दशकों से छिपा धन: मुरादाबाद के बैंकों में 75 हजार निष्क्रिय खाते, इनमें 20 करोड़ जमा, पैसा किसका पता नहीं
मुरादाबाद की 348 बैंक शाखाओं में 75 हजार से अधिक निष्क्रिय खातों में 20 करोड़ रुपये जमा हैं। 10 साल से लेनदेन नहीं होने पर बैंकों ने इन खातों की राशि को डेफ खाते में भेज दिया। प्रथमा बैंक में सबसे ज्यादा सात करोड़ रुपये जमा हैं। एसबीआई और पीएनबी में तीन और दो करोड़ रुपये हैं।
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मुरादाबाद जिले की बैंक शाखाओं में 20 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि ऐसे खातों में जमा है, जिनका कोई लेनदार नहीं है। इन खातों में 10 साल या उससे अधिक समय से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। इसके कारण बैंकों ने इन खातों का पैसा डेफ खाते में डाल दिया।
मुरादाबाद जिले में 32 बैंकों की 348 शाखाएं हैं। केनरा, एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक आदि की शाखाओं में 45 लाख से ज्यादा खाताधारक हैं। इनमें 75 हजार से अधिक ऐसे खाते हैं, जिनमें 10 साल से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। इन खातों में 20 करोड़ से अधिक जमा हैं।
लेनदेन नहीं होने के कारण इन खातों को निष्क्रिय कर दिया गया है। साथ ही बैंकों ने खातों में जमा राशि आरबीआई को भेज दी। आरबीआई के नियमानुसार कोई ग्राहक 10 साल तक खाते की जानकारी नहीं लेता है तो जमा राशि डेफ खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है।
बैंकों के अनुसार बहुत से खाताधारक सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अलग से खाते खुलवाते हैं। इन खातों में रुपये आने के बाद खाताधारक दोबारा खातों को चेक नहीं करते। इसलिए धनराशि पड़ी रह जाती है।
डेफ खातों में 18 बैंकों के हैं रुपये : केनरा, एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, प्रथमा आदि बैंकों में 20 करोड़ डेफ खाते में हैं। इसमें सबसे ज्यादा प्रथमा बैंक में सात करोड़ रुपये से अधिक हैं। एसबीआई में करीब तीन करोड़, पीएनबी में दो करोड़ और अन्य बैंकों के आठ करोड़ रुपये हैं।
बैंक खाते को इस तरह फिर करें शुरू
डेफ खाते की धनराशि ग्राहकों को 10 दिन के भीतर मिल जाएगी। इसके लिए ग्राहकों को सबसे पहले उस बैंक की शाखा में जाना होगा, जहां खाता है। बैंक में एक आवेदन करना होगा, जिसमें वही हस्ताक्षर करने होंगे, जो खाते में हैं। ग्राहकों के आधार कार्ड व अन्य कागजात पूरे होने चाहिए। बैंक आरबीआई को धनराशि वापस करने का निवेदन भेजेगी और 10 दिन में रुपये ग्राहक के खाते में आ जाएंगे।
क्या होता है डेफ खाता
डिपॉजिटर एजुकेशनल एंड अवेयरनेस फंड को डेफ खाता कहा जाता है। इसमें लावारिस खातों की राशि जमा की जाती है। बैंकों में खाता खुलवाने के बाद यदि ग्राहक 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं करता है तो जमा राशि को डेफ खाते में डाल दिया जाता है। यदि कोई ग्राहक आकर इस पर क्लेम करता है तो उसे पैसा ब्याज के साथ वापस मिल जाता है।
खातों में जमा धनराशि का कोई दावेदार भले न हो, लेकिन उसपर ब्याज बनता रहता है। ऐसे में कोई भी खाताधारक चाहे तो संबंधित बैंक शाखा में जाकर खाते को दोबारा सक्रिय करवाकर पैसे निकाल सकता है। - पंकज सरन, एलडीएम