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किशोरी के अपहरण के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज, विवेचक के खिलाफ जांच के आदेश
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मुरादाबाद। किशोरी के अपहरण के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी जिला जज की अदालत से खारिज हो गई। अदालत ने इस मामले में विवेचक के खिलाफ जांच कराने का आदेश एसएसपी को दिया है।
कटघर थानाक्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने तीन मार्च 2022 को थाने में केस दर्ज कराया था। जिसमें बताया था कि उसकी नाबालिग पुत्री सुबह नौ बजे स्कूल के लिए गई थी। शाम तक वह वापस नहीं आई। उसकी काफी तलाश की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं लग पाया। इसी दौरान लोगों से पता चला कि उसकी पुत्री को मुकुल कुमार अपने पिता मुकेश व चाचा राकेश की मदद से बहला फुसलाकर ले गया है। इस मामले में तफ्तीश के दौरान विवेचक ने अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए। जिनसे पता चला कि लड़की को आरोपी कार में बैठाकर ले गया था। आरोपियों में से चाचा राकेश ने अपने अधिवक्ता की मदद से जमानत के लिए प्रार्थना पत्र अदालत में दाखिल किया था। जमानत अर्जी जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कुमार की अदालत में पेश की गई। बचाव पक्ष का कहना था कि उसे झूठा फंसाया गया है। घटना से उसका कोई वास्ता नहीं है। वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव अग्रवाल ने बहस करते हुए अदालत को बताया कि इस मामले में अभी तक लड़की बरामद नहीं हुई है। इस स्थिति में आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार करने योग्य नहीं है। अदालत ने केस डायरी का अवलोकन करते हुए पाया कि गवाह ने लड़की को अगवा करने वाली कार के विषय में बताया था। फिर भी विवेचक ने न तो कार की और न ही लड़की की तलाश की। अदालत ने चाचा राकेश की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसके अलावा एसएसपी को आदेश दिया कि इस मुकदमे के विवेचक उप निरीक्षक अर्जुन त्यागी के खिलाफ गलत जांच करने पर नियमानुसार विभागीय जांच कराएं। एक माह के भीतर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई कर अदालत को भी अवगत कराएं।
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कटघर थानाक्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने तीन मार्च 2022 को थाने में केस दर्ज कराया था। जिसमें बताया था कि उसकी नाबालिग पुत्री सुबह नौ बजे स्कूल के लिए गई थी। शाम तक वह वापस नहीं आई। उसकी काफी तलाश की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं लग पाया। इसी दौरान लोगों से पता चला कि उसकी पुत्री को मुकुल कुमार अपने पिता मुकेश व चाचा राकेश की मदद से बहला फुसलाकर ले गया है। इस मामले में तफ्तीश के दौरान विवेचक ने अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए। जिनसे पता चला कि लड़की को आरोपी कार में बैठाकर ले गया था। आरोपियों में से चाचा राकेश ने अपने अधिवक्ता की मदद से जमानत के लिए प्रार्थना पत्र अदालत में दाखिल किया था। जमानत अर्जी जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कुमार की अदालत में पेश की गई। बचाव पक्ष का कहना था कि उसे झूठा फंसाया गया है। घटना से उसका कोई वास्ता नहीं है। वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव अग्रवाल ने बहस करते हुए अदालत को बताया कि इस मामले में अभी तक लड़की बरामद नहीं हुई है। इस स्थिति में आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार करने योग्य नहीं है। अदालत ने केस डायरी का अवलोकन करते हुए पाया कि गवाह ने लड़की को अगवा करने वाली कार के विषय में बताया था। फिर भी विवेचक ने न तो कार की और न ही लड़की की तलाश की। अदालत ने चाचा राकेश की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसके अलावा एसएसपी को आदेश दिया कि इस मुकदमे के विवेचक उप निरीक्षक अर्जुन त्यागी के खिलाफ गलत जांच करने पर नियमानुसार विभागीय जांच कराएं। एक माह के भीतर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई कर अदालत को भी अवगत कराएं।
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