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Moradabad News: अमेरिकी टैरिफ ने निगल ली पीतलनगरी के डेढ़ लाख कामगारों की नौकरी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 02:29 AM IST
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American tariffs have taken the jobs of 150,000 workers in the Brass City.
मुरादाबाद। अमेरिका की ओर से थोपे गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर शहर की फैक्टरियों में अब साफ तौर पर नजर आने लगा है। जिले के करीब छह हजार फैक्टरियों से अब तक लगभग डेढ़ लाख कामगारों को नौकरी से हटाया जा चुका है। पिछले साल हस्तशिल्प उत्पाद के कारोबार से करीब 5.50 लाख जुड़े थे। इनमें से अब केवल 3.85 लाख कामगारों के पास ही रोजगार बचा है। निर्यातकों का मानना है कि जिस तरह से निर्यात गिर रहा है, अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो हजारों और कामगारों की नौकरी पर संकट आएगा।
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भारत से 30 प्रतिशत का हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात करने वाली पीतलनगरी इस समय अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। अमेरिका की ओर से हस्तशिल्प उत्पादों पर भारी टैरिफ बढ़ाए जाने और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की वजह से पीतलनगरी की फैक्टरियों, कामगारों और निर्यात पर गहरा असर पड़ा है। फैक्टरियों में हस्तशिल्प उत्पादों का उत्पादन कम हो गया है। निर्यातक बताते हैं कि फैक्टरियों से छह माह में करीब डेढ़ लाख कामगारों की नौकरी चली गई है।
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वर्ष 2025 में हस्तशिल्प उत्पाद के कारोबार से करीब 5.50 लाख कामगार जुड़े हुए थे। सीएल गुप्ता एंड संस के संचालक अजय गुप्ता का कहना है कि जिले में छह हजार से अधिक फैक्टरियों में हस्तशिल्प उत्पाद तैयार किया जाता है। छह महीने के भीतर 25 से 30 प्रतिशत निर्यात घट गया है। पिछले छह महीने में पीतलनगरी के कुल कारीगारों में 30 प्रतिशत की नौकरी भी चली गई है। अब ऑर्डर कम मिल रहे हैं। अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आने वाले छह महीने में हजारों कामगारों की नौकरी जाएगी और फैक्टरी संचालकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सतपाल ने बताया कि तमाम फैक्टरियों में काम के घंटे कम कर दिए गए हैं। नए ऑर्डर कम मिल रहे हैं। इसका सीधा असर फैक्टरियों में काम करने वाले कामगारों पर पड़ रहा है। जिले में करीब 100 फैक्टरियां ऐसी हैं, जहां पर हफ्ते में दो दिन काम बंद रहता है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका का अतिरिक्त टैरिफ जारी रहा तो आने वाले एक साल में हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगा।
वह बताते हैं कि यह समस्या केवल अमेरिका की टैरिफ तक सीमित नहीं है। इसके अलावा पीतल, एल्युमिनियम, लोहे के कच्चे माल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। इन पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है। इसकी वजह से भी हस्तशिल्प उत्पाद महंगे होते जा रहे हैं। वहीं चीन जैसे देश कम टैक्स पर माल बेच रहे हैं। इसकी वजह से हमारे हस्तशिल्प उत्पाद प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान में पीतलनगरी के हस्तशिल्प उत्पाद के कारोबार से जिले के 3.85 लाख कामगार जुड़े हुए हैं।
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40 प्रतिशत आर्डर मिलता है अमेरिका से
-जिला उद्योग केंद्र के मुताबिक, पीतलनगरी से हर साल 10437 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात किया जाता है। बीते साल यह निर्यात 30 प्रतिशत कम हुआ है। करीब सात हजार करोड़ रुपये का ही उत्पाद निर्यात हो पाया। एमएचईए के प्रेसिडेंट नावेद उर रहमान ने बताया कि कुल निर्यात का 40 प्रतिशत हस्तशिल्प उत्पाद का कारोबार अकेले अमेरिका का है।
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वर्जन
- अमेरिकी खरीदारों ने तीन महीने से ऑर्डर होल्ड कर दिया है। रॉ-मैटेरियल की कीमत लगातार बढ़ने से 2.75 प्रतिशत सबवेंशन स्कीम का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। विदेशों में स्टोर खोलने से निर्यात नहीं बढ़ेगा, क्योंकि बड़ी फैक्टरियों को बड़े ऑर्डर की जरूरत है न की 10 से 15 पीस के ऑर्डर की। अमेरिका से ही सबसे ज्यादा ऑर्डर मिलता था। अगर समस्या पांच-छह महीने और रहीं तो लाखों का नुकसान उठाना पड़ेगा।
-अजय गुप्ता, संचालक, सीएल गुप्ता एंड संस
-फैक्टरियों में ठेके पर काम करने वाले कारीगरों को सबसे ज्यादा नुकसान है। ऑर्डर कम मिलने से उन्हें समय से काम नहीं मिल पा रहा है। कई ठेकेदार तीन महीने से खाली बैठे हुए है। निर्यातक के पास ऑर्डर नहीं है कि उन्हें काम दे सके। इसके साथ ही बड़ी फैक्टरियां चलाने में हर महीने का 50 लाख रुपये तक खर्च आता है। इन फैक्टरियों को करोड़ों का ऑर्डर चाहिए। यह तभी संभव है जब विदेशों में शांति का माहौल हो।
- सतपाल, सचिव, द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
-अमेरिकी टैरिफ की वजह से पुराने माल होल्ड पर हैं। पुराना ऑर्डर निकालना मुश्किल हो गया है। अमेरिका अब 30 प्रतिशत निर्यात बचा है। इसके साथ ही अमेरिकी खरीदारों का कहना है कि उनके यहां हस्तशिल्प उत्पाद का पुराना स्टॉक नहीं बिका है। इसकी वजह से वह ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। पुराना स्टॉक खाली होने पर ही ऑर्डर मिल पाएंगे।

- मोहम्मद अख्तर शम्सी, चेयरमैन, पैरामाउंट होम कलेक्शंस
-अमेरिका समेत अन्य देशों में ऑर्डर को लेकर खरीदारों से बातचीत चल रही है लेकिन कोई फायदा नहीं है। रॉ-मैटेरियल के बढ़ते दाम और अमेरिका टैरिफ की धमकी से ऑर्डर कम मिल रहे हैं। इससे फैक्टरी चलाना मुश्किल हो जा रहा है। छह महीने में हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आगे आने वाले समय में समस्याएं और बढ़ जाएंगी।
- विभोर गुप्ता, संचालक, डिजाइनको
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