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राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख के खिलाफ दाखिल प्रार्थनापत्र खारिज-00
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रामपुर। बिलासपुर की पूर्व ब्लॉक प्रमुख रविंद्र कौर को कोर्ट से झटका लगा है। उनके द्वारा राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख समेत उनके भाई और पुत्र के खिलाफ दाखिल किए गए प्रार्थनापत्र को सुनवाई के बाद कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
बिलासपुर की पूर्व ब्लॉक प्रमुख रविंद्र कौर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। जिसमें उनका आरोप है कि खंड विकास कार्यालय में वर्ष 2020-21 में कक्ष का निर्माण कराया था। जिसमें सुंदरीकरण के नाम पर लगे शिलापट को राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, उनके भाई व ब्लॉक प्रमुख कुलवंत औलख और उनके पुत्र गुरकीरत सिंह औलख व दो अन्य लोगों ने लोगों को उकसाकर नष्ट करवा दिया। साथ ही उनके प्रति अपमानजनक शब्द बोले। यह घटना 29 नवंबर 2021 की है। उनके द्वारा घटना की जानकारी बिलासपुर पुलिस को दी गई। आरोप है कि पुलिस ने उनके पति को भी धमकाया। इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को जानकारी दी। लेकिन, इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो जनवरी 2022 में उन्होंने कोर्ट की शरण ली। सोमवार को इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शमीम अहमद अंसारी की कोर्ट में हुई, जहां पर वादी के अधिवक्ता ने अपने तर्क प्रस्तुत किए। मंगलवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख के पत्र को खारिज कर दिया है।
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बिलासपुर की पूर्व ब्लॉक प्रमुख रविंद्र कौर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। जिसमें उनका आरोप है कि खंड विकास कार्यालय में वर्ष 2020-21 में कक्ष का निर्माण कराया था। जिसमें सुंदरीकरण के नाम पर लगे शिलापट को राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, उनके भाई व ब्लॉक प्रमुख कुलवंत औलख और उनके पुत्र गुरकीरत सिंह औलख व दो अन्य लोगों ने लोगों को उकसाकर नष्ट करवा दिया। साथ ही उनके प्रति अपमानजनक शब्द बोले। यह घटना 29 नवंबर 2021 की है। उनके द्वारा घटना की जानकारी बिलासपुर पुलिस को दी गई। आरोप है कि पुलिस ने उनके पति को भी धमकाया। इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को जानकारी दी। लेकिन, इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो जनवरी 2022 में उन्होंने कोर्ट की शरण ली। सोमवार को इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शमीम अहमद अंसारी की कोर्ट में हुई, जहां पर वादी के अधिवक्ता ने अपने तर्क प्रस्तुत किए। मंगलवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख के पत्र को खारिज कर दिया है।
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