{"_id":"612e81068ebc3eca8319f35d","slug":"basmati-does-not-meet-export-standards-due-to-indiscriminate-use-of-pesticides-city-news-mbd401087574","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग से निर्यात के मानकों पर खरी नहीं उतरती बासमती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग से निर्यात के मानकों पर खरी नहीं उतरती बासमती
विज्ञापन
मुरादाबाद। बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित कृषि गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि जरूरत से ज्यादा कीटनाशक और यूरिया के इस्तेमाल की वजह से बासमती निर्यात के मानकों पर खरी नहीं उतर पाती। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित मात्रा में इनका प्रयोग करने की सलाह दी गई।
पंचायत भवन सभागार में आयोजित संगोष्ठी में पूर्व निदेशक सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मोदीपुरम डॉ. एसके सचान ने बताया कि अपनी फसल में सीमित मात्रा में ही कृषि रसायनों का प्रयोग करना चाहिए।
वैज्ञानिक अनुपम दीक्षित ने बताया कि विदेशों में पिछले 10 से 15 वर्षों में बासमती धान की मांग अधिक हुई है। हरियाणा और वेस्ट यूपी में इसकी अच्छी खेती होती है, लेकिन अज्ञानता के कारण किसान उसमें बहुत अधिक कीटनाशक और उर्वरक का अधिक प्रयोग करने की वजह से खेत के लाभदायक कीट भी मर जाते हैं।
विज्ञापन
कार्यक्रम के दौरान डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने किसानों को कार्यशाला में बताई गई विधि और तकनीकों के माध्यम से बासमती की खेत करने की सलाह दी। कृषि निदेशक जेपी चौधरी, उप कृषि निदेशक मुरादाबाद सीएल यादव, कृषि वैज्ञानिक डॉ. तेज शर्मा, जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी मौजूद रहीं।
विज्ञापन
पंचायत भवन सभागार में आयोजित संगोष्ठी में पूर्व निदेशक सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मोदीपुरम डॉ. एसके सचान ने बताया कि अपनी फसल में सीमित मात्रा में ही कृषि रसायनों का प्रयोग करना चाहिए।
विज्ञापन
वैज्ञानिक अनुपम दीक्षित ने बताया कि विदेशों में पिछले 10 से 15 वर्षों में बासमती धान की मांग अधिक हुई है। हरियाणा और वेस्ट यूपी में इसकी अच्छी खेती होती है, लेकिन अज्ञानता के कारण किसान उसमें बहुत अधिक कीटनाशक और उर्वरक का अधिक प्रयोग करने की वजह से खेत के लाभदायक कीट भी मर जाते हैं।
विज्ञापन
कार्यक्रम के दौरान डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने किसानों को कार्यशाला में बताई गई विधि और तकनीकों के माध्यम से बासमती की खेत करने की सलाह दी। कृषि निदेशक जेपी चौधरी, उप कृषि निदेशक मुरादाबाद सीएल यादव, कृषि वैज्ञानिक डॉ. तेज शर्मा, जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी मौजूद रहीं।