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फर्जी नियुक्तियों पर नौ साल बाद होगी रिपोर्ट
Moradabad
Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। कांठ नगर पंचायत में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रकरण नौ साल बाद गरमा गया है। शनिवार को जिलाधिकारी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कर्मचारियों की भर्ती के वर्ष में नगर पंचायत अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी और संबंधित लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश जारी कर दिया है।
सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का यह मामला वर्ष 2003 का है। चार सफाई कर्मचारी भर्ती किए गए थे। उस समय प्रशासन से शिकायत की गई थी कि तैनाती में अनियमितताएं बरती गईं हैं। शिकायत की जांच एसडीएम कांठ को दी गई। एसडीएम ने भी अपनी रिपोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया को अवैध बताया था। जो नोट शीट बनाई गई थी उस पर जो हस्ताक्षर थे उन्हें मिटाया गया। दोबारा से साइन किए गए। तत्कालीन अधिशासी अधिकारी मंगलसेन से जब अफसरों ने पूछा था तब उन्होंने कहा था कि वह साइन ही उन्हीं के नहीं है। कर्मचारियों की नियुक्ति से भी इंकार किया। खैर चारों सफाई कर्मचारियों को 10 जनवरी 2007 में सेवा मुक्त कर दिया गया। इस पर यह कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए। प्रशासन ने जो जांच रिपोर्ट तैयार की थी उसमें कहा गया कि इस भर्ती में तत्कालीन अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी व लिपिक दोषी हैं लिहाजा उनके खिलाफ मुकदमा लिखाया जाए। जिलाधिकारी डा. हरिओम ने शनिवार को चारों पक्षकारों को सुना और अंत में फैसला किया कि इस भर्ती प्रक्रिया में तत्कालीन अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
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सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का यह मामला वर्ष 2003 का है। चार सफाई कर्मचारी भर्ती किए गए थे। उस समय प्रशासन से शिकायत की गई थी कि तैनाती में अनियमितताएं बरती गईं हैं। शिकायत की जांच एसडीएम कांठ को दी गई। एसडीएम ने भी अपनी रिपोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया को अवैध बताया था। जो नोट शीट बनाई गई थी उस पर जो हस्ताक्षर थे उन्हें मिटाया गया। दोबारा से साइन किए गए। तत्कालीन अधिशासी अधिकारी मंगलसेन से जब अफसरों ने पूछा था तब उन्होंने कहा था कि वह साइन ही उन्हीं के नहीं है। कर्मचारियों की नियुक्ति से भी इंकार किया। खैर चारों सफाई कर्मचारियों को 10 जनवरी 2007 में सेवा मुक्त कर दिया गया। इस पर यह कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए। प्रशासन ने जो जांच रिपोर्ट तैयार की थी उसमें कहा गया कि इस भर्ती में तत्कालीन अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी व लिपिक दोषी हैं लिहाजा उनके खिलाफ मुकदमा लिखाया जाए। जिलाधिकारी डा. हरिओम ने शनिवार को चारों पक्षकारों को सुना और अंत में फैसला किया कि इस भर्ती प्रक्रिया में तत्कालीन अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
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