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इस गति से तो 24वीं सदी में पूरी होगी मुरादाबाद वासियों की कोरोना जांच

Sat, 02 May 2020 01:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमित मुद्गल, मुरादाबाद
अमित मुद्गल, मुरादाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 02 May 2020 01:40 AM IST
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At this pace, the corona investigation of Moradabad residents will be completed in the 24th century
कोरोना वायरस की जांच - फोटो : Amar Ujala

एक तरफ मुरादाबाद में जहां लगातार कोरोना संक्रमित लोगों का ग्राफ ऊपर होता जा रहा है तो दूसरी ओर यहां बेहद धीमी गति से लोगों के सैंपल लेकर जांच हो रही है।

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चौंकाने वाली बात यह है कि यदि मुरादाबाद के सभी लोगों की जांच कराएं और गति यही रहे तो सभी के सैंपल लेने में 284 वर्ष लग जाएंगे। यानी चौथी सदी में जाकर ही सैंपल लेने का काम पूरा हो पाएगा।
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कोरोना संक्रमण को लेकर मुरादाबाद रेड जोन में आया है। यहां सौ से ज्यादा लोगों को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। कोरोना संक्रमित सात लोगों की मौत हो चुकी है।
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कोरोना से संक्रमित लोगों की मौत का औसत जहां उप्र में दो से भी है तो यहां यह प्रतिशत छह से भी ज्यादा है। देश भर में हुई औसत मौत 3.24  से मुरादाबाद का औसत दोगुना है। ऐसे में यहां प्रशासन और लोगों को चिंता ज्यादा हो रही है।

लॉकडाउन की इस स्थिति में सरकारी अमला कोरोना से निपटने में लगा है। तमाम कवायदें चल रही हैं। सैंपल लिए जा रहे हैं पर गति बेहद कम है। पहली बार मुरादाबाद में 19 मार्च को एक युवती को एडमिट किया गया था और उसका सैंपल उसी दिन लिया गया था। यह मुरादाबाद का पहला सैंपल था जिसमें युवती की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

लांकि बाद में वह ठीक होकर अपने घर चल गई थी। उसके बाद से तीस अप्रैल तक मुरादाबाद में कुल 1886 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें 1392 लोगों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई जबकि। यानी इन 41 दिनों में औसतन 46 लोगों के सैंपल रोज लिए गए।

मुरादाबाद की जनसंख्या 47 लाख 72 हजार 006 है। इनमें 25 लाख 03 हजार 186 पुरुष जबकि 22 लाख 68 हजार महिलाएं हैं। अहम सवाल और चौंकाने वाली बात यह है कि यदि पूरी जनता के सैंपल इसी गति से लिए जाएं तो इस काम को पूरा करने में एक लाख से भी ज्यादा दिन लग जाएंगे। यानी 284 साल और इसे पूरा करने में लगेंगे। इस हिसाब से यह काम वर्ष 2304 यानी चौथी सदी में पूरा हो सकेगा।
 

लैब नहीं हो पा रही स्थापित

कोरोना जांच के लिए मुरादाबाद में माइक्रो बॉयलोजी लैब नहीं है। इसे स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अलीगढ़, बरेली और लखनऊ सैंपल भेजकर यहां केलोगों की जांच होती थी। अलीगढ़ और बरेली में लोड बहुत बढ़ गया है। ऐसे में अब ज्यादा मदद लखनऊ से ही मिल रही है। माना जा रहा है जून पहले सप्ताह तक लैब शुरू हो सकेगी।

इस तरह हो रही जांच (30 अप्रैल तक)
कुल लिए सैंपल- 1886
रिपोर्ट आई - 1392
पॉजिटिव - 105
निगेटिव - 1392
अनिश्चित- 69
प्रतीक्षारत - 307

केवल संदिग्ध लोगों की ही हो रही है जांच
कोरोना केसों की जांच में यह जरूरी है कि केवल उन्हीं की सैंपलिंग हो जो कोरोना संदिग्ध हों। हम जिस तरह से सैंपल भेज रहे हैं और उनकी रिपोर्ट आ रही है वह बेहद संतोषजनक है। इस मामले में हम दूसरे जिलों से कहीं आगे हैं। हमने रैंडम चेकिंग भी शुरू की और एक केस तो उसी से सामने आया। खास तौर पर पहले हाई रिस्क एरिया में ही सैंपलिंग का नियम है। यहां इसकी गति ठीक है। मेरी तो यही अपील है कि लोग सामने आएं। जरा भी लक्षण दिखें तो जांच कराएं और लॉकडाउन का पालन करें। 
- राकेश कुमार सिंह, डीएम

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