प्राथमिक विद्यालय बढ़ापुर में दस बच्चों का नामांकन है और दो शिक्षक हैं। प्रधानाध्यापक मुकेश सिंह ने बताया कि गांव की आबादी करीब छह सौ है। इसमें लगभग सौ व्यक्ति अपने परिवार के साथ शहर में रहते हैं। हमारे विद्यालय से मुश्किल से डेढ़ सौ मीटर दूरी पर एक मांटेसरी स्कूल है। ऐसे में सरकारी नौकरी या निजी कंपनी में नौकरी कर रहे व्यक्तियों की बात अलग है, लेकिन जो लोग मजदूरी करने शहर में जा रहे हैं, वह भी अपने बच्चों को मांटेसरी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं। कई बार जब उनसे बात करते हैं तो वह पड़ोसी के बच्चे की देखा देखी मांटेसरी स्कूल में ही पढ़ाने की बात कहते हैं, जबकि हमारे यहां पर फर्नीचर से लेकर अन्य व्यवस्थागत सुविधाएं हैं।


नए कमरों का किया जा रहा है निर्माण
प्राथमिक स्कूल वीरु वाला डिलारी में 14 बच्चों का नामांकन है। प्रधानाध्यापक विनोद कुमार ने बताया कि गांव एक छोटा मझरा है। दो किलोमीटर दूरी पर अंग्रेजी माध्यम स्कूल है। ज्यादातर बच्चे भी मांटेसरी में पढ़ रहे है। उन्होंने कहा कि मैं स्कूल में अकेला शिक्षक हूं। पहले स्कूल का भवन सही नहीं था। मैदान और गेट पर घास रहती थी, सफाई कर्मी नहीं आते थे। अब विद्यालय में काम चल रहा है। मूल भवन में दो कमरे नए बन रहे हैं।


वर्जन...

स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए फिर अभियान चलाया जाएगा। सभी शिक्षकों को 30 सितंबर तक बच्चों के नामांकन करने के निर्देश दिए गए हैं।
अमित सिंह, बीएसए
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