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Moradabad News: गन्ने के नाम पर बड़ा खेल...अगैती बताकर किसानों को बेच दी गई सामान्य किस्म

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 01:11 AM IST
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A big game in the name of sugarcane... a normal variety was sold to farmers as advance.
मुरादाबाद। गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र करनाल की ओर से विकसित की गई अगैती गन्ना किस्म सीओ-5009 भले ही अनुसंधान केंद्रों से बाहर न निकली हो लेकिन उसके नाम पर किसानों ने मुरादाबाद और आसपास के जिलों में सामान्य किस्म सीओ-5011 को लगा लिया है। किसान इसे अगैती समझकर जल्दी काट लेते हैं। चीनी मिलें इस किस्म को अगैती मानने से इन्कार कर देती हैं और सामान्य किस्म का मूल्य देती हैं। इसे लेकर हमेशा विवाद की स्थिति बनी रहती है। इस भ्रम को दूर करने के लिए इस बार गन्ना विभाग ने किस्म विशेषज्ञों को भी बुलाया है। ताकि किसान बुवाई के समय ही किस्म की पहचान कर सकें।
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कई साल पहले मुरादाबाद और अमरोहा के कुछ किसान करनाल क्षेत्र से गन्ने का बीज खरीदकर लाए, जो वास्तव में सामान्य किस्म सीओ-5011 का था लेकिन उसे किसानों को सीओ-5009 (अगैती) का बताकर बेच दिया गया है। कुछ ही दिनों में इस किस्म का यहां बड़ा रकबा हो गया। कुछ ही दिनों में एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंच गया। अब यही किस्म भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एमआर मीना ने बताया कि सीओ-5009 (कर्ण-10) व सीओ-5011 (कर्ण-9) दोनों ही करनाल से विकसित की गई हैं, दोनों किस्में रिलीज भी हुई हैं लेकिन वर्ष 2013 में रिलीज सीओ-5009 को कुछ कारणों से अधिक प्रचारित नहीं किया गया, इसका बीज भी नहीं दिया गया लेकिन कुछ शिकायतें आ रही हैं कि किसान सामान्य (मध्यम-देरी से पकने वाली) सीओ-5011 किस्म को ही सीओ-5009 समझ कर बो रहे हैं। इसके लिए किसानों को स्वयं ही पहचान करनी चाहिए, पहचान के लिए वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।
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उपायुक्त (गन्ना) हरपाल सिंह के अनुसार अगैती किस्म पहले कटती है, पहले चीनी मिलों में पहुंचती है, उसका भाव भी 10 रुपए अधिक होता है, उसमें चीनी की रिकवरी अधिक होती है, लेकिन यदि कोई सामान्य किस्म अगैती किस्म के रूप में चीनी मिलों तक जाएगी तो चीनी मिलों को चीनी रिकवरी में नुकसान होगा, यदि गेट पर या गन्ना क्रय केंद्र पर उसे खरीदने से मना किया जाता है, या रेट दूसरा सामान्य का दिया जाता है तो किसानों को नुकसान होता है। इस भ्रम को दूर करने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है, वसंत कालीन गन्ना बुवाई चल रही है, इसके लिए मास्टर ट्रेनर भी बुलाए गए हैं, जो किसानों को दोनों किस्मों की पहचान बता रहे हैं, जहां गन्ना आरक्षित किया गया है, वहां भी विशेषज्ञ किस्मों की सही पहचान बता रहे हैं। दोनों किस्मों की स्थिति स्पष्ट होगी तो किसान और चीनी मिलें दोनों ही नुकसान से बच सकेंगी।
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