{"_id":"5b5a38b04f1c1b6e118b5d6d","slug":"51532639408-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोपहर से ही बंद हो जाएंगे मंदिरों के कपाट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोपहर से ही बंद हो जाएंगे मंदिरों के कपाट
Updated Fri, 27 Jul 2018 02:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
गुरु पूर्णिमा यानि शुक्रवार की रात्रि को होने वाले चंद्र ग्रहण का प्रभाव मंदिरों पर भी पड़ेगा। ग्रहण काल का सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के कपाट शयन आरती कर बंद कर दिए जाएंगे। इसके कारण श्रद्घालु शुक्रवार दोपहर तक ही मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे। यह ग्रहण सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण होगा।
चंद्र ग्रहण शुक्रवार रात्रि 11 बजकर 54 मिनट से शुरू हो रहा है। इसका सूतक दोपहर दो बजकर 54 मिनट से आरंभ हो जाएगा। इसके साथ ही मंदिर बंद हो जाएंगे, जो शनिवार सुबह ग्रहण समाप्त होने पर ही खोले जाएंगे। 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर ग्रहण का मोक्ष 28 जुलाई को सुबह तीन बजकर 49 मिनट पर होगा। इस दौरान ग्रहण काल की कुल अवधि तीन घंटा 55 मिनट की रहेगी।
श्री सत्य शिव मंदिर आवास विकास के पंडित कैलाश मुरारी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पूजन गुरु दान दक्षिणा शुक्रवार सुबह ही संपन्न करना शुभदायक रहेगा।शनिवार सुबह मंदिर की साफ-सफाई कर भगवान को स्नान कराएंगे। इसके बाद ही भक्त भगवान के दर्शन और पूजन कर सकते हैं।
विज्ञापन
रहेगा पृथ्वी के सबसे करीब
पंडित केदारनाथ मिश्रा ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन खग्रास यानि पूर्ण चंद्रग्रहण होने जा रहा है। यह ग्रहण कई मायनों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस ग्रहण को ब्लड मून कहा जा रहा है, क्योंकि ग्रहण एक अवस्था में पहुंचकर चंद्रमा का रंग रक्त की तरह लाल दिखाई देने लगेगा। यह एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा धरती के अत्यंत करीब दिखाई देता है। यह खग्रास चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा - श्रवण नक्षत्र तथा मकर राशि में लग रहा है। इसलिए जिन लोगों का जन्म उत्तराषाढ़ा-श्रवण नक्षत्र और राशि मकर या लग्न मकर है, उसके लिए बहुत ज्यादा लाभदायक नहीं होगा।
विज्ञापन
गुरु पूर्णिमा यानि शुक्रवार की रात्रि को होने वाले चंद्र ग्रहण का प्रभाव मंदिरों पर भी पड़ेगा। ग्रहण काल का सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के कपाट शयन आरती कर बंद कर दिए जाएंगे। इसके कारण श्रद्घालु शुक्रवार दोपहर तक ही मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे। यह ग्रहण सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण होगा।
चंद्र ग्रहण शुक्रवार रात्रि 11 बजकर 54 मिनट से शुरू हो रहा है। इसका सूतक दोपहर दो बजकर 54 मिनट से आरंभ हो जाएगा। इसके साथ ही मंदिर बंद हो जाएंगे, जो शनिवार सुबह ग्रहण समाप्त होने पर ही खोले जाएंगे। 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर ग्रहण का मोक्ष 28 जुलाई को सुबह तीन बजकर 49 मिनट पर होगा। इस दौरान ग्रहण काल की कुल अवधि तीन घंटा 55 मिनट की रहेगी।
विज्ञापन
श्री सत्य शिव मंदिर आवास विकास के पंडित कैलाश मुरारी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पूजन गुरु दान दक्षिणा शुक्रवार सुबह ही संपन्न करना शुभदायक रहेगा।शनिवार सुबह मंदिर की साफ-सफाई कर भगवान को स्नान कराएंगे। इसके बाद ही भक्त भगवान के दर्शन और पूजन कर सकते हैं।
विज्ञापन
रहेगा पृथ्वी के सबसे करीब
पंडित केदारनाथ मिश्रा ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन खग्रास यानि पूर्ण चंद्रग्रहण होने जा रहा है। यह ग्रहण कई मायनों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस ग्रहण को ब्लड मून कहा जा रहा है, क्योंकि ग्रहण एक अवस्था में पहुंचकर चंद्रमा का रंग रक्त की तरह लाल दिखाई देने लगेगा। यह एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा धरती के अत्यंत करीब दिखाई देता है। यह खग्रास चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा - श्रवण नक्षत्र तथा मकर राशि में लग रहा है। इसलिए जिन लोगों का जन्म उत्तराषाढ़ा-श्रवण नक्षत्र और राशि मकर या लग्न मकर है, उसके लिए बहुत ज्यादा लाभदायक नहीं होगा।