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आजम-अदुब्ल्ला की फाइल अलग सात आरोपियों ने दर्ज कराए बयान
सार
छजलैट के चौदह साल पुराने मामले में मंगलवार को सपा विधायक आजम खां और अब्दुल्ला आजम कोर्ट में हाजिर नहीं हुए।जबकि केस के अन्य सात कोर्ट में हाजिर हुए और उनके बयान अंकित कराए।विशेष लोक अभियोजक मोहनलाल विश्नोई ने बताया कि आजम खां और अब्दुल्ला आजम की ओर से उनके वकील ने स्थगन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
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विस्तार
छजलैट के चौदह साल पुराने मामले में मंगलवार को सपा विधायक आजम खां और अब्दुल्ला आजम कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इनकी ओर से स्थगन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया, जिस कारण अदालत ने दोनों की पत्रावली अलग कर दी। जबकि केस के अन्य सात कोर्ट में हाजिर हुए और उनके बयान अंकित कराए। अब इस मामले में सितंबर को सुनवाई की जाएगी।
छजलैट थाने के सामने 29 जनवरी 2008 को सपा विधायक एवं पूर्व मंत्री आजम खां की गाड़ी रोक कर पुलिस ने चेकिंग की थी। जिसके विरोध में आजम खां सड़क पर बैठ गए थे। सूचना मिलने पर आस पड़ोस के जनपदों से भी सपा नेता उनके समर्थक में आ गए थे। इस मामले में आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राजकुमार प्रजापति, पूर्व विधायक इकराम कुरैशी, नूरपुर के पूर्व विधायक नईम ऊल हसन, नगीना के विधायक मनोज पारस, अमरोहा के विधायक एवं पूर्व मंत्री महबूब अली, डीपी यादव, राजेश यादव समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जिसकी सुनवाई एमएलए- एमपी स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट स्मिता गोस्वामी की अदालत में चल रही है।
विशेष लोक अभियोजक मोहनलाल विश्नोई ने बताया कि आजम खां और अब्दुल्ला आजम की ओर से उनके वकील ने स्थगन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिसके बाद अदालत ने उनकी पत्रावली अलग कर दी। अन्य आरोपी पूर्व विधायक इकराम कुरैशी, नूरपुर के पूर्व विधायक नईम ऊल हसन, नगीना के पूर्व मनोज पारस, अमरोहा के विधायक एवं पूर्व मंत्री महबूब अली, डीपी यादव व राजेश यादव के बयान दर्ज कराए। जिन्होंने अपनी बेगुनाही के बयान अदालत में अंकित कराए। अब इस मामले में अदालत ने 27 सितंबर की तारीख सुनवाई के लिए लगा दी है।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
मुरादाबाद। आजम खान के वकील शाहनवाज सिब्तेन ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ छजलैट थाने में धारा 147(बलवा) आईपीसी, धारा 341(जाम लगाना) आईपीसी और धारा 353 आईपीसी (सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करना), 7 लॉ क्रिमिनल एक्ट का मुकदमा केस दर्ज किया गया था।
मुकदमे से संबंधित एक याचिका उच्च न्यायालय में है लंबित
मुरादाबाद। नूरपुर के पूर्व विधायक नईम उल हसन के अधिवक्ता अनुज विश्नोई ने बताया कि इस मुकदमे के आरोपी नईम उल हसन की ओर से वादी पक्ष के गवाहों से जिरह नहीं हो सकी थी। जिसके लिए प्रार्थनापत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया था, जो पूर्व में खारिज कर दिया गया था। जिसके खिलाफ जनपद न्यायाधीश के न्यायालय में रिवीजन भी दायर किया गया था, जहां से भी रिवीजन खारिज होने के बाद नईम उल हसन उच्च न्यायालय की शरण में चले गए थे। जो अभी लंबित है शीघ्र ही उस पर सुनवाई की जाएगी।
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छजलैट थाने के सामने 29 जनवरी 2008 को सपा विधायक एवं पूर्व मंत्री आजम खां की गाड़ी रोक कर पुलिस ने चेकिंग की थी। जिसके विरोध में आजम खां सड़क पर बैठ गए थे। सूचना मिलने पर आस पड़ोस के जनपदों से भी सपा नेता उनके समर्थक में आ गए थे। इस मामले में आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राजकुमार प्रजापति, पूर्व विधायक इकराम कुरैशी, नूरपुर के पूर्व विधायक नईम ऊल हसन, नगीना के विधायक मनोज पारस, अमरोहा के विधायक एवं पूर्व मंत्री महबूब अली, डीपी यादव, राजेश यादव समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जिसकी सुनवाई एमएलए- एमपी स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट स्मिता गोस्वामी की अदालत में चल रही है।
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विशेष लोक अभियोजक मोहनलाल विश्नोई ने बताया कि आजम खां और अब्दुल्ला आजम की ओर से उनके वकील ने स्थगन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिसके बाद अदालत ने उनकी पत्रावली अलग कर दी। अन्य आरोपी पूर्व विधायक इकराम कुरैशी, नूरपुर के पूर्व विधायक नईम ऊल हसन, नगीना के पूर्व मनोज पारस, अमरोहा के विधायक एवं पूर्व मंत्री महबूब अली, डीपी यादव व राजेश यादव के बयान दर्ज कराए। जिन्होंने अपनी बेगुनाही के बयान अदालत में अंकित कराए। अब इस मामले में अदालत ने 27 सितंबर की तारीख सुनवाई के लिए लगा दी है।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
मुरादाबाद। आजम खान के वकील शाहनवाज सिब्तेन ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ छजलैट थाने में धारा 147(बलवा) आईपीसी, धारा 341(जाम लगाना) आईपीसी और धारा 353 आईपीसी (सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करना), 7 लॉ क्रिमिनल एक्ट का मुकदमा केस दर्ज किया गया था।
मुकदमे से संबंधित एक याचिका उच्च न्यायालय में है लंबित
मुरादाबाद। नूरपुर के पूर्व विधायक नईम उल हसन के अधिवक्ता अनुज विश्नोई ने बताया कि इस मुकदमे के आरोपी नईम उल हसन की ओर से वादी पक्ष के गवाहों से जिरह नहीं हो सकी थी। जिसके लिए प्रार्थनापत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया था, जो पूर्व में खारिज कर दिया गया था। जिसके खिलाफ जनपद न्यायाधीश के न्यायालय में रिवीजन भी दायर किया गया था, जहां से भी रिवीजन खारिज होने के बाद नईम उल हसन उच्च न्यायालय की शरण में चले गए थे। जो अभी लंबित है शीघ्र ही उस पर सुनवाई की जाएगी।