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Moradabad News: एआई साॅफ्टवेयर ने पांच साल पुराने जीएसटी रिटर्न की पकड़ी कमियां
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मुरादाबाद। राज्य कर विभाग के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साॅफ्टवेयर ने जोन के दो जिले मुरादाबाद और बिजनौर में पांच साल पहले दाखिल जीएसटी रिटर्न की कमियों को पकड़ा है। इस मामले में 9332 कारोबारियों को नोटिस जारी होने पर अभी तक लोगों ने 11 करोड़ आठ लाख रुपये जमा किए हैं। अभी दिसंबर तक कारोबारियों को नोटिस का जवाब देने की मोहलत दी गई है।
राज्य कर विभाग के प्रदेश मुख्यालय ने वित्तीय वर्ष 2017 -18 में दाखिल मासिक और वार्षिक रिटर्न की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साॅफ्टवेयर के माध्यम से जांच कराई। जांच में मुरादाबाद जोन के 9332 कारोबारियों के जीएसटी रिटर्न में गड़बड़ियां पकड़ लीं। इस मामले में जोन कार्यालय से व्यवसायियों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस से परेशान व्यवसायियों ने इस मामले में राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त से संपर्क किया। व्यवसायियों ने सेमिनार के दौरान अधिकारियों से संवाद किया। अधिकारियों ने व्यवसायियों को जागरूक किया।
अपर आयुक्त ने बताया कि पांच साल पहले रिटर्न फाइल में अंतर को देखते हुए लखनऊ मुख्यालय से गड़बड़ी पकड़ी गई है। नोटिस मिलने के बाद काफी संख्या में व्यापारियों ने अंतर जमा कर दिया। कुछ लोगों ने नोटिस का जवाब दिया है। व्यवसायी खुद अपने जीएसटी रिटर्न की जांच करा सकते हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर फिर कर निर्धारित किया जाएगा। राज्य कर विभाग के अनुसार 11 करोड़ रुपये व्यवसायियों ने जमा कर दिया है। एक हजार रुपये से कम अंदर मिलने पर नोटिस नहीं भेजा गया है। इस मामले में मुरादाबाद जोन से मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई है।
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जीएसटी रिटर्न का अंतर मुख्यालय की टीम ने एआई के माध्यम से पकड़ा है। इस मामले में व्यवसायियों को स्पष्ट किया गया है। स्थानीय अधिकारी सिर्फ सुनवाई कर सकते हैं। दिसंबर तक नोटिस के बारे में व्यवसायियों को मोहलत दी गई है।
कमलेश्वर प्रसाद वर्मा अपर आयुक्त ग्रेड -1 मुरादाबाद
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राज्य कर विभाग के प्रदेश मुख्यालय ने वित्तीय वर्ष 2017 -18 में दाखिल मासिक और वार्षिक रिटर्न की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साॅफ्टवेयर के माध्यम से जांच कराई। जांच में मुरादाबाद जोन के 9332 कारोबारियों के जीएसटी रिटर्न में गड़बड़ियां पकड़ लीं। इस मामले में जोन कार्यालय से व्यवसायियों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस से परेशान व्यवसायियों ने इस मामले में राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त से संपर्क किया। व्यवसायियों ने सेमिनार के दौरान अधिकारियों से संवाद किया। अधिकारियों ने व्यवसायियों को जागरूक किया।
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अपर आयुक्त ने बताया कि पांच साल पहले रिटर्न फाइल में अंतर को देखते हुए लखनऊ मुख्यालय से गड़बड़ी पकड़ी गई है। नोटिस मिलने के बाद काफी संख्या में व्यापारियों ने अंतर जमा कर दिया। कुछ लोगों ने नोटिस का जवाब दिया है। व्यवसायी खुद अपने जीएसटी रिटर्न की जांच करा सकते हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर फिर कर निर्धारित किया जाएगा। राज्य कर विभाग के अनुसार 11 करोड़ रुपये व्यवसायियों ने जमा कर दिया है। एक हजार रुपये से कम अंदर मिलने पर नोटिस नहीं भेजा गया है। इस मामले में मुरादाबाद जोन से मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई है।
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जीएसटी रिटर्न का अंतर मुख्यालय की टीम ने एआई के माध्यम से पकड़ा है। इस मामले में व्यवसायियों को स्पष्ट किया गया है। स्थानीय अधिकारी सिर्फ सुनवाई कर सकते हैं। दिसंबर तक नोटिस के बारे में व्यवसायियों को मोहलत दी गई है।
कमलेश्वर प्रसाद वर्मा अपर आयुक्त ग्रेड -1 मुरादाबाद