सपा सांसद आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ा झटका, भारी पड़ी शर्तों की अनदेखी
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शासकीय अधिवक्ता राजस्व अजय तिवारी के मुताबिक शर्त यह थी कि ट्रस्ट की ओर से लोकहित के कार्य किए जाएंगे। पांच साल के अंदर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। जो भी जमीन खरीदी जाएगी, उसके लिए कायदे-कानून का पालन किया जाएगा। इसके अलावा शर्त यह भी थी कि किसानों से जमीन उनकी सहमति के आधार पर खरीदी जाएगी, लेकिन इन शर्तों का पालन नहीं किया गया।
शासकीय अधिवक्ता के अनुसार रसूख का फायदा उठाते हुए आजम खां ने अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों की भी जमीनें खरीद लीं। इसके अलावा नदी किनारे की जमीन को पट्टा करके अपनी यूनिवर्सिटी में मिलाया।
चकरोड को शामिल किया गया जो ग्राम सभा की सुरक्षित भूमि थी, जबकि शर्त में यह स्पष्ट था कि ऐसी सुरक्षित भूमि को यूनिवर्सिटी में शामिल नहीं किया जाएगा। शासकीय अधिवक्ता के अनुसार सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से ऐसा कोई भी प्रमाण नहीं दिया जा सका जिससे सिद्ध हो सके कि शासनादेश की शर्तों का पालन किया गया है।
जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने भी शर्तों का पालन न करने की कही थी बात
तत्कालीन एसडीएम सदर ने भी जांच रिपोर्ट में शर्तों की अनदेखी की बात कही थी। कहा गया था कि जौहर यूनिवर्सिटी न्यूनतम फीस प्राप्त कर छात्रों को शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि ट्रस्ट की ओर से अपनी आपत्ति में अथवा साक्ष्य रूप में ऐसा कोई तथ्य नहीं दिया गया जिससे यह सिद्ध हो कि कितने बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है।
कितने बच्चों से कम फीस ली जा रही और किस प्रकार उक्त फीस अन्य विश्वविद्यालय से कम है। लोकहित के क्या-क्या कार्य किए जा रहे हैं, इसका भी विवरण नहीं है। उन्होंने रिपोर्ट में यह भी कहा कि ट्रस्ट की ओर से जवाब दिया गया है कि यूनिवर्सिटी की अधिकतर भूमि अकृषक घोषित की जा चुकी है। अकृषक घोषित भूमि पर राजस्व संहिता के उपबंध लागू नहीं होंगे।
अब क्या होगा ट्रस्ट का अगला रुख
जौहर ट्रस्ट की ओर से इस आदेश को कमिश्नर, राजस्व परिषद या फिर हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ट्रस्ट के अधिवक्ता रमेश पाठक का कहना है कि अभी हमें आदेश की प्रमाणित प्रति नहीं मिली है। प्रमाणित प्रति मिलने के बाद उसे इलाहाबाद में अधिवक्ताओं के पास भेज दिया जाएगा। वो लोग ही फैसला करेंगे कि इस आदेश को कहां चुनौती देनी है।
जौहर यूनिवर्सिटी व विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा कोई असर: डीएम
जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह का कहना है कि इस फैसले से जौहर यूनिवर्सिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामला केवल जमीन के मालिकाना हक का है। जमीन केवल जौहर ट्रस्ट से राज्य सरकार के नाम पर चली जाएगी।
यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर यूनिवर्सिटी के संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई निर्देश जारी किया जाता है तो यह अलग बात है। इस संबंध में अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है।