{"_id":"5c8424fdbdec2214422f9d5d","slug":"81552164093-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वातावरण में भारी कणों की मात्रा बढ़ा रही प्रदूषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वातावरण में भारी कणों की मात्रा बढ़ा रही प्रदूषण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
पीतल नगरी को स्वच्छ हवा मिलना चुनौती बनी हुई है। शहर में जगह-जगह हो रहे विकास कार्यों से वातावरण में प्रदूषित कणों में इजाफा हो रहा है। स्थिति यह है कि सुबह के समय शहर की आबोहवा मानक से तीन गुना प्रदूषित है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि सभी को समग्र रूप से प्रयास करने होंगे।
शनिवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक 140 था, जो शाम को 138 हो गया। इसमें पीएम 2.5 का औसत स्तर सुबह को 125 और शाम को 98 दर्ज किया गया। वहीं पीएम 10 का औसत स्तर सुबह में 140 और शाम को 138 रहा। नैम्प समन्वयक और हिंदू कालेज की वनस्पति विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि पीएम 2.5 का प्रति घंटा मानक 30 और पीएम 10 का प्रति घंटा मानक सौ है। इस लिहाज से सुबह के समय पीएम 2.5 का प्रदूषण आठ गुना अधिक था। पीएम 2.5 अति सूक्ष्म कण हैं यह पीएम 10 के साथ रहते हैं। यह फेफड़ों में जाने के बाद दिल में पहुंच जाते हैं। इस तरह खून में प्रवेश कर जाते हैं। पूरे शरीर में है। हालांकि उनकी मात्रा कम है, लेकिन दुष्प्रभाव बहुत हैं। किडनी, लीवर आदि प्रभावित होने के साथ ब्लड कैंसर की संभावना बन जाती है, जबकि पीएम 10 का यह सांस नली तक जाते हैं। इससे सांस की बीमारी दमा, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, टीबी आदि बीमारियां हो रही हैं। विभागों को निर्माण कार्य रात में करना चाहिए। दिन के समय हो तो रूट का डायवर्जन करें। पानी का छिड़काव करें। इससे आस-पास के वातावरण में पीएम 10 का स्तर कम होगा। हाई अलर्ट पहले से रहेगा तो लोग मास्क लगाएंगे। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अजय शर्मा ने बताया कि डीजल वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्य, इंडस्ट्री प्रदूषण के बड़े कारण हैं। मौसम भी एक कारण है। सभी विभाग मिलकर प्रदूषण को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। विकास के साथ प्रदूषण बनना स्वाभाविक है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए आम जनमानस भी सामूहिक प्रयास करें और रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
विज्ञापन
पीतल नगरी को स्वच्छ हवा मिलना चुनौती बनी हुई है। शहर में जगह-जगह हो रहे विकास कार्यों से वातावरण में प्रदूषित कणों में इजाफा हो रहा है। स्थिति यह है कि सुबह के समय शहर की आबोहवा मानक से तीन गुना प्रदूषित है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि सभी को समग्र रूप से प्रयास करने होंगे।
शनिवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक 140 था, जो शाम को 138 हो गया। इसमें पीएम 2.5 का औसत स्तर सुबह को 125 और शाम को 98 दर्ज किया गया। वहीं पीएम 10 का औसत स्तर सुबह में 140 और शाम को 138 रहा। नैम्प समन्वयक और हिंदू कालेज की वनस्पति विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि पीएम 2.5 का प्रति घंटा मानक 30 और पीएम 10 का प्रति घंटा मानक सौ है। इस लिहाज से सुबह के समय पीएम 2.5 का प्रदूषण आठ गुना अधिक था। पीएम 2.5 अति सूक्ष्म कण हैं यह पीएम 10 के साथ रहते हैं। यह फेफड़ों में जाने के बाद दिल में पहुंच जाते हैं। इस तरह खून में प्रवेश कर जाते हैं। पूरे शरीर में है। हालांकि उनकी मात्रा कम है, लेकिन दुष्प्रभाव बहुत हैं। किडनी, लीवर आदि प्रभावित होने के साथ ब्लड कैंसर की संभावना बन जाती है, जबकि पीएम 10 का यह सांस नली तक जाते हैं। इससे सांस की बीमारी दमा, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, टीबी आदि बीमारियां हो रही हैं। विभागों को निर्माण कार्य रात में करना चाहिए। दिन के समय हो तो रूट का डायवर्जन करें। पानी का छिड़काव करें। इससे आस-पास के वातावरण में पीएम 10 का स्तर कम होगा। हाई अलर्ट पहले से रहेगा तो लोग मास्क लगाएंगे। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अजय शर्मा ने बताया कि डीजल वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्य, इंडस्ट्री प्रदूषण के बड़े कारण हैं। मौसम भी एक कारण है। सभी विभाग मिलकर प्रदूषण को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। विकास के साथ प्रदूषण बनना स्वाभाविक है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए आम जनमानस भी सामूहिक प्रयास करें और रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
विज्ञापन