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अब दो दिनों में फिट कैसे हो गए उस्मानुल हक?

Moradabad Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक उस्मानुल हक आखिर दो दिनों में चंगे कैसे हो गए? उनके समर्थन में उतरे सपा विधायकों ने प्रेस कांफ्रेंस कर अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनकी बीमारी को भी सही ठहराया था फिर अचानक बीमारियां ठीक कैसे हो गईं और डाक्टरों ने उनको बिल्कुल फिटफाट कैसे घोषित कर जेल कैसे भिजवा दिया? दरअसल सत्ता की हनक में नियमों को कठपुतली की तरह नचाया गया। उस्मानुलहक अधिक से अधिक दिन तक कैदखाने से बाहर कैसे रह सकते हैं इसका कागजी प्लाट तैयार हुआ और सबकुछ देखकर आंख बंद रखने की सरकारी मजबूरी अफसरों को ओढ़ा दी गई। जब मीडिया में मामला उछला, शासन तक शोर मचा तो आनन-फानन में पूर्व विधायक को जेल भिजवा दिया गया।
अगर इस मामले में हम गलती और दोष ढूंढने चलेंगे तो शायद कभी न मिले क्योंकि कागजों पर तो सबकुछ नियमानुसार ही हुआ होगा। सियासत की सीढ़ी चढ़कर कानूनों से खेलने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी तमाम बार इस तरह के हथकंडे दबंग नेताओं ने अपनाए हैं। 16 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में सपा सरकार का शपथ ग्रहण हुआ था। 24 मई को पैर में फ्रैक्चर की शिकायत पर पूर्व विधायक उस्मानुल हक को जेल से जिला अस्पताल के ईएनटी वार्ड में दाखिल किया गया था। सवाल यह भी उठा कि पैरों में फ्रैक्चर वाले को ईएनटी वार्ड क्यों? तब यह समझाया गया कि यह वार्ड खाली रहता है। उसके बाद यह वार्ड उस्मान का अपना हो गया। यहां दूसरा कोई मरीज उसके बाद भर्ती नहीं किया गया। जिला अस्पताल के डाक्टर उन्हें भर्ती रखने का आधार खुद तैयार करते और मियाद बढ़ती जाती। हकीकत में कमजोरों पर आंखें तरेरने वाले सरकारी अफसर हनक के आगे ‘बौने’ हो गए। न तो जेल प्रशासन ने अपने कैदी की हालत पूछने की कोशिश की और न हीं जिले में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों ने बीमारी की हकीकत जानने की हिम्मत जुटाई। उम्रकैदी को 54 दिन की आजादी सत्ता की चाभी ने दिलाई थी। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. एससी शर्मा ने तीन बार डिस्चार्ज किए जाने की बात अफसरों को बताई थी फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। दाद देनी होगी डा. शर्मा को जिन्होंने दबाव के बीच भी हिम्मत जुटाई नियमों को पालन कराने की। जब अमर उजाला में ‘डिस्चार्ज होने के बाद भी अस्पताल में उस्मान’ खबर छपी तो हड़कंप मचा। उस्मानुलहक के चाचा विधायक शमीमुल हक, बिलारी के विधायक इरफान और कुंदरकी के विधायक हाजी रिजवान ने डाक्टर शर्मा को गलत ठहाराया और डिस्क स्लिप और किडनी में बीमारी की बात बताकर अस्पताल में भर्ती रखने की पैरवी की लेकिन चूंकि मामला ऊपर तक शोर मचा चुका था इसलिए आखिर कार 16 को तड़के उस्मानुल हक को ओके बताकर जेल भेज दिया गया।

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