{"_id":"46-33210","slug":"Moradabad-33210-46","type":"story","status":"publish","title_hn":"चांद देख नम हुई आंखें, मजलिस-मातम शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चांद देख नम हुई आंखें, मजलिस-मातम शुरू
Moradabad
Updated Sun, 26 Oct 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। तन पर काले लिबास। आंखें नवासा-ए-रसूल के गम में नम। नौहों के बोल पर शहीदाने करबला का मातम। इस गमगीन माहौल के बीच इस्लामिक कैलेंडर का आगाज हुआ। मोहर्रम का चांद नजर आते ही शिया मुसलमान गम में डूब गए हैं। शनिवार की शाम लाकड़ीवालान से इस्तकबाल-ए-अजा का जुलूस निकाला गया। रविवार को इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा।
मोहर्रम का महीना शुरू होते ही हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जांनिसाराें की शहादत की याद ताजा हो गई। इमामबाड़े और अजाखाने सजा दिए गए। शिया समुदाय के लोग गम में डूब गए। इशा की नमाज के बाद लाकड़ीवालान में मरहूम मशकूरुल हसन नकवी के मकान से मोहर्रम का पहला जुलूस निकाला गया। अलम के पीछे चल रहे अजादारों ने मातम किया। या हुसैन की सदाओं के बीच सबने अजीम शहादत पर खिराजे अकीदत पेश किया। इस दौरान आरिफ अब्बास नकवी ने नौहाख्वानी पेश की। सीनाजनी करते हुए अजादार इमामबाड़ा हकीम फरजंद अली पहुंचे। मौलाना मजहर अब्बास नकवी ने मजलिस को खिताब किया। उन्हाेंने करबला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत को बयान किया। इस दौरान जावेद यावर, मो. अब्बास, नवाब हैदर अली, नसीम हैदर जैदी, नवाब शौकत अली, कौसर अली, अरमान नकवी, जमीर बाकरी, सोहेल हैदर रिजवी आदि मौजूद रहे।
तोड़ दी चूड़ियां, ओढ़ लिए काले लिबास
मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही मजलिस और मातम का दौर शुरू हो गया। शोक की निशानी काले अलम लगा दिए गए। शिया समुदाय की महिलाआें ने हाथाें की चूड़ियां तोड़ दी। गहनाें को उतार कर काले लिबास ओढ़ लिए। घर-घर मजलिस आयोजित हुईं, जहां हजरत फातिमा के लख्ते जिगर इमाम हुसैन की शहादत पर बयान हुआ। अकीदतमंदों ने इस दौरान मातम भी किया।
मोहर्रम का महीना शुरू होते ही हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जांनिसाराें की शहादत की याद ताजा हो गई। इमामबाड़े और अजाखाने सजा दिए गए। शिया समुदाय के लोग गम में डूब गए। इशा की नमाज के बाद लाकड़ीवालान में मरहूम मशकूरुल हसन नकवी के मकान से मोहर्रम का पहला जुलूस निकाला गया। अलम के पीछे चल रहे अजादारों ने मातम किया। या हुसैन की सदाओं के बीच सबने अजीम शहादत पर खिराजे अकीदत पेश किया। इस दौरान आरिफ अब्बास नकवी ने नौहाख्वानी पेश की। सीनाजनी करते हुए अजादार इमामबाड़ा हकीम फरजंद अली पहुंचे। मौलाना मजहर अब्बास नकवी ने मजलिस को खिताब किया। उन्हाेंने करबला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत को बयान किया। इस दौरान जावेद यावर, मो. अब्बास, नवाब हैदर अली, नसीम हैदर जैदी, नवाब शौकत अली, कौसर अली, अरमान नकवी, जमीर बाकरी, सोहेल हैदर रिजवी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
तोड़ दी चूड़ियां, ओढ़ लिए काले लिबास
मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही मजलिस और मातम का दौर शुरू हो गया। शोक की निशानी काले अलम लगा दिए गए। शिया समुदाय की महिलाआें ने हाथाें की चूड़ियां तोड़ दी। गहनाें को उतार कर काले लिबास ओढ़ लिए। घर-घर मजलिस आयोजित हुईं, जहां हजरत फातिमा के लख्ते जिगर इमाम हुसैन की शहादत पर बयान हुआ। अकीदतमंदों ने इस दौरान मातम भी किया।
विज्ञापन