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Moradabad News: ओपीडी में 50 फीसदी महिलाएं ओवरवेट, पीसीओडी आम बात
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मुरादाबाद। ओपीडी में आने वाली 50 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट हैं। इसके रारण पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज) तेजी से बढ़ रही है, यह आम बात हो गई है। इसके समाधान के लिए दवाओं के साथ वजन घटाना ही एकमात्र उपाय है। मरीज डॉक्टर बदल देते हैं लेकिन वजन नहीं घटाते।
टीएमयू के स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. आस्था ललवानी ने यह बातें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सीएमई में कहीं। इस मौके पर आईएमए की कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा भी की गई। चुनाव अधिकारी डॉ. बबीता गुप्ता ने नए अध्यक्ष डॉ. सीपी सिंह, सचिव डॉ. गिरजेश केन और कोषाध्यक्ष डॉ. विभोर जैन समेत पूरी टीम को शुभकामनाएं गीं। उन्होंने बताया कि नई कार्यकारिणी 20 सितंबर को शपथ लेगी और कॉलर बदले जाएंगे। सीएमई को आगे बढ़ाते हुए डॉ. आस्था ने कहा कि पीसीओडी एक हार्मोनल समस्या है। महिलाओं के अंडाशय में छोटी-छोटी गांठे बन जाती हैं। इससे महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है और पीरियड्स की अनियमितता, वजन बढ़ना, चेहरे पर बाल उगना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने पीसीओडी से बचने के लिए उपाय भी बताए।
नई कार्यकारिणी की घोषणा के दौरान सह चुनाव अधिकारी डॉ. जितेंद्र शर्मा, डॉ. भगत राम राणा, प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. अनंत राणा, डॉ. सचदेवा, डॉ. पायल पुरी, डॉ. कार्तिकेय गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. किशन वार्ष्णेय, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. रवि गंगल, डॉ. ऋचा गंगल, वर्तमान अध्यक्ष डॉ. प्रीति गुप्ता, सचिव डॉ. सुदीप कौर, कोषाध्यक्ष डॉ. रूबी चुग आदि मौजूद रहे।
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अचानक नहीं होती आत्महत्या, मरीज देता है संकेत - डॉ. निमिष
आईएमए द्वारा आयोजित सीएमई का दूसरा विषय युवाओं में बढ़ता डिप्रेशन और आत्महत्या के मामले रहा। इसमें मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिष गुप्ता ने व्याख्यान दिया। उन्होंने आंकड़े रखे कि 2022 में भारत में 1.71 लाख लोगों में आत्महत्या की। 2018 की तुलना में यह बढ़ोतरी 27 प्रतिशत है।
डॉ. निमिष ने कहा कि अवसाद पीड़ित व्यक्ति अचानक आत्महत्या नहीं करता, वह कई बार संकेत दे चुका होता है। उसके मित्रों, परिजनों व करीबी लोगों को यह संकेत पहचानाने की जरूरत है। समस्या पर बात करके किसी की जाम बचाई जा सकती है। डॉ. निमिष ने मेडिकल के विद्यार्थियों व डॉक्टरों में आत्महत्या के कारणों पर भी प्रकाश डाला। समाधान में बताया कि अवसाद का समाधान संवाद है। अपनों से बातचीत और उनके साथ समय बिताना ही सबसे बड़ी दवा है। वरिष्ठ साइकाइट्रिस्ट डॉ. नीरज गुप्ता और डॉ. अनंत राणा ने उनकी प्रस्तुति को सराहा।
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टीएमयू के स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. आस्था ललवानी ने यह बातें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सीएमई में कहीं। इस मौके पर आईएमए की कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा भी की गई। चुनाव अधिकारी डॉ. बबीता गुप्ता ने नए अध्यक्ष डॉ. सीपी सिंह, सचिव डॉ. गिरजेश केन और कोषाध्यक्ष डॉ. विभोर जैन समेत पूरी टीम को शुभकामनाएं गीं। उन्होंने बताया कि नई कार्यकारिणी 20 सितंबर को शपथ लेगी और कॉलर बदले जाएंगे। सीएमई को आगे बढ़ाते हुए डॉ. आस्था ने कहा कि पीसीओडी एक हार्मोनल समस्या है। महिलाओं के अंडाशय में छोटी-छोटी गांठे बन जाती हैं। इससे महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है और पीरियड्स की अनियमितता, वजन बढ़ना, चेहरे पर बाल उगना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने पीसीओडी से बचने के लिए उपाय भी बताए।
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नई कार्यकारिणी की घोषणा के दौरान सह चुनाव अधिकारी डॉ. जितेंद्र शर्मा, डॉ. भगत राम राणा, प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. अनंत राणा, डॉ. सचदेवा, डॉ. पायल पुरी, डॉ. कार्तिकेय गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. किशन वार्ष्णेय, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. रवि गंगल, डॉ. ऋचा गंगल, वर्तमान अध्यक्ष डॉ. प्रीति गुप्ता, सचिव डॉ. सुदीप कौर, कोषाध्यक्ष डॉ. रूबी चुग आदि मौजूद रहे।
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अचानक नहीं होती आत्महत्या, मरीज देता है संकेत - डॉ. निमिष
आईएमए द्वारा आयोजित सीएमई का दूसरा विषय युवाओं में बढ़ता डिप्रेशन और आत्महत्या के मामले रहा। इसमें मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिष गुप्ता ने व्याख्यान दिया। उन्होंने आंकड़े रखे कि 2022 में भारत में 1.71 लाख लोगों में आत्महत्या की। 2018 की तुलना में यह बढ़ोतरी 27 प्रतिशत है।
डॉ. निमिष ने कहा कि अवसाद पीड़ित व्यक्ति अचानक आत्महत्या नहीं करता, वह कई बार संकेत दे चुका होता है। उसके मित्रों, परिजनों व करीबी लोगों को यह संकेत पहचानाने की जरूरत है। समस्या पर बात करके किसी की जाम बचाई जा सकती है। डॉ. निमिष ने मेडिकल के विद्यार्थियों व डॉक्टरों में आत्महत्या के कारणों पर भी प्रकाश डाला। समाधान में बताया कि अवसाद का समाधान संवाद है। अपनों से बातचीत और उनके साथ समय बिताना ही सबसे बड़ी दवा है। वरिष्ठ साइकाइट्रिस्ट डॉ. नीरज गुप्ता और डॉ. अनंत राणा ने उनकी प्रस्तुति को सराहा।