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हर-हर महादेव के घोष से गूंजे शिवालय
Updated Mon, 30 Jul 2018 02:12 AM IST
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मुरादाबाद।
सावन के पहले सोमवार पर भोले को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में जलाभिषेक किया गया। जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। मंदिरों को फूलों से सजाया गया। श्रद्धालुओं के लिए पूजा की सामग्री की दुकानें लगाई गईं। तड़के से ही श्रद्धालुओं ने लाइनों में लगभग भगवान भोले नाथ के दर्शन किए। शिव परिवार का पूजन गंगाजल, दूध, शहद, बेलपत्र आदि से किया गया। इस दौरान कांवड़ चढ़ाने की भी विशेष व्यवस्था रही।
प्राचीन शिव मंदिर झांझनपुर के पुजारी पंडित केदारनाथ मिश्र ने बताया कि कामेश्वर नाथ मंदिर (चौरासी घंटा मंदिर) में मुख्य रूप से कांवड़ चढ़ाई जाती हैं। झांझनपुर के मंदिर में तीन-चार पुजारी कांवड़ के गंगाजल से विधि विधान से पूजा-पाठ करवाते हैं। रुद्राभिषेक भी करवाया गया है। कांवड़ियों के लिए चाय, नाश्ता, फल आदि की व्यवस्था की गई है। सुबह चार बजे से रात को दस बजे तक मंदिर में पूजा-पाठ किया जाएगा। सुबह साढ़े छह बजे और शाम सात बजे भोले बाबा की बड़ी आरती की जाएगी। महामृंत्युजय का जाप करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में आखिरी सोमवार को सबसे ज्यादा जल चढ़ाया जाता है, जबकि पहले सोमवार को रामपुर, बरेली, पीलीभीत में कांवड़ के गंगाजल से जलाभिषेक का चलन है।
सत्य श्री शिव मंदिर आवास-विकास के पुजारी पंडित कैलाश मुरारी ने बताया कि सुबह छह बजे जलाभिषेक करवाया जाएगा। दोपहर एक बजे तक श्रद्धालु जल चढ़ा सकेंगे। शाम पांच बजे से महिलाएं कीर्तन करेंगी। आखिरी सोमवार को कांवड़ चढ़ेगी। श्रद्धालुओं के आराम की भी व्यवस्था की गई है। सुबह सात बजे और शाम को साढ़े सात बजे आरती की जाएगी। सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी भी मौजूद रहते हैं।
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कांवड़ियों के जत्थों से रौनक
रविवार को अन्य जनपदों में जाने वाले कांवड़ियों से कांठ रोड और दिल्ली रोड पर रौनक रही। भगवा रंग की वेशभूषा में सजे भक्त रंग-बिरंगी कांवड़, पैरों में बंधे घुंघरू, जुबान पर भोले के जयकारों के साथ कांवड़िए अपने गंतव्य को जा रहे थे। उनके साथ डीजे पर भोले बाबा के सुरीले भजनों से राहगीर भी आनंदित होते रहे। जत्थे के ट्रक के आगे बाइक पर चलकर रहे साथियों ने रास्ता खाली करवाया। मीलों दूर से जल लेकर आने के बावजूद उनके चेहरे पर थकान नजर नहीं आ रही थी। बीच-बीच में वह भजनों पर थिरकते भी रहे।
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सावन के पहले सोमवार पर भोले को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में जलाभिषेक किया गया। जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। मंदिरों को फूलों से सजाया गया। श्रद्धालुओं के लिए पूजा की सामग्री की दुकानें लगाई गईं। तड़के से ही श्रद्धालुओं ने लाइनों में लगभग भगवान भोले नाथ के दर्शन किए। शिव परिवार का पूजन गंगाजल, दूध, शहद, बेलपत्र आदि से किया गया। इस दौरान कांवड़ चढ़ाने की भी विशेष व्यवस्था रही।
प्राचीन शिव मंदिर झांझनपुर के पुजारी पंडित केदारनाथ मिश्र ने बताया कि कामेश्वर नाथ मंदिर (चौरासी घंटा मंदिर) में मुख्य रूप से कांवड़ चढ़ाई जाती हैं। झांझनपुर के मंदिर में तीन-चार पुजारी कांवड़ के गंगाजल से विधि विधान से पूजा-पाठ करवाते हैं। रुद्राभिषेक भी करवाया गया है। कांवड़ियों के लिए चाय, नाश्ता, फल आदि की व्यवस्था की गई है। सुबह चार बजे से रात को दस बजे तक मंदिर में पूजा-पाठ किया जाएगा। सुबह साढ़े छह बजे और शाम सात बजे भोले बाबा की बड़ी आरती की जाएगी। महामृंत्युजय का जाप करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में आखिरी सोमवार को सबसे ज्यादा जल चढ़ाया जाता है, जबकि पहले सोमवार को रामपुर, बरेली, पीलीभीत में कांवड़ के गंगाजल से जलाभिषेक का चलन है।
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सत्य श्री शिव मंदिर आवास-विकास के पुजारी पंडित कैलाश मुरारी ने बताया कि सुबह छह बजे जलाभिषेक करवाया जाएगा। दोपहर एक बजे तक श्रद्धालु जल चढ़ा सकेंगे। शाम पांच बजे से महिलाएं कीर्तन करेंगी। आखिरी सोमवार को कांवड़ चढ़ेगी। श्रद्धालुओं के आराम की भी व्यवस्था की गई है। सुबह सात बजे और शाम को साढ़े सात बजे आरती की जाएगी। सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी भी मौजूद रहते हैं।
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कांवड़ियों के जत्थों से रौनक
रविवार को अन्य जनपदों में जाने वाले कांवड़ियों से कांठ रोड और दिल्ली रोड पर रौनक रही। भगवा रंग की वेशभूषा में सजे भक्त रंग-बिरंगी कांवड़, पैरों में बंधे घुंघरू, जुबान पर भोले के जयकारों के साथ कांवड़िए अपने गंतव्य को जा रहे थे। उनके साथ डीजे पर भोले बाबा के सुरीले भजनों से राहगीर भी आनंदित होते रहे। जत्थे के ट्रक के आगे बाइक पर चलकर रहे साथियों ने रास्ता खाली करवाया। मीलों दूर से जल लेकर आने के बावजूद उनके चेहरे पर थकान नजर नहीं आ रही थी। बीच-बीच में वह भजनों पर थिरकते भी रहे।