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चौकीदार की नौकरी के लिए पहुंचे एमए पास
Updated Thu, 13 Sep 2018 02:24 AM IST
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मुरादाबाद।
सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में नौकरी नहीं मिलने से हताश पढ़ेलिखे युवा चौकीदारी से लेकर खाना बनाने के लिए तैयार हैं। बुधवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में संविदा पर चपरासी, चौकीदार और रसोइया के चार पदों के लिए 32 युवाओं ने साक्षात्कार दिया। इन पदों के लिए शैक्षिक योग्यता आठवीं पास थी, लेकिन अधिकतर युवा स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री लेकर पहुंचे थे।
मुरादाबाद जिले में नौ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं। प्रत्येक विद्यालय में 100-100 छात्राएं हैं। भगतपुर ब्लाक के स्कूल में दो रसोइया, मुरादाबाद देहात के स्कूल में एक चौकीदार और डिलारी ब्लाक के स्कूल में चपरासी की संविदा पर भर्ती होनी थी। दर्जनों युवाओं ने इन पदों के लिए आवेदन किए थे। बुधवार को गांधी पार्क स्थित नगर संस्थान केंद्र में आवेदकों का साक्षात्कार हुआ। रसोइया का वेतन साढ़े चार हजार और चौकीदार और चपरासी का पांच हजार रुपये मासिक है। साक्षात्कार कमेटी सदस्यों ने युवाओं की डिग्री देखी तो उनसे पूछा क्यों करना चाहते हैं चौकीदार और रसोइया की नौकरी। युवाओं ने बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करते करते अब उम्मीद छोड़ चुके हैं। प्राइवेट सेक्टर में भी नौकरी नहीं मिल रही है। कुशालपुर गांव के उदल सिंह ने बताया कि 2015 में पढ़ाई पूरी कर ली। सरकारी नौकरी की उम्मीद छोड़ दी है। चंद्रप्रकाश भी स्नातक हैं।
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सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में नौकरी नहीं मिलने से हताश पढ़ेलिखे युवा चौकीदारी से लेकर खाना बनाने के लिए तैयार हैं। बुधवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में संविदा पर चपरासी, चौकीदार और रसोइया के चार पदों के लिए 32 युवाओं ने साक्षात्कार दिया। इन पदों के लिए शैक्षिक योग्यता आठवीं पास थी, लेकिन अधिकतर युवा स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री लेकर पहुंचे थे।
मुरादाबाद जिले में नौ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं। प्रत्येक विद्यालय में 100-100 छात्राएं हैं। भगतपुर ब्लाक के स्कूल में दो रसोइया, मुरादाबाद देहात के स्कूल में एक चौकीदार और डिलारी ब्लाक के स्कूल में चपरासी की संविदा पर भर्ती होनी थी। दर्जनों युवाओं ने इन पदों के लिए आवेदन किए थे। बुधवार को गांधी पार्क स्थित नगर संस्थान केंद्र में आवेदकों का साक्षात्कार हुआ। रसोइया का वेतन साढ़े चार हजार और चौकीदार और चपरासी का पांच हजार रुपये मासिक है। साक्षात्कार कमेटी सदस्यों ने युवाओं की डिग्री देखी तो उनसे पूछा क्यों करना चाहते हैं चौकीदार और रसोइया की नौकरी। युवाओं ने बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करते करते अब उम्मीद छोड़ चुके हैं। प्राइवेट सेक्टर में भी नौकरी नहीं मिल रही है। कुशालपुर गांव के उदल सिंह ने बताया कि 2015 में पढ़ाई पूरी कर ली। सरकारी नौकरी की उम्मीद छोड़ दी है। चंद्रप्रकाश भी स्नातक हैं।
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