{"_id":"6ad58be56fb653226306ccf0","slug":"aimim-chief-asaduddin-owaisi-says-we-will-not-make-any-nehru-gandhi-or-yadav-our-leader-rampur-up-2026-10-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: 'अब नेहरू-गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएंगे...'; ओवैसी बोले- अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, लीडर बनेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: 'अब नेहरू-गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएंगे...'; ओवैसी बोले- अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, लीडर बनेगा
Mon, 19 Oct 2026 08:51 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 19 Oct 2026 08:51 AM IST
सार
एआईएमआईएम अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर के टांडा की जनसभा में अनुसूचित जाति के लोगों और मुसलमानों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने भाजपा के साथ सपा और कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों को अपनी सफों (कतारों) से नेता पैदा करने होंगे। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक उनके साथ नाइंसाफी खत्म नहीं हो सकती।
विज्ञापन
Asaduddin Owaisi
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
राजनीति में ‘अब्दुल’ की भूमिका का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को टांडा में जनसभा के दौरान मुद्दे को उठाते हुए मुस्लिम समाज के राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि अब्दुल दरी बिछाए और गांधी तथा नेहरू का नाम लेकर सियासत करने वाले दूसरे लोग आकर उस पर बैठ जाएं, यह व्यवस्था अब नहीं चलेगी। मुसलमानों को अपना नेता खुद चुनना होगा।
ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम युवाओं में काबिलियत की कमी नहीं है। इसके बावजूद उन्हें राजनीतिक नेतृत्व में आगे बढ़ने के बजाय दूसरों के लिए काम करने तक सीमित रखने की कोशिश की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुसलमान अपना नेता खुद क्यों नहीं चुन सकते।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अब्दुल दरी बिछाए और गांधी तथा नेहरू का नाम लेकर सियासत करने वाले दूसरे लोग आकर उस पर बैठ जाएं, यह व्यवस्था अब नहीं चलेगी। मुसलमानों को अपना नेता खुद चुनना होगा।
विज्ञापन
ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम युवाओं में काबिलियत की कमी नहीं है। इसके बावजूद उन्हें राजनीतिक नेतृत्व में आगे बढ़ने के बजाय दूसरों के लिए काम करने तक सीमित रखने की कोशिश की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुसलमान अपना नेता खुद क्यों नहीं चुन सकते।
विज्ञापन
Trending Videos
टांडा की जनसभा में कहा, मुसलमानों को अपना नेता खुद चुनना होगा
उनके मुताबिक, राजनीतिक दल चाहते हैं कि अब्दुल नेता बनने के बजाय उनके लिए दरी बिछाने का काम करे और जब दरी बिछ जाए तो गांधी और नेहरू का नाम लेकर सियासत करने वाले लोग आकर बैठ जाएं, फिर हमसे पूछे कि अब्दुल कैसा है।
उनके मुताबिक, राजनीतिक दल चाहते हैं कि अब्दुल नेता बनने के बजाय उनके लिए दरी बिछाने का काम करे और जब दरी बिछ जाए तो गांधी और नेहरू का नाम लेकर सियासत करने वाले लोग आकर बैठ जाएं, फिर हमसे पूछे कि अब्दुल कैसा है।
ओवैसी ने दरी का उदाहरण देकर मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दरी बिछाने के बाद दूसरे लोग उस पर बैठ जाते हैं, लेकिन अब्दुल को नेतृत्व का अवसर नहीं मिलता।
उन्होंने मुस्लिम युवाओं से राजनीति में आगे आने और अपनी नेतृत्व क्षमता का इस्तेमाल करने का आह्वान किया। टांडा की जनसभा में ओवैसी के इस बयान ने ‘अब्दुल’ की राजनीतिक भूमिका को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।
ओवैसी बोले-मुसलमानों को अपनी सफों से नेता पैदा करने होंगे
एआईएमआईएम अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने टांडा की जनसभा में अनुसूचित जाति के लोगों और मुसलमानों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने भाजपा के साथ सपा और कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों को अपनी सफों (कतारों) से नेता पैदा करने होंगे। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक उनके साथ नाइंसाफी खत्म नहीं हो सकती।
एआईएमआईएम अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने टांडा की जनसभा में अनुसूचित जाति के लोगों और मुसलमानों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने भाजपा के साथ सपा और कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों को अपनी सफों (कतारों) से नेता पैदा करने होंगे। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक उनके साथ नाइंसाफी खत्म नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को शिकायत है कि देश की आजादी में उनके बुजुर्गों और उलमा-ए-इकराम ने कुर्बानियां दीं, लेकिन आजादी के बाद उन्हें संविधान में किए गए वादे के मुताबिक हक नहीं मिला। ऐसे में उन्हें अपने नेतृत्व के लिए आगे आना होगा।
ओवैसी ने कहा, उनके विरोधी सवाल करते हैं कि वह रामपुर और मुरादाबाद क्यों आते हैं। उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि 1952 में पहला संसदीय चुनाव लड़ने के लिए मौलाना अबुल कलाम आजाद रामपुर आए थे। जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें यहां चुनाव लड़ने के लिए भेजा था।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि उनसे यह सवाल क्यों नहीं पूछा गया। उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद के इल्म को देखकर ही यहां के लोगों ने उन्हें चुना था। वर्ष 1957 में उन्होंने मेवात यानी गुड़गांव से चुनाव लड़ा था।
अनुसूचित जाति के लोगों और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर ओवैसी ने कहा कि पेट की भूख तो बर्दाश्त की जा सकती है, लेकिन मान-सम्मान और इज्जत की बात आए तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां के दलितों और मुसलमानों को अस्पताल की गोली तो नहीं मिलती, लेकिन हुकूमत की बंदूक की गोली जरूर मिल जाती है। सभी को मिलकर नाइंसाफी के इस दौर को खत्म करना होगा।
रामपुर में महिला साक्षरता 44 प्रतिशत और 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित होने का किया दावा
महिलाओं को संबोधित करते हुए ओवैसी ने दावा किया कि रामपुर में महिला साक्षरता दर केवल 44 प्रतिशत है, जबकि जिले की कुल साक्षरता दर 53 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश की 67 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यहां के 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित हैं। उन्होंने इन आंकड़ों को सरकार की विफलता बताया।
महिलाओं को संबोधित करते हुए ओवैसी ने दावा किया कि रामपुर में महिला साक्षरता दर केवल 44 प्रतिशत है, जबकि जिले की कुल साक्षरता दर 53 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश की 67 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यहां के 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित हैं। उन्होंने इन आंकड़ों को सरकार की विफलता बताया।