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अहंकार छोड़ विनम्रता अपनाना ही उत्तम मार्दव : भद्रबाहु
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मुरादाबाद। रामगंगा विहार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाया गया। सुबह भगवान श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। सुमेरचंद जैन, मनोरमा जैन, ऋतु जैन, अनुज जैन, सारिका जैन, अक्षिता, अक्षत, सौम्या और नवीन जैन परिवार को पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य मिला। विधान का आयोजन अनिल जैन, शशि जैन, विहान जैन और सानवी जैन परिवार ने किया।
आचार्य भद्रबाहु सागर महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि कुल, रूप, जाति और पद आदि का अहंकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने को ही कर्ता मानने का अहंभाव भी मान कषाय का कारण बनता है। मान कषाय का त्याग कर विनम्रता, कोमलता और सरलता धारण करना उत्तम मार्दव धर्म का स्वरूप है। शाम को संगीत के साथ भक्तिभाव से प्रभु की आरती की गई। इसके बाद आचार्य ने प्रतिक्रमण कराया। इस मौके पर अध्यक्ष संदीप जैन, मंत्री नीरज जैन, विकास जैन, सजल जैन, कमल कुमार जैन, सर्वोदय जैन, राकेश जैन, धन कुमार जैन, महिला अध्यक्ष सुषमा जैन, उपमंत्री श्रुति जैन, शिवानी जैन आदि मौजूद रहे।
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आचार्य भद्रबाहु सागर महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि कुल, रूप, जाति और पद आदि का अहंकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने को ही कर्ता मानने का अहंभाव भी मान कषाय का कारण बनता है। मान कषाय का त्याग कर विनम्रता, कोमलता और सरलता धारण करना उत्तम मार्दव धर्म का स्वरूप है। शाम को संगीत के साथ भक्तिभाव से प्रभु की आरती की गई। इसके बाद आचार्य ने प्रतिक्रमण कराया। इस मौके पर अध्यक्ष संदीप जैन, मंत्री नीरज जैन, विकास जैन, सजल जैन, कमल कुमार जैन, सर्वोदय जैन, राकेश जैन, धन कुमार जैन, महिला अध्यक्ष सुषमा जैन, उपमंत्री श्रुति जैन, शिवानी जैन आदि मौजूद रहे।
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