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मुरादाबाद मंडल की रेल पटरियां कमजोर
Updated Thu, 06 Dec 2018 02:11 AM IST
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मुरादाबाद।
मुरादाबाद रेल मंडल की पटरियां कमजोर हो चुकी हैं। जिसकी वजह से हर रोज ट्रैक चटकने और टूटने के मामले सामने आ रहे हैं।
देश की सबसे आधुनिक ट्रेन 18 को ट्रायल के लिए यहां भेजा गया था लेकिन समय से पहले ही ट्रेन लौट गई। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे कमजोर ट्रैक वजह रहा है। यहां ट्रेन तेजी से दौड़ाई तो ट्रैक जवाब देने लगा। परीक्षण को आई आरडीएसओ की टीम ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र भी किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर रेलवे की सेफ्टी टीम ने भी ट्रैक को कमजोर और असुरक्षित करार दिया है।
मेक इन इंडिया सेमी हाई स्पीड ट्रेन मुरादाबाद ट्रायल के लिए भेजी गई थी। देश की सबसे आधुनिक ट्रेन का ट्रायल मुरादाबाद बरेली सेक्शन में किया जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर ट्रायल के लिए सेक्शन बदल दिया गया। इस सेक्शन की पटरियां सबसे ज्यादा कमजोर और व्यस्त रहती हैं। इसके बाद मुरादाबाद और सहारनपुर रेल मार्ग पर सेक्शन चुना गया। 18 नवंबर से ट्रायल शुरू किया गया। लेकिन कभी पटरियां टूटने तो कभी ट्रैक व स्लीपर बदलने की वजह से ट्रायल बीच बीच में ही रुकता रहा। पहले ट्रेन के ब्रेक टेस्टिंग की गई। इसके बाद स्पीड और लोड स्पीड का ट्रायल किया गया। कंपनी के इंजीनियर और अभिकल्प अनुसंधान एवं मानक संगठन के इंजीनियरों की टीम भी मौजूद रही। आरडीएसओ की टीम ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड को भेजी। जिसमें बताया गया है कि ट्रेन के साथ ही ट्रैक के कमजोर होने की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है। सूत्रों का दावा है कि ट्रेन को इसीलिए समय से पहले ही भेज दिया गया। जिस तरह यहां कमजोर रेलवे ट्रैक है, उस दृष्टि से यहां ट्रायल कराना खतरनाक होगा। ये ट्रेन अब दूसरे मंडल में 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दौड़ रही है। जबकि यहां 115 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ़्तार पर ही ट्रैक जबाव दे गया था। पूर्वोत्तर रेलवे के चीफ सेफ्टी आफिसर के नेतृत्व में आई टीम भी मुरादाबाद मंडल के ट्रैक को कमजोर बता चुकी है। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि कमजोर ट्रैक का बदला जा रहा है। जहां जहां पटरियां चटक रहीं हैं। वहां - वहां वेल्डिंग से जोड़कर कर मजबूत किया जा रहा है। ट्रेन 18 ट्रायल पूरा करने के बाद ही लौटी है।
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मुरादाबाद रेल मंडल की पटरियां कमजोर हो चुकी हैं। जिसकी वजह से हर रोज ट्रैक चटकने और टूटने के मामले सामने आ रहे हैं।
देश की सबसे आधुनिक ट्रेन 18 को ट्रायल के लिए यहां भेजा गया था लेकिन समय से पहले ही ट्रेन लौट गई। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे कमजोर ट्रैक वजह रहा है। यहां ट्रेन तेजी से दौड़ाई तो ट्रैक जवाब देने लगा। परीक्षण को आई आरडीएसओ की टीम ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र भी किया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर रेलवे की सेफ्टी टीम ने भी ट्रैक को कमजोर और असुरक्षित करार दिया है।
मेक इन इंडिया सेमी हाई स्पीड ट्रेन मुरादाबाद ट्रायल के लिए भेजी गई थी। देश की सबसे आधुनिक ट्रेन का ट्रायल मुरादाबाद बरेली सेक्शन में किया जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर ट्रायल के लिए सेक्शन बदल दिया गया। इस सेक्शन की पटरियां सबसे ज्यादा कमजोर और व्यस्त रहती हैं। इसके बाद मुरादाबाद और सहारनपुर रेल मार्ग पर सेक्शन चुना गया। 18 नवंबर से ट्रायल शुरू किया गया। लेकिन कभी पटरियां टूटने तो कभी ट्रैक व स्लीपर बदलने की वजह से ट्रायल बीच बीच में ही रुकता रहा। पहले ट्रेन के ब्रेक टेस्टिंग की गई। इसके बाद स्पीड और लोड स्पीड का ट्रायल किया गया। कंपनी के इंजीनियर और अभिकल्प अनुसंधान एवं मानक संगठन के इंजीनियरों की टीम भी मौजूद रही। आरडीएसओ की टीम ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड को भेजी। जिसमें बताया गया है कि ट्रेन के साथ ही ट्रैक के कमजोर होने की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है। सूत्रों का दावा है कि ट्रेन को इसीलिए समय से पहले ही भेज दिया गया। जिस तरह यहां कमजोर रेलवे ट्रैक है, उस दृष्टि से यहां ट्रायल कराना खतरनाक होगा। ये ट्रेन अब दूसरे मंडल में 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दौड़ रही है। जबकि यहां 115 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ़्तार पर ही ट्रैक जबाव दे गया था। पूर्वोत्तर रेलवे के चीफ सेफ्टी आफिसर के नेतृत्व में आई टीम भी मुरादाबाद मंडल के ट्रैक को कमजोर बता चुकी है। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि कमजोर ट्रैक का बदला जा रहा है। जहां जहां पटरियां चटक रहीं हैं। वहां - वहां वेल्डिंग से जोड़कर कर मजबूत किया जा रहा है। ट्रेन 18 ट्रायल पूरा करने के बाद ही लौटी है।
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