गेहूं के बोरे ने हिलाई देश की ‘सियासत’

Moradabad Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। गेहूं खरीद सीजन में बोरों का अकाल सियासत को गरमा रहा है। देश के छह राज्यों में जबरदस्त किल्लत के चलते गेहूं खरीद प्रभावित हो गई। यूपी में सैकड़ों क्रय केंद्र बंद हैं। मध्यप्रदेश में हो रहे हंगामे और संसद में मुद्दा गूंजने के बाद वहां की सप्लाई तो बढ़ गई जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, बिहार व झारखंड हफ्तों से अपनी बारी के इंतजार में हैं। इन प्रांतों के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार को चिट्ठियों पर चिट्ठियां लिखे जा रहे हैं।
देश में कोलकाता इकलौता ऐसा शहर है जहां बोरों का प्रोडक्शन करने वाली कई कंपनियां हैं। यहीं से सरकारी एजेंसियां बोरों की खरीद करती हैं लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में गेहूं का उत्पादन बढ़ने और बोरों का प्रोडक्शन कम होने से गेहूं खरीद का सीजन लड़खड़ा गया। बताया जाता है बोरा उत्पादन के लिए रॉ मैटेरियल बंगलादेश से आता है जो मांग से बहुत कम उपलब्ध हुआ है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश में बोरे की कमी का मुद्दा संसद में गूंजा था। सुषमा स्वराज ने जोरशोर के साथ इस मामले को उठाया। लिहाजा वहां बोरों की सप्लाई बढ़ा दी गई। वहां के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तर्क दिया कि एमपी इकलौता ऐसा राज्य है जहां किसानों को गेहूं खरीद पर 100 रुपये का बोनस मिल रहा है लिहाजा उन्हें मांग के अनुसार बोरे दिए जाएं। बोरों की इस सियासत का सबसे ज्यादा प्रभाव यूपी पर पड़ रहा है। एक अप्रैल से तीस जून तक गेहूं खरीद होनी है लेकिन अभी से सेंटर बंद होने लगे। मुरादाबाद मंडल में ही चालीस सेंटर बंद हैं। शासन द्वारा दिए गए खरीद लक्ष्य के मुताबिक 42 लाख टन गेहूं खरीदा जाना है। इसके लिए बोरों की एक लाख 68 हजार गांठ चाहिए। यानी 8 करोड़ 40 लाख बोरे। जबकि अभी तक 1 करोड़ 60 लाख बोरे। जबकि 65 हजार बोरे धान खरीद से बचे हुए हैं। चीफ मार्केटिंग आफिसर डा. सुधाकर मिश्र का कहना है कि बोरों की कमी को देखते हुए ओपन मार्केट से खरीद करने, चीनी मिल और राइस मिलों से बोरे लेने या फिर किसानों के बोरों में ही खरीद करने की प्लानिंग की गई है।


प्रदेश में गेहूं खरीद का लक्ष्य- 42 लाख मीट्रिक टन
बोरों की आवश्यक्ता- 8 करोड़ 40 लाख
अब तक की उपलब्धता-1 करोड़ 60 लाख
गेहूं क्रय केंद्रों की संख्या- 4800
गेहूं का रेट-1285 रुपये कुंतल






मंत्रियों के जिलों में उतर रही रैक
मुरादाबाद। सरकारी मशीनरी भी सियासी रसूख के हिसाब से काम कर रही है। मंत्रियों के जिलों में बोरों की कमी से तौल बंद न होने पाए इसका विशेष ख्याल रखा जा रहा है। चाहें इसके लिए दूसरे जनपदों में सेंटर बंद हो जाएं। वेस्ट में जेपीनगर, बिजनौर, भीमनगर, मेरठ, बरेली, आगरा, सहारनपुर व मुजफ्फरनगर में बोरों की उपलब्धता बनाए रखने को मशीनरी हर संभव कोशिश कर रही है।



मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र
मुरादाबाद। खाद्य विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर बोरों की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस बार गेहूं का उत्पादन बढ़ा है लिहाजा किसानों की गेहूं समय से खरीद ली जाए इसके लिए जरूरी है कि बोरों की रैक समय से उपलब्ध हो। प्रदेश सरकार ने केंद्र से पुराने बोरों में खरीद की भी अनुमति मांगी है।



कानून व्यवस्था का हवाला दे रहे सभी राज्य
मुरादाबाद। बोरों की कमी के कारण गेहूं खरीद केंद्र बंद होने से किसान हंगामा कर सकते हैं। जिससे कानून व्यवस्था का सवाल खड़ा हो जाएगा। लिहाजा बोरों की उपलब्धता बढ़ाई जाए। पंजाब, हरियाणा, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि सेंटर बंद होने से किसान भड़क रहे हैं। वैसे भी हर किसान गेहूं बेचकर दूसरी फसलों की पैदावार को प्लानिंग करता है।

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