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कुंभ में होगा महंत विवाद का निराकरण
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मुरादाबाद।
काली मंदिर लालबाग में महंत की गद्दी को लेकर चल रहे विवाद के समाधान के लिए सोमवार को महंत सज्जन गिरी महाराज कुंभ रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि विरोधी बिना अधिकार के गद्दी छीनना चाहते हैं। पहले भी वह प्रयास कर चुके हैं। रमतापंत को पूरे मामले से अवगत कराएंगे। वहीं, दूसरे पक्ष ने अखाड़े के फैसले को मानने की बात कह चुप्पी साध ली है।
सोमवार को दोनों मंदिरों में कुंभ के फैसले पर ही चर्चा होती रही। महंत सज्जनगिरी महाराज ने कहा कि चार वर्ष पहले अखाड़े ने उन्हें गद्दी सौंपी थी। उस वक्त भी पूर्व सभापति गिरिजादत्त गिरि अपने चेले को गद्दी पर बैठा गए थे। इसके बाद भी उन्होंने गद्दी हड़पने का प्रयास किया है। इसी षड़यंत्र के तहत उन्होंने नीचे वाले मंदिर में अपने चेले को बिठाया है। अब उनकी नजर ऊपर वाले मंदिर पर है। धन-बल का दबाव बना रहे हैं। कुंभ में वह रमतापंत महंत बलराज गिरि के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे और फैसले को मानेंगे। महंत रामगिरि महाराज ने बताया कि विवाद में हमारी कोई भूमिका नहीं है। जनता ने अखाड़े से दूसरे साधू की मांग की है। बुजुर्ग होने की वजह से गिरिजादत्त गिरि महाराज को आजीवन पद मिला है। फैसला 12-13 जनवरी को होगा। अखाड़ा कहेगा तो हम हट जाएंगे। विवाद के समय भी मैं वहां मौजूद नहीं था।
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काली मंदिर लालबाग में महंत की गद्दी को लेकर चल रहे विवाद के समाधान के लिए सोमवार को महंत सज्जन गिरी महाराज कुंभ रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि विरोधी बिना अधिकार के गद्दी छीनना चाहते हैं। पहले भी वह प्रयास कर चुके हैं। रमतापंत को पूरे मामले से अवगत कराएंगे। वहीं, दूसरे पक्ष ने अखाड़े के फैसले को मानने की बात कह चुप्पी साध ली है।
सोमवार को दोनों मंदिरों में कुंभ के फैसले पर ही चर्चा होती रही। महंत सज्जनगिरी महाराज ने कहा कि चार वर्ष पहले अखाड़े ने उन्हें गद्दी सौंपी थी। उस वक्त भी पूर्व सभापति गिरिजादत्त गिरि अपने चेले को गद्दी पर बैठा गए थे। इसके बाद भी उन्होंने गद्दी हड़पने का प्रयास किया है। इसी षड़यंत्र के तहत उन्होंने नीचे वाले मंदिर में अपने चेले को बिठाया है। अब उनकी नजर ऊपर वाले मंदिर पर है। धन-बल का दबाव बना रहे हैं। कुंभ में वह रमतापंत महंत बलराज गिरि के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे और फैसले को मानेंगे। महंत रामगिरि महाराज ने बताया कि विवाद में हमारी कोई भूमिका नहीं है। जनता ने अखाड़े से दूसरे साधू की मांग की है। बुजुर्ग होने की वजह से गिरिजादत्त गिरि महाराज को आजीवन पद मिला है। फैसला 12-13 जनवरी को होगा। अखाड़ा कहेगा तो हम हट जाएंगे। विवाद के समय भी मैं वहां मौजूद नहीं था।
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