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31 साल बाद भाजपा को मिली बड़ी जीत -123
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रामपुर। लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी घनश्याम सिंह लोधी को 42192 मतों से जीत हासिल हुई है। रामपुर संसदीय सीट पर भाजपा को इतनी बड़ी जीत 31 साल पहले हासिल हुई थी। इसके बाद भाजपा दो बार लोकसभा का चुनाव जीती लेकिन जीत का आंकड़ा इतना नहीं पहुंचा। वर्ष 1991 के चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी डॉ. राजेंद्र शर्मा ने कांग्रेस के प्रत्याशी जुल्फिकार अली उर्फ मिक्की मियां को 49809 वोटों से शिकस्त दी थी।
रामपुर की सरजमीं शुरुआत से ही राजनीति का बड़ा केंद्र रही है। रामपुर से लोकसभा का पहला चुनाव अबुल कलाम आजाद ने लड़ा था और जीतने के बाद वह देश के पहले शिक्षा मंत्री भी बने थे। बाद के वर्षों में आजम खां ने रामपुर की सियासत में अलग ध्रुव बनाया, जबकि मुख्तार अब्बास नकवी, जयाप्रदा जैसे नेता, अभिनेताओं को भी रामपुर ने संसद तक का सफर कराया।
इस सीट से भाजपा को मिली सफलताओं में इस उपचुनाव में जीत का बड़ा अंतर भी एक अलग पहलू है। वर्ष 1991 के बाद यह पहला मौका है, जब भाजपा को 42192 वोटों से जीत हासिल हुई है। 1991 में भाजपा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने कांग्रेस के जुल्फिकार अली उर्फ मिक्की मियां को 49809 वोटों से हराया था। तब भाजपा को 213429 वोट मिले थे और कांग्रेस को 163620 वोट प्राप्त हुए थे।
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इसके बाद भाजपा ने 1998 और 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी, लेकिन जीत का अंतर 25 हजार वोटों तक भी नहीं पहुंच सका था। 1998 में भाजपा करीब पांच हजार, तो 2014 में 23435 वोटों से ही जीत सकी थी।
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रामपुर की सरजमीं शुरुआत से ही राजनीति का बड़ा केंद्र रही है। रामपुर से लोकसभा का पहला चुनाव अबुल कलाम आजाद ने लड़ा था और जीतने के बाद वह देश के पहले शिक्षा मंत्री भी बने थे। बाद के वर्षों में आजम खां ने रामपुर की सियासत में अलग ध्रुव बनाया, जबकि मुख्तार अब्बास नकवी, जयाप्रदा जैसे नेता, अभिनेताओं को भी रामपुर ने संसद तक का सफर कराया।
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इस सीट से भाजपा को मिली सफलताओं में इस उपचुनाव में जीत का बड़ा अंतर भी एक अलग पहलू है। वर्ष 1991 के बाद यह पहला मौका है, जब भाजपा को 42192 वोटों से जीत हासिल हुई है। 1991 में भाजपा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने कांग्रेस के जुल्फिकार अली उर्फ मिक्की मियां को 49809 वोटों से हराया था। तब भाजपा को 213429 वोट मिले थे और कांग्रेस को 163620 वोट प्राप्त हुए थे।
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इसके बाद भाजपा ने 1998 और 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी, लेकिन जीत का अंतर 25 हजार वोटों तक भी नहीं पहुंच सका था। 1998 में भाजपा करीब पांच हजार, तो 2014 में 23435 वोटों से ही जीत सकी थी।