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सीलिंग लैंड-वक्फ संपत्तियों पर कराए कब्जे
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Wed, 26 Apr 2017 02:48 AM IST
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जमीन पर कब्जे की जांच
- फोटो : अमर उजाला
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अवैध कब्जे रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने एंटी भू - माफिया टास्क फोर्स तो गठित कर दी लेकिन जिला लेवल पर गठित ये टीमें कितनी कारगर होंगी इसे लेकर संशय है। वजह ये है कि कब्जों के मामलों में जिलों में बैठे अफसरों का अहम रोल रहा है।
मुरादाबाद में खुद अफसर ही सीलिंग की 2.5 लाख वर्ग मीटर जमीन के साथ ही वक्फ की जमीन और शत्रु संपत्तियों को ठिकाने लगा चुके हैं। यदि टास्क फोर्स ईमानदारी से सीलिंग लैंड, वक्फ संपत्ति और शत्रु संपत्ति का रिकार्ड खंगाल ले तो आंकड़े चौंकाने वाले होंगे।
पिछले कुछ सालों में खुद अफसर सीलिंग, वक्फ और शुत्र संपत्ति की करीब 4.5 लाख वर्ग मीटर जमीन पर रिकार्ड में हेराफेरी करके कब्जे करा चुके हैं। मुरादाबाद में सीलिंग की करीब 2.5 लाख वर्ग मीटर जमीन थी। बसपा शासन में बसपा नेताओं और सपा सरकार में सपा नेताओं के साथ मिलकर अफसरों ने इस जमीन को नीलाम कर डाला।
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वर्ष 2000 में अरबन सीलिंग एक्ट लागू होते वक्त स्पष्ट किया गया था कि वर्ष 2000 से पूर्व जिस जमीन पर किसान का कब्जा है उसे किसान के पक्ष में छोड़ा जा सकता है लेकिन जिस जमीन पर सरकार ने कब्जा ले लिया है वो सरकारी जमीन मानी जाएगी और डीएम के कब्जे में रहेगी।
लेकिन पिछले कुछ सालों में रिकार्ड में हेराफेरी करके अफसरों ने बैक डेट में किसानों के कब्जे दर्शाए और सीलिंग की जमीनों को किसानों के पक्ष में छोड़ना शुरू कर दिया। यह खेल अभी तक जारी है और इसमें सीलिंग डिपार्टमेंट से लेकर अहम ओहदों पर बैठे जिम्मेदार अफसर तक सब शामिल हैं।
सीलिंग की करीब एक लाख वर्ग मीटर जमीन पर पहले ही अफसरों ने कब्जा करा दिया और बाकी 1.5 लाख वर्ग मीटर पर कब्जे का सिलसिला अभी तक जारी है। मझोला, मझोली, मिलन विहार, सम्राट अशोक नगर, इंद्रा आवास समिति, शाहपुर तिगरी, भोगपुर मिठौनी, लाकड़ी फाजलपुर, करुला, जयंतीपुर, रहमत नगर, हनुमान मूर्ति के आसपास की दस से अधिक बस्तियाें समेत पूरे शहर में 89 बस्तियां सीलिंग की लैंड में ही अवैध ढंग से बसी हैं।
सीलिंग डिपार्टमेंट और प्रशासन ने सत्ताधारी दल के नेताओं और प्रापर्टी डीलरों से मिलकर पूरी की पूरी सीलिंग लैंड को ठिकाने लगा दिया है। सपा सरकार में सपा और बसपा सरकार में बसपा नेताओं ने प्रशासन की शह पर यहां कब्जे किए और फिर प्लाटिंग करके यहां अवैध बस्तियां बसती चली गईं।
इसी तरह वक्फ की करीब दो लाख वर्ग मीटर जमीन और अरबों रुपये की शत्रु संपत्ति को भी रिकार्ड में हेराफेरी करके अफसर ठिकाने लगा चुके हैं। जिगर कालोनी से लेकर नबावपुरा और काली मंदिर से लेकर जामा मस्जिद तक रामगंगा किनारे नगर निगम की हजारों वर्ग मीटर जमीन पर भी छुटभै्य्ये प्रापर्टी डीलर अफसरों की मदद से कब्जा करके यहां टाट टप्पर बस्तियां बसा चुके हैं।
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मुरादाबाद में खुद अफसर ही सीलिंग की 2.5 लाख वर्ग मीटर जमीन के साथ ही वक्फ की जमीन और शत्रु संपत्तियों को ठिकाने लगा चुके हैं। यदि टास्क फोर्स ईमानदारी से सीलिंग लैंड, वक्फ संपत्ति और शत्रु संपत्ति का रिकार्ड खंगाल ले तो आंकड़े चौंकाने वाले होंगे।
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पिछले कुछ सालों में खुद अफसर सीलिंग, वक्फ और शुत्र संपत्ति की करीब 4.5 लाख वर्ग मीटर जमीन पर रिकार्ड में हेराफेरी करके कब्जे करा चुके हैं। मुरादाबाद में सीलिंग की करीब 2.5 लाख वर्ग मीटर जमीन थी। बसपा शासन में बसपा नेताओं और सपा सरकार में सपा नेताओं के साथ मिलकर अफसरों ने इस जमीन को नीलाम कर डाला।
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वर्ष 2000 में अरबन सीलिंग एक्ट लागू होते वक्त स्पष्ट किया गया था कि वर्ष 2000 से पूर्व जिस जमीन पर किसान का कब्जा है उसे किसान के पक्ष में छोड़ा जा सकता है लेकिन जिस जमीन पर सरकार ने कब्जा ले लिया है वो सरकारी जमीन मानी जाएगी और डीएम के कब्जे में रहेगी।
लेकिन पिछले कुछ सालों में रिकार्ड में हेराफेरी करके अफसरों ने बैक डेट में किसानों के कब्जे दर्शाए और सीलिंग की जमीनों को किसानों के पक्ष में छोड़ना शुरू कर दिया। यह खेल अभी तक जारी है और इसमें सीलिंग डिपार्टमेंट से लेकर अहम ओहदों पर बैठे जिम्मेदार अफसर तक सब शामिल हैं।
सीलिंग की करीब एक लाख वर्ग मीटर जमीन पर पहले ही अफसरों ने कब्जा करा दिया और बाकी 1.5 लाख वर्ग मीटर पर कब्जे का सिलसिला अभी तक जारी है। मझोला, मझोली, मिलन विहार, सम्राट अशोक नगर, इंद्रा आवास समिति, शाहपुर तिगरी, भोगपुर मिठौनी, लाकड़ी फाजलपुर, करुला, जयंतीपुर, रहमत नगर, हनुमान मूर्ति के आसपास की दस से अधिक बस्तियाें समेत पूरे शहर में 89 बस्तियां सीलिंग की लैंड में ही अवैध ढंग से बसी हैं।
सीलिंग डिपार्टमेंट और प्रशासन ने सत्ताधारी दल के नेताओं और प्रापर्टी डीलरों से मिलकर पूरी की पूरी सीलिंग लैंड को ठिकाने लगा दिया है। सपा सरकार में सपा और बसपा सरकार में बसपा नेताओं ने प्रशासन की शह पर यहां कब्जे किए और फिर प्लाटिंग करके यहां अवैध बस्तियां बसती चली गईं।
इसी तरह वक्फ की करीब दो लाख वर्ग मीटर जमीन और अरबों रुपये की शत्रु संपत्ति को भी रिकार्ड में हेराफेरी करके अफसर ठिकाने लगा चुके हैं। जिगर कालोनी से लेकर नबावपुरा और काली मंदिर से लेकर जामा मस्जिद तक रामगंगा किनारे नगर निगम की हजारों वर्ग मीटर जमीन पर भी छुटभै्य्ये प्रापर्टी डीलर अफसरों की मदद से कब्जा करके यहां टाट टप्पर बस्तियां बसा चुके हैं।