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'मेरी मौत की जिम्मेदार पुलिस': केस को लेकर थाने में मांगे जा रहे 18 लाख रुपये, सुसाइड नोट लिख मजदूर ने दी जान

Sun, 11 Jun 2023 10:41 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, उझारी (अमरोहा)
संवाद न्यूज एजेंसी, उझारी (अमरोहा) Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 11 Jun 2023 10:41 PM IST
सार

मृतक मदनपाल के जेब से मिले पत्र में सैदनगली पुलिस को तो जिम्मेदार ठहराया ही गया, वहीं उसमें यह भी लिखा है कि जब तक मोदी और योगी न आ जाएं। मेरी लाश को उठाने मत देना। पत्र में लिखी लाइनों से साफ है कि मदनपाल मानसिक तनाव झेल रहा था।

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A laborer hanged himself in Saidangali Amroha accuses police of harassment
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

अमरोहा के थाना सैदनगली क्षेत्र के गांव तारारा निवासी मजदूर मदनपाल (38) ने फंदे पर लटक कर जान दे दी। शव गांव से एक किलोमीटर की दूरी पर पेड़ से लटका मिला। मजदूर की जेब से मिले एक पत्र को सुसाइड नोट बताया जा रहा है, जिसमें लिखा है मेरी मौत की जिम्मेदार सैदनगली थाना पुलिस है। पुलिस द्वारा मेरा उत्पीड़न किया जा रहा था। मुझसे एक पुराने केस को लेकर 18 लाख रुपये मांगे जा रहे थे। फिलहाल पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। 

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बताते हैं कि 21 जून 2022 को कार की टक्कर से थाना क्षेत्र गांव फतेहपुर खादर में साइकिल सवार राजमिस्त्री कृपाल (55) की मौत हो गई थी। कार में मदन भी बैठा था। हादसे के बाद चालक और अन्य लोग मौके से भाग गए थे, लेकिन लोगों ने मदन को पकड़ लिया था। मामले में मदन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मरने वाले व्यक्ति के परिजन मुआवजे के रूप में मोटी रकम मांग रहे थे, जिसको लेकर मदन काफी परेशान चल रहा था। 

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कृपाल सिंह के घर वालों ने एक साल बाद मुआवजा लेने के लिए कोर्ट में 18 लाख 28 हजार का दावा किया था। इसकी सूचना मदन को उसके वकील द्वारा मिली। तब से ही मदनपाल डिप्रेशन में था, जिसके चलते रविवार सुबह मदन ने गांव से ही कुछ दूरी पर पेड़ से लटक कर जान दे दी। मृतक ने अपने पीछे चार बच्चे छोड़े हैं। जिसमें तीन बेटे और एक बेटी है। मदन की जेब से एक पत्र मिला है, जिसे सुसाइड नोट बताया जा रहा है। इसमें लिखा है कि मुकदमे में मेरा नाम गलत लिखा गया था। मुझसे पांच लाख रुपये पहले ले लिए गए और अब फिर मुझसे 18 लाख मांगे जा रहे हैं। मेरी मौत की जिम्मेदार से सैदनगली पुलिस है।

सीओ श्वेताभ भास्कर का कहना है कि शव पोस्टमार्टम को भेजा गया है। जिस मुकदमे में इसका नाम लिखा गया था। चार्जशीट में से नाम निकाल दिया गया था। कोर्ट में दूसरे पक्ष ने 18 लाख मुआवजा लेने का दावा किया है। इसकी जानकारी मिलने पर तनाव में चले जाने की वजह से व्यक्ति ने यह आत्मघाती कदम उठाया है। मामले की बारीकी से जांच की जा रही।

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जब तक मोदी-योगी न आ जाएं, मेरी लाश न उठे
मृतक मदनपाल के जेब से मिले पत्र में सैदनगली पुलिस को तो जिम्मेदार ठहराया ही गया, वहीं उसमें यह भी लिखा है कि जब तक मोदी और योगी न आ जाएं। मेरी लाश को उठाने मत देना। पत्र में लिखी लाइनों से साफ है कि मदनपाल मानसिक तनाव झेल रहा था। मृतक की पत्नी भागवती व परिवार के लोगों का भी यही कहना है कि हादसे के केस में उसे गलत तरीके से फंसाया गया। अब 18 लाख का मुआवजा देने के लिए मदनपाल पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पुलिस भी उसे परेशान कर रही थी। यही कारण उसकी आत्महत्या के कारण बने। 

पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल 
21 जून 2022 को हुए सड़क हादसे में पुलिस ने मदनपाल को जिम्मेदार साबित कर दिया था। जबकि परिवार के लोगों का कहना है कि उस दौरान मदनपाल ने बताया था कि वह कार नहीं चला रहा था। चालक व अन्य लोग वहां से फरार हो गए थे। तत्कालीन इंस्पेक्टर ने भी मदनपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस द्वारा कार मालिक व उसमें सवार अन्य लोगों से पूछताछ तक नहीं की गई। जिसके बाद मजदूर मदनपाल लाचार हो गया था। आखिरकार उसने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या करने का रास्ता चुन लिया। पूरे प्रकरण में कहीं न कहीं पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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