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Moradabad News: मरने से पहले बीमार महिला का बीमा कर क्लेम हड़पने वाले गिरोह का एजेंट गिरफ्तार
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संभल। बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह ने बीमार बुजुर्ग महिला का बीमा कराने के लिए पहले 16 वर्ष उम्र कम कराई गई और फिर मौत होने पर बीमा क्लेम की धनराशि हड़प ली। इसकी जानकारी जब महिला के पति को हुई तो उन्होंने 12 अगस्त को मास्टरमाइंड समेत 10 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी क्रम में शनिवार को जुनावई थाना क्षेत्र के गांव नगरिया देवी निवासी प्रमोद कुमार एजेंट गिरफ्तार किया गया है। इस गिरोह के ज्यादातर सदस्य पहले से बीमा घाेटाले के दूसरे मामलों में जेल भेजे जा चुके हैं।
गांव खेड़ा फतेहपुर निवासी सुखराम सिंह ने 12 अगस्त को दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि उनकी पत्नी नेमवती की उम्र वर्ष 2024 में 64 वर्ष थी, वह बीमार रहती थीं। इसी दौरान प्रमोद कुमार, ओंकारेश्वर मिश्र व अन्य आठ साथियों के साथ उनके पास पहुंचा था। बीमा कराकर क्लेम दिलाने का भरोसा दिया था। बताया कि उनकी पत्नी की आधार कार्ड में जन्मतिथि एक जनवरी 1960 थी लेकिन गिरोह ने आधार कार्ड संशोधित कराकर एक जनवरी 1976 करा दी थी।
सुखराम ने बताया कि उनके आधार कार्ड में भी संशोधन कराया गया था। पहले एक जनवरी 1955 जन्मतिथि दर्ज थी लेकिन बाद में उसको एक जनवरी 1974 करा दिया था। उसके हिसाब से 19 वर्ष उम्र कम कराई गई थी। इसके बाद प्रमोद कुमार ने बैंक में खाता खुलवाया था। इसमें मोबाइल नंबर अपना लिंक कराया था और पासबुक भी अपने पास रख ली थी। सुखराम ने बताया कि जब उनकी पत्नी की मौत हो गई तो गिरोह के सदस्य उनके घर पहुंचे और मृत्यु प्रमाण जारी कराकर अपने साथ ले गए। बाद में पता चला कि गिरोह ने बीमा क्लेम कर लिया है।
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कार चेकिंग से सिरा मिला तो करोड़ों के बीमा घोटाले का राज खुला
बीमा क्लेम हड़पने के लिए हत्याओं और मृतकों के बीमे जैसे राज खुले
संवाद न्यूज एजेंसी
संभल। साै करोड़ रुपये से ज्यादा के बीमा घाेटाले का सिरा 17 जनवरी को सामान्य कार चेकिंग के दौरान मिला था। रजपुरा थाना क्षेत्र में पुलिस को कार में लाखाें रुपये मिले तो साथ मौजूद दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पता चला कि गिरफ्त में आए दो लोगों में से एक वाराणसी के कैंट में फुलवरिया निवासी ओंकारेश्वर मिश्र और दूसरा बबराला का अमित है। सख्ती पर बरामद रकम बीमा
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17 जनवरी को रजपुरा थाना पुलिस ने बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के फुलवरिया निवासी ओंकारेश्वर मिश्र और उसके साथी बबराला निवासी अमित को चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया था। आरोपियों की कार से लाखों रुपये कैश मिला था। पुलिस को प्रारंभिक जांच में लगा कि आरोपी हवाला कारोबार से जुड़े हैं लेकिन जब सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वह बीमा कराकर लोगों की रकम हड़प लेते हैं। इसमें बैंक, बीमा कंपनी और अन्य संस्थानों के कर्मचारी व अधिकारी जुड़े हैं। पुलिस ने बीमा कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की तो जानकारी सामने आई कि यह गिरोह देश के 12 राज्यों तक फैला है और इसका मास्टरमाइंड ओंकारेश्वर मिश्र है। यह गिरोह पहले शारीरिक रूप से कमजोर या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का बीमा कराता है इसके बाद हत्या कर हादसा दिखाता है और फिर बीमा क्लेम करते हैं। इसी तरह ऐसे लोगों को भी तलाश रखते हैं जिनकी हाल में मृत्यु हुई हो या वह मरने की स्थिति में बीमार हों। इस साजिश के तहत करोड़ों रुपये की रकम हड़प चुके हैं। पुलिस की छानबीन में सामने आया कि गिरोह में निजी बैंक कर्मचारी, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, आशा वर्कर, जनसेवा संचालक, बीमा कंपनी के इन्वेस्टिगेटर, बीमा कंपनी के मालिक तक शामिल हैं।
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पहली हत्या का राज दरियाब का खुला, फिर तीन हत्याएं भी सामने आईं
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि जब गिरोह के सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो बीमा कंपनी के इन्वेस्टिगेटर ने बदायूं जिले के थाना बिसौली अंतर्गत गांव दिलवारी निवासी दरियाब (38) की हत्या के बीमा क्लेम हड़पने की जानकारी दी। उसने बताया कि दरियाब की हत्या हुई थी लेकिन हादसा दिखाकर बीमा क्लेम हड़प लिया गया था।
यह हत्या 31 जुलाई 2024 को गाड़ी से कुचलकर व हथौड़े से पीटकर की थी। हादसा चंदौसी कोतवाली क्षेत्र में दिखाया गया था। पुलिस ने बाद में एफआर लगा दी थी जबकि दरियाब की गिरोह द्वारा 50 लाख रुपये से ज्यादा की अलग-अलग कंपनी में पॉलिसी कराई गई थीं। एसपी ने बताया कि इसके बाद पुलिस सतर्क हुई तो छानबीन गहराई से की गई।
इसी क्रम में बदायूं जिले के ही थाना इस्लामनगर अंतर्गत मोहल्ला बमनपुरी निवासी दिव्यांग संजय की हत्या का मामला सामने आया। इसमें मृतक के छोटे भाई नवीन ने 20 जून 2024 को हत्या की थी। 95 लाख रुपये के बीमा क्लेम हड़पने के लिए यह वारदात की गई थी।
तीसरी हत्या दिल्ली निवासी अमन (20) की 15 नवंबर 2023 को अमरोहा जिले के रहरा थाना क्षेत्र में की गई थी। रिश्ते के मामा ने गिरोह के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। 2.70 करोड़ रुपये की अलग-अलग कंपनी में बीमा पॉलिसी कराई गई थीं। इसमें 20 लाख रुपये मिल भी गए थे।
चौथी हत्या धनारी निवासी सलीम की 29 जुलाई 2022 को अमरोहा के रहरा थाना क्षेत्र में ही की गई थी। बीमा क्लेम की रकम को हड़प भी लिया गया था। अमन की हत्या का राज खुला तो सलीम की भी हत्या का राज सामने आ गया था। पुलिस को गिरोह द्वारा बताया गया था कि वह हत्या से पहले बीमा कराते हैं और फिर पॉलिसी भी खुद ही भरते हैं। एसपी ने बताया कि गिरोह द्वारा कुछ समय बाद हत्या कर हादसे में दर्ज कराते थे। पुलिस की छानबीन में सबूत नहीं मिलने पर एफआर लग जाती थी और यह गिरोह बीमा क्लेम हड़प लेता था।
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100 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले खुलासे में एसपी को मिला सीएम उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक
आईपीएस कृष्ण कुमार विश्नोई को बीमा क्लेम कर हड़पने वाले गिरोह का राजफाश करने और 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला उजागर करने में मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक मिला है। प्रदेश में एकमात्र आईपीएस हैं जिन्हें यह पदक दिया गया है। इससे पहले भी एसपी को गणतंत्र दिवस पर प्लेटिनम पदक डीजीपी की ओर से दिया गया था।
बतौर एसपी 10 सितंबर 2024 को कृष्ण कुमार विश्नोई ने चार्ज संभाला था। 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल को संभालने में एसपी की भूमिका अहम रही थी। बवाल को जल्द काबू कर लिया गया था और उनकी सूझबूझ काम आई थी। इससे पूरे शहर में बवाल नहीं पहुंचा और सांप्रदायिक तनाव नहीं हो सका था। संभल तैनाती से पहले भी कृष्ण कुमार विश्नोई चर्चा में रहे हैं। मेरठ में अंडर ट्रेनिंग रहते हुए गैंगस्टर बदन सिंह बद्दो की कोठी को जमींदोज कराया था। इसी दौरान माफिया माफिया योगेश भदौड़ा और भूपेन्द्र बाफ़र की भी अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर गैंगस्टर में अटैच करवाया था। मुजफ्फरनगर में एएसपी के रूप में तैनाती के दौरान सुशील मूंछ और संजीव जीवा की संपत्तियों को खंगाला था। सुशील मूंछ गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
वहीं गोरखपुर में विनोद उपाध्याय की कोठी को ध्वस्त कराकर चर्चा में आए थे। इसके बाद भूमाफिया जवाहर यादव की 416 करोड़ की संपत्ति, कमलेश यादव की 195 करोड़ की संपत्ति और अभिषेक यादव की 103 करोड़ की संपत्ति गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कराई थी। स्मैक तस्कर किंगपिन पंडिताइन की 13 करोड़ और किंगपिन मंजू निषाद की 33 करोड़ की संपत्ति भी कुर्क करने में अहम भूमिका रही थी। अब बीमा क्लेम घोटाला खुलासे को लेकर पदक मिला है।
वर्जन
बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई लगातार की जा रही है। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का बीमा क्लेम हड़पने का मामला है। इसमें गैंगस्टर की कार्रवाई भी जल्द अमल में लाई जाएगी। 18 प्रकरण में 69 आरोपी जेल जा चुके हैं।
-कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी, संभल
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गांव खेड़ा फतेहपुर निवासी सुखराम सिंह ने 12 अगस्त को दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि उनकी पत्नी नेमवती की उम्र वर्ष 2024 में 64 वर्ष थी, वह बीमार रहती थीं। इसी दौरान प्रमोद कुमार, ओंकारेश्वर मिश्र व अन्य आठ साथियों के साथ उनके पास पहुंचा था। बीमा कराकर क्लेम दिलाने का भरोसा दिया था। बताया कि उनकी पत्नी की आधार कार्ड में जन्मतिथि एक जनवरी 1960 थी लेकिन गिरोह ने आधार कार्ड संशोधित कराकर एक जनवरी 1976 करा दी थी।
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सुखराम ने बताया कि उनके आधार कार्ड में भी संशोधन कराया गया था। पहले एक जनवरी 1955 जन्मतिथि दर्ज थी लेकिन बाद में उसको एक जनवरी 1974 करा दिया था। उसके हिसाब से 19 वर्ष उम्र कम कराई गई थी। इसके बाद प्रमोद कुमार ने बैंक में खाता खुलवाया था। इसमें मोबाइल नंबर अपना लिंक कराया था और पासबुक भी अपने पास रख ली थी। सुखराम ने बताया कि जब उनकी पत्नी की मौत हो गई तो गिरोह के सदस्य उनके घर पहुंचे और मृत्यु प्रमाण जारी कराकर अपने साथ ले गए। बाद में पता चला कि गिरोह ने बीमा क्लेम कर लिया है।
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बीमा क्लेम हड़पने के लिए हत्याओं और मृतकों के बीमे जैसे राज खुले
संवाद न्यूज एजेंसी
संभल। साै करोड़ रुपये से ज्यादा के बीमा घाेटाले का सिरा 17 जनवरी को सामान्य कार चेकिंग के दौरान मिला था। रजपुरा थाना क्षेत्र में पुलिस को कार में लाखाें रुपये मिले तो साथ मौजूद दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पता चला कि गिरफ्त में आए दो लोगों में से एक वाराणसी के कैंट में फुलवरिया निवासी ओंकारेश्वर मिश्र और दूसरा बबराला का अमित है। सख्ती पर बरामद रकम बीमा
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17 जनवरी को रजपुरा थाना पुलिस ने बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के फुलवरिया निवासी ओंकारेश्वर मिश्र और उसके साथी बबराला निवासी अमित को चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया था। आरोपियों की कार से लाखों रुपये कैश मिला था। पुलिस को प्रारंभिक जांच में लगा कि आरोपी हवाला कारोबार से जुड़े हैं लेकिन जब सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वह बीमा कराकर लोगों की रकम हड़प लेते हैं। इसमें बैंक, बीमा कंपनी और अन्य संस्थानों के कर्मचारी व अधिकारी जुड़े हैं। पुलिस ने बीमा कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की तो जानकारी सामने आई कि यह गिरोह देश के 12 राज्यों तक फैला है और इसका मास्टरमाइंड ओंकारेश्वर मिश्र है। यह गिरोह पहले शारीरिक रूप से कमजोर या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का बीमा कराता है इसके बाद हत्या कर हादसा दिखाता है और फिर बीमा क्लेम करते हैं। इसी तरह ऐसे लोगों को भी तलाश रखते हैं जिनकी हाल में मृत्यु हुई हो या वह मरने की स्थिति में बीमार हों। इस साजिश के तहत करोड़ों रुपये की रकम हड़प चुके हैं। पुलिस की छानबीन में सामने आया कि गिरोह में निजी बैंक कर्मचारी, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, आशा वर्कर, जनसेवा संचालक, बीमा कंपनी के इन्वेस्टिगेटर, बीमा कंपनी के मालिक तक शामिल हैं।
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पहली हत्या का राज दरियाब का खुला, फिर तीन हत्याएं भी सामने आईं
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि जब गिरोह के सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो बीमा कंपनी के इन्वेस्टिगेटर ने बदायूं जिले के थाना बिसौली अंतर्गत गांव दिलवारी निवासी दरियाब (38) की हत्या के बीमा क्लेम हड़पने की जानकारी दी। उसने बताया कि दरियाब की हत्या हुई थी लेकिन हादसा दिखाकर बीमा क्लेम हड़प लिया गया था।
यह हत्या 31 जुलाई 2024 को गाड़ी से कुचलकर व हथौड़े से पीटकर की थी। हादसा चंदौसी कोतवाली क्षेत्र में दिखाया गया था। पुलिस ने बाद में एफआर लगा दी थी जबकि दरियाब की गिरोह द्वारा 50 लाख रुपये से ज्यादा की अलग-अलग कंपनी में पॉलिसी कराई गई थीं। एसपी ने बताया कि इसके बाद पुलिस सतर्क हुई तो छानबीन गहराई से की गई।
इसी क्रम में बदायूं जिले के ही थाना इस्लामनगर अंतर्गत मोहल्ला बमनपुरी निवासी दिव्यांग संजय की हत्या का मामला सामने आया। इसमें मृतक के छोटे भाई नवीन ने 20 जून 2024 को हत्या की थी। 95 लाख रुपये के बीमा क्लेम हड़पने के लिए यह वारदात की गई थी।
तीसरी हत्या दिल्ली निवासी अमन (20) की 15 नवंबर 2023 को अमरोहा जिले के रहरा थाना क्षेत्र में की गई थी। रिश्ते के मामा ने गिरोह के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। 2.70 करोड़ रुपये की अलग-अलग कंपनी में बीमा पॉलिसी कराई गई थीं। इसमें 20 लाख रुपये मिल भी गए थे।
चौथी हत्या धनारी निवासी सलीम की 29 जुलाई 2022 को अमरोहा के रहरा थाना क्षेत्र में ही की गई थी। बीमा क्लेम की रकम को हड़प भी लिया गया था। अमन की हत्या का राज खुला तो सलीम की भी हत्या का राज सामने आ गया था। पुलिस को गिरोह द्वारा बताया गया था कि वह हत्या से पहले बीमा कराते हैं और फिर पॉलिसी भी खुद ही भरते हैं। एसपी ने बताया कि गिरोह द्वारा कुछ समय बाद हत्या कर हादसे में दर्ज कराते थे। पुलिस की छानबीन में सबूत नहीं मिलने पर एफआर लग जाती थी और यह गिरोह बीमा क्लेम हड़प लेता था।
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100 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले खुलासे में एसपी को मिला सीएम उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक
आईपीएस कृष्ण कुमार विश्नोई को बीमा क्लेम कर हड़पने वाले गिरोह का राजफाश करने और 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला उजागर करने में मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक मिला है। प्रदेश में एकमात्र आईपीएस हैं जिन्हें यह पदक दिया गया है। इससे पहले भी एसपी को गणतंत्र दिवस पर प्लेटिनम पदक डीजीपी की ओर से दिया गया था।
बतौर एसपी 10 सितंबर 2024 को कृष्ण कुमार विश्नोई ने चार्ज संभाला था। 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल को संभालने में एसपी की भूमिका अहम रही थी। बवाल को जल्द काबू कर लिया गया था और उनकी सूझबूझ काम आई थी। इससे पूरे शहर में बवाल नहीं पहुंचा और सांप्रदायिक तनाव नहीं हो सका था। संभल तैनाती से पहले भी कृष्ण कुमार विश्नोई चर्चा में रहे हैं। मेरठ में अंडर ट्रेनिंग रहते हुए गैंगस्टर बदन सिंह बद्दो की कोठी को जमींदोज कराया था। इसी दौरान माफिया माफिया योगेश भदौड़ा और भूपेन्द्र बाफ़र की भी अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर गैंगस्टर में अटैच करवाया था। मुजफ्फरनगर में एएसपी के रूप में तैनाती के दौरान सुशील मूंछ और संजीव जीवा की संपत्तियों को खंगाला था। सुशील मूंछ गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
वहीं गोरखपुर में विनोद उपाध्याय की कोठी को ध्वस्त कराकर चर्चा में आए थे। इसके बाद भूमाफिया जवाहर यादव की 416 करोड़ की संपत्ति, कमलेश यादव की 195 करोड़ की संपत्ति और अभिषेक यादव की 103 करोड़ की संपत्ति गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कराई थी। स्मैक तस्कर किंगपिन पंडिताइन की 13 करोड़ और किंगपिन मंजू निषाद की 33 करोड़ की संपत्ति भी कुर्क करने में अहम भूमिका रही थी। अब बीमा क्लेम घोटाला खुलासे को लेकर पदक मिला है।
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बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई लगातार की जा रही है। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का बीमा क्लेम हड़पने का मामला है। इसमें गैंगस्टर की कार्रवाई भी जल्द अमल में लाई जाएगी। 18 प्रकरण में 69 आरोपी जेल जा चुके हैं।
-कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी, संभल