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लाल निशान और वसूली का खेल खत्म, अब बंधा बनेगा
Updated Thu, 08 Jun 2017 01:51 AM IST
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लाल निशान और वसूली का खेल खत्म, अब बंधा बनेगा
- डीएम गंभीर, एमडीए समेत सभी विभागों से मांगी रिपोर्ट
- भूमि अधिग्रहण की कास्ट कम करने को घटाए जा सकते हैं सर्किल रेट
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
रामगंगा किनारे बंधा निर्माण को लेकर सरकारी महकमों द्वारा लाल निशान लगाकर की जाने वाली वसूली का खेल अब डीएम आरके सिंह ने खत्म कर दिया है। अब बरसात के बाद बंधा निर्माण के लिए कागजों की बजाए हकीकत में काम होगा। अभी तक पिछले तीन सालों से सरकारी महकमे नदी किनारे बंधा निर्माण के नाम पर लाल निशान लगाकर किसानों का उत्पीड़न और वसूली का खेल खेलते रहे हैं।
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बुधवार को रामगंगा नदी के किनारे बंधा निर्माण के मुद्दे पर एमडीए, सिंचाई विभाग, बाढ़ खंड और नगर निगम के अफसरों की बैठक बुलाई। जिसमें उन्होंने बंधा निर्माण की संभावनाआें पर सभी विभागों से रिपोर्ट मांगी। डीएम ने कहा कि एमडीए ने रामगंगा किनारे कालोनियों बनाकर बेची हैं लिहाजा बंधा निर्माण की जिम्मेदारी भी एमडीए की ही है। उन्हाेंने प्राधिकरण से पूछा कि क्या उन्हाेंने कालोनियां बेचते वक्त बंधा निर्माण का शुल्क भी वसूला है। इस पर एमडीए कोई ठीक जवाब नहीं दे सका। डीएम ने रिकार्ड के साथ दोबारा रिपोर्ट मांगी है।
अभी बरसात शुरू हो चुकी है लिहाजा अभी काम मुमकिन नहीं है। लेकिन विकास प्राधिकरण और नगर निगम का अच्छा अनुभव रखने वाले जिलाधिकारी आरके सिंह ने संबंधित महकमों को साफ कर दिया है कि अब बंधा निर्माण पर लाल निशान, वसूली और महज जुबानी कसरत का खेल नहीं चलेगा। बल्कि बरसात के बाद इस पर गंभीरता से काम होगा। पिछले तीन सालों से बंधा निर्माण के नाम पर संबंधित महकमे हर साल लाल निशान लगाने पहुंचते हैं और फिर जमीन को बंधे की जद में दिखाकर किसानों से वसूली का खेल होता रहा है। जबकि एमडीए बोर्ड में बंधे का नक्शा पास हो चुका है, जिसमें तय हो चुका है कि किस - किस सिजरा नंबर की जमीन बंधा निर्माण में अधिग्रहण की जानी है। बंधा निर्माण के लिए रामगंगा किनारे कुल 60 मीटर जमीन चाहिए, जिसमें से 25 मीटर में पत्थर, 25 मीटर में बंधा और अगले 10 मीटर में नाले का निर्माण होना है। कोठीवाल डेंटल कालेज से लेकर आगे जिगर कालोनी तक तो यह जमीन मौके पर मौजूद है लेकिन जिगर कालोनी से आगे नवाबपुरा, लालबाग, काली मंदिर और जामा मस्जिद एरिया में इस एरिया में रामगंगा में छोटे - छोटी अवैध टाट टप्पर बस्तियां बस गई हैं। जिन्हें आज तक हटाया नहीं जा सका है। ये टाट टप्पर बस्तियां बंधा निर्माण में सबसे बड़ी रुकावट हैं।
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इसके अलावा बड़ा मुद्दा बजट का है। 12.6 किमी लंबे बंधा निर्माण के लिए 64 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की जरूरत होगी। जिस पर मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से अधिग्रहण में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस खर्च को कम करने के लिए जिला प्रशासन जुलाई में इस एरिया का सर्किल रेट कम कर सकता है। दरअसल रामगंगा किनारे नदी से सटी जमीनों का सर्किल रेट भी रामगंगा विहार जितना ही कर दिया गया है जबकि हकीकत में यहां जमीनों की दर अभी भी काफी कम है। यदि सर्किल रेट कम कर दिया जाए तो भूमि अधिग्रहण का काम 500 करोड़ के बजाए 20-25 करोड़ रुपये में ही निपट सकता है।
बंधा निर्माण के लिए पूरी गंभीरता से प्रयास किया जा रहा है। संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की गई है। लाल निशान और वसूली की कोई शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी। हमारा फोकस फिलहाल बंधा निर्माण के लिए बजट जुटाने पर है। एमडीए से पूछा गया है कि कालोनियां बेचते वक्त उन्हाेंने बंधे का चार्ज वसूला है या नहीं, यदि वसूला है तो बंधा निर्माण प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं है तो हम एमडीए, सिंचाई विभाग, नगर निगम और बाकी विभागों से मिलकर बंधा निर्माण का रास्ता निकालेंगे। - राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी।
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- डीएम गंभीर, एमडीए समेत सभी विभागों से मांगी रिपोर्ट
- भूमि अधिग्रहण की कास्ट कम करने को घटाए जा सकते हैं सर्किल रेट
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
रामगंगा किनारे बंधा निर्माण को लेकर सरकारी महकमों द्वारा लाल निशान लगाकर की जाने वाली वसूली का खेल अब डीएम आरके सिंह ने खत्म कर दिया है। अब बरसात के बाद बंधा निर्माण के लिए कागजों की बजाए हकीकत में काम होगा। अभी तक पिछले तीन सालों से सरकारी महकमे नदी किनारे बंधा निर्माण के नाम पर लाल निशान लगाकर किसानों का उत्पीड़न और वसूली का खेल खेलते रहे हैं।
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बुधवार को रामगंगा नदी के किनारे बंधा निर्माण के मुद्दे पर एमडीए, सिंचाई विभाग, बाढ़ खंड और नगर निगम के अफसरों की बैठक बुलाई। जिसमें उन्होंने बंधा निर्माण की संभावनाआें पर सभी विभागों से रिपोर्ट मांगी। डीएम ने कहा कि एमडीए ने रामगंगा किनारे कालोनियों बनाकर बेची हैं लिहाजा बंधा निर्माण की जिम्मेदारी भी एमडीए की ही है। उन्हाेंने प्राधिकरण से पूछा कि क्या उन्हाेंने कालोनियां बेचते वक्त बंधा निर्माण का शुल्क भी वसूला है। इस पर एमडीए कोई ठीक जवाब नहीं दे सका। डीएम ने रिकार्ड के साथ दोबारा रिपोर्ट मांगी है।
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अभी बरसात शुरू हो चुकी है लिहाजा अभी काम मुमकिन नहीं है। लेकिन विकास प्राधिकरण और नगर निगम का अच्छा अनुभव रखने वाले जिलाधिकारी आरके सिंह ने संबंधित महकमों को साफ कर दिया है कि अब बंधा निर्माण पर लाल निशान, वसूली और महज जुबानी कसरत का खेल नहीं चलेगा। बल्कि बरसात के बाद इस पर गंभीरता से काम होगा। पिछले तीन सालों से बंधा निर्माण के नाम पर संबंधित महकमे हर साल लाल निशान लगाने पहुंचते हैं और फिर जमीन को बंधे की जद में दिखाकर किसानों से वसूली का खेल होता रहा है। जबकि एमडीए बोर्ड में बंधे का नक्शा पास हो चुका है, जिसमें तय हो चुका है कि किस - किस सिजरा नंबर की जमीन बंधा निर्माण में अधिग्रहण की जानी है। बंधा निर्माण के लिए रामगंगा किनारे कुल 60 मीटर जमीन चाहिए, जिसमें से 25 मीटर में पत्थर, 25 मीटर में बंधा और अगले 10 मीटर में नाले का निर्माण होना है। कोठीवाल डेंटल कालेज से लेकर आगे जिगर कालोनी तक तो यह जमीन मौके पर मौजूद है लेकिन जिगर कालोनी से आगे नवाबपुरा, लालबाग, काली मंदिर और जामा मस्जिद एरिया में इस एरिया में रामगंगा में छोटे - छोटी अवैध टाट टप्पर बस्तियां बस गई हैं। जिन्हें आज तक हटाया नहीं जा सका है। ये टाट टप्पर बस्तियां बंधा निर्माण में सबसे बड़ी रुकावट हैं।
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इसके अलावा बड़ा मुद्दा बजट का है। 12.6 किमी लंबे बंधा निर्माण के लिए 64 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की जरूरत होगी। जिस पर मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से अधिग्रहण में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस खर्च को कम करने के लिए जिला प्रशासन जुलाई में इस एरिया का सर्किल रेट कम कर सकता है। दरअसल रामगंगा किनारे नदी से सटी जमीनों का सर्किल रेट भी रामगंगा विहार जितना ही कर दिया गया है जबकि हकीकत में यहां जमीनों की दर अभी भी काफी कम है। यदि सर्किल रेट कम कर दिया जाए तो भूमि अधिग्रहण का काम 500 करोड़ के बजाए 20-25 करोड़ रुपये में ही निपट सकता है।
बंधा निर्माण के लिए पूरी गंभीरता से प्रयास किया जा रहा है। संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की गई है। लाल निशान और वसूली की कोई शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी। हमारा फोकस फिलहाल बंधा निर्माण के लिए बजट जुटाने पर है। एमडीए से पूछा गया है कि कालोनियां बेचते वक्त उन्हाेंने बंधे का चार्ज वसूला है या नहीं, यदि वसूला है तो बंधा निर्माण प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं है तो हम एमडीए, सिंचाई विभाग, नगर निगम और बाकी विभागों से मिलकर बंधा निर्माण का रास्ता निकालेंगे। - राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी।