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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   Amroha Election Result: Congress gained support even after losing Amroha, BSP was not even in contest

Amroha Election Result: अमरोहा में हार के बाद भी कांग्रेस ने पाया जनाधार, जीत तो दूर..बसपा मुकाबले में भी नहीं

Wed, 05 Jun 2024 02:38 PM IST
विमल शर्मा सचिन त्यागी, अमरोहा
सचिन त्यागी, अमरोहा Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 05 Jun 2024 02:38 PM IST
सार

अमरोहा में भाजपा ने कांग्रेस को पराजित कर दिया। इसके बाद भी उसने अपना खोया हुआ जनाधार पाया है। 1989 के बाद कांग्रेस इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रही। इस सीट पर कांग्रेस को अबतक सिर्फ एक बार ही जीत मिल पाई है। इस बार उसे गठबंधन में रहकर फायदा मिला। उधर, बसपा जीत तो दूर सीधे मुकाबले में भी नहीं रही। 

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Amroha Election Result: Congress gained support even after losing Amroha, BSP was not even in contest
अमरोहा में मतगणना के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी दानिश अली - फोटो : संवाद

विस्तार

भले ही अमरोहा में कांग्रेस को भाजपा के हाथों शिकस्त मिली हो, लेकिन 40 बरस के लंबे अरसे के बाद यहां कांग्रेस ने अपना खोया राजनीतिक वजूद हासिल कर लिया। 1989 के बाद कांग्रेस इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रही है। 40 वर्षों से कांग्रेस अमरोहा में वोटों का सूखा झेल रही थी।

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1984 में रामपाल सिंह इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर संसद पहुंचे थे। जिसके बाद इस सीट पर कांग्रेस जीत नहीं हासिल कर सकी है। 1989 के चुनाव में भी कांग्रेस यहां दूसरे स्थान पर रही। लेकिन इसके बाद अमरोहा में कांग्रेस का जनाधार सिमटता चला गया।
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इतने सालों के बाद यह पहला मौका था, जब कांग्रेस इस सीट पर मजबूत और दमदार तरीके से लड़ी। इससे पहले के चुनाव दर चुनाव कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिरता चला गया था। कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर दानिश अली ने चुनाव से ऐन पहले पार्टी में एंट्री ली थी।
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सपा के गठबंधन के सहारे कांग्रेस को इस सीट पर अपना खोया जनाधार वापस हासिल करने में कामयाबी मिली है। कांग्रेस ने इस सीट के इतिहास में सर्वाधिक वोट फीसदी हासिल किया है। कांग्रेस को यहां 40.39 फीसदी वोट हासिल हुए।

कांग्रेस को मिला गठबंधन का फायदा
अमरोहा में कांग्रेस को गठबंधन का फायदा मिला है।  पिछले चुनावों में वोटों के लिए तरस रही कांग्रेस को सपा ने संजीवनी दे दी। इसका परिणाम यह रहा कि कांग्रेस के कैडर वोटों के साथ-साथ उसको सपा के परंपरागत वोट भी मिले। यही कारण रहा कि कांग्रेस ने भाजपा को यहां मजबूत टक्कर दी है।

1984 के बाद लोस चुनावों में कांग्रेस की स्थिति
चुनावी साल    प्रत्याशी               मिले वोट           
1984           रामपाल सिंह        181642             
1889           खुर्शीद अहमद      123477            
1991           दिलदार हुसैन        74682              
1996           कांशीराम              41383             
1998           शिवस्वरूप टंडन    35481             
2004           विक्रम सिंह            7949         
2009           नफीस अंसारी         16878      
2019            सचिन चौधरी          12510
2024           कुंवर दानिश अली    447836
नोट : 1999-2014 में गठबंधन के तहत कांग्रेस के प्रत्याशी नहीं थे।

जीत को छोड़िए, मुकाबले से बसपा प्रत्याशी रहे दूर
बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. चौधरी मुजाहिद हुसैन जीतना तो दूर मुकाबले में भी नहीं आ सके। पहले ही राउंड से उन्हें का सामना करना पड़ा। जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर से मुकाबला तो छोड़ो दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर दानिश अली से टक्कर में भी शामिल नहीं हो सके। बता दें कि वर्ष 2019 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी दानिश अली ने लोकसभा क्षेत्र में बीस साल के सूखे को खत्म किया था।

लेकिन, 2024 के चुनाव में भी 2014 की तरह बसपा प्रत्याशी को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा है। अमराेहा लोकसभा सीट पर बसपा ने वर्ष 1999 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में राशिद अल्वी ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 337919 वोट मिले थे। उन्होंने भाजपा के चेतन चौहान को हराया था। चेतन चौहान को 244694 वोट मिले थे। इसके बाद बसपा के लिए सूखा चल रहा था। अमरोहा लोकसभा सीट पर बसपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा।

एक चुनाव छोड़कर हर बार पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा है। निराशाजनक प्रदर्शन के बीच बसपा जीत के लिए तरसती रही। लेकिन वर्ष 1999 के चुनाव में पार्टी को जीत नसीब हुई। जनता ने बसपा प्रत्याशी राशिद अल्वी को चुनकर संसद में भेजा था। मगर इसके बाद हुए चार चुनावों में पार्टी को जीत नहीं मिली। बीस साल से पार्टी लगातार हार रही थी, लेकिन वर्ष 2019 के चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने कुंवर दानिश अली को मैदान में भेजा था।

कुंवर दानिश अली ने बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। कुंवर दानिश अली की इस जीत से बसपा का बीस साल का सूख खत्म हो गया था। लेकिन, इस बार भी बसपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें केवल 164099 वोट मिले हैं।
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