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पीछे छूटे राम और विकास अबकी तो बस राष्ट्रवाद
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मुरादाबाद। 2019 के सत्ता संग्राम में रामलला को विश्राम दे चुकी भाजपा ने माहौल देख विकास के एजेंडे को भी किनारे रख दिया है। एयर स्ट्राइक से उपजी राष्ट्रवाद की आंधी के सामने लोकसभा चुनावों में बाकी सभी मुद्दे बौने नजर आ रहे हैं। सियासत की रणभूमि से रोज राष्ट्रवाद के तीर छूट रहे हैं। भाजपा राष्ट्रवाद को पूरी ताकत से धार देने में जुटी है तो विपक्षी दल भाजपा के हमले की धार कुंद करने की कोशिश में हैं। कुल मिलाकर लोकसभा चुनावों में हर तरफ शोर राष्ट्रवाद का ही है। रामलला का नाम बेशक चुनावी रैलियों से गायब दिखे लेकिन बगैर दर्जनों बार पाकिस्तान का जिक्र जरूर सुनाई देता है।
लोकसभा चुनावों की घोषणा होने के बाद मुरादाबाद में पहली जनसभा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की हुई। 27 मिनट के भाषण में करीब 20 मिनट तक वह राष्ट्रवाद पर बोले। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक तक मोदी की तारीफ की। आखिर में साफ - साफ कहा कि विकास तो सरकारें कराती ही हैं लेकिन उससे भी बड़ा म्द्दा राष्ट्र की सुरक्षा है। सर्जिकल स्ट्राइक का हवाला देकर वह यह बताना भी नहीं भूले कि यह काम सिर्फ मोदी ही कर सकते हैं। खास बात यह थी कि भगवान राम और अयोध्या में उनके मंदिर मुददे का शाह ने जिक्र तक नहीं किया। इसके बाद संभल लोकसभा क्षेत्र में स्मृति ईरानी और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी राष्ट्रवाद को धार दी। शुक्रवार को अमरोहा की रैली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषाणों से फिर साफ कर दिया कि इस बार के चुनाव में न राम केंद्र में होंगे न विकास, बल्कि पूरा चुनाव राष्ट्रवाद की धुरी पर ही लड़ा जाएगा। मोदी ने 30 मिनट के भाषण में 20 मिनट तक आतंक, आतंकियों और सर्जिकल व एयर स्ट्राइक को केंद्र में रखकर नेहरू गांधी परिवार पर हमला बोला। सपा सरकार में आतंकियों से मुकदमे वापस लेने की कोशिशों का जिक्र कर मोदी ने प्रदेश के सपा - बसपा गठबंधन को भी दूसरे पाले में धकेलने की कोशिश की। पूरे भाषण में कम से कम 10 बार उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिया लेकिन अयोध्या मंदिर मुद्दे का जिक्र तक नहीं किया। रामलला की जन्मभूमि अयोध्या पीएम के भाषण में एक बार सुनाई दी भी तो वो भी आतंकवादी घटना के बहाने। बोले, सपा - बसपा के दौर में कभी अयोध्या में रामलला की जन्मभूमि तो कभी वाराणसी में भोलेनाथ के स्थान पर धमाके होते थे। कैराना का जिक्र कर उन्होंने पश्चिमी यूपी में बहुसंख्यकों की दुखती रग को छुआ तो योगी ने इसी रैली में राहुल गांधी के केरल रोड में मुस्लिम लीग के झंडों को मुद्दा बनाया था। अमरोहा से मुरादाबाद पहुंचे योगी ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को आईएसआई का दस्तावेज तक बता डाला। योगी यहीं नहीं रुके, उन्होंने यहां तक कह डाला कि कांग्रेस और सपा - बसपा को वोट देने का अर्थ देश से विश्वासघात करना है। भाजपाई दिग्गजों के इन भाषणों ने साफ कर दिया है कि इस बार के चुनाव का केंद्र राष्ट्रवाद ही होगा। कुछ महीने पहले तक विकास के नाम पर चुनावों जाने का दावा करने वाली भाजपा के नेताओं ने अपने भाषणों में विकास को हाशिए पर धकेल दिया है।
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लोकसभा चुनावों की घोषणा होने के बाद मुरादाबाद में पहली जनसभा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की हुई। 27 मिनट के भाषण में करीब 20 मिनट तक वह राष्ट्रवाद पर बोले। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक तक मोदी की तारीफ की। आखिर में साफ - साफ कहा कि विकास तो सरकारें कराती ही हैं लेकिन उससे भी बड़ा म्द्दा राष्ट्र की सुरक्षा है। सर्जिकल स्ट्राइक का हवाला देकर वह यह बताना भी नहीं भूले कि यह काम सिर्फ मोदी ही कर सकते हैं। खास बात यह थी कि भगवान राम और अयोध्या में उनके मंदिर मुददे का शाह ने जिक्र तक नहीं किया। इसके बाद संभल लोकसभा क्षेत्र में स्मृति ईरानी और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी राष्ट्रवाद को धार दी। शुक्रवार को अमरोहा की रैली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषाणों से फिर साफ कर दिया कि इस बार के चुनाव में न राम केंद्र में होंगे न विकास, बल्कि पूरा चुनाव राष्ट्रवाद की धुरी पर ही लड़ा जाएगा। मोदी ने 30 मिनट के भाषण में 20 मिनट तक आतंक, आतंकियों और सर्जिकल व एयर स्ट्राइक को केंद्र में रखकर नेहरू गांधी परिवार पर हमला बोला। सपा सरकार में आतंकियों से मुकदमे वापस लेने की कोशिशों का जिक्र कर मोदी ने प्रदेश के सपा - बसपा गठबंधन को भी दूसरे पाले में धकेलने की कोशिश की। पूरे भाषण में कम से कम 10 बार उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिया लेकिन अयोध्या मंदिर मुद्दे का जिक्र तक नहीं किया। रामलला की जन्मभूमि अयोध्या पीएम के भाषण में एक बार सुनाई दी भी तो वो भी आतंकवादी घटना के बहाने। बोले, सपा - बसपा के दौर में कभी अयोध्या में रामलला की जन्मभूमि तो कभी वाराणसी में भोलेनाथ के स्थान पर धमाके होते थे। कैराना का जिक्र कर उन्होंने पश्चिमी यूपी में बहुसंख्यकों की दुखती रग को छुआ तो योगी ने इसी रैली में राहुल गांधी के केरल रोड में मुस्लिम लीग के झंडों को मुद्दा बनाया था। अमरोहा से मुरादाबाद पहुंचे योगी ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को आईएसआई का दस्तावेज तक बता डाला। योगी यहीं नहीं रुके, उन्होंने यहां तक कह डाला कि कांग्रेस और सपा - बसपा को वोट देने का अर्थ देश से विश्वासघात करना है। भाजपाई दिग्गजों के इन भाषणों ने साफ कर दिया है कि इस बार के चुनाव का केंद्र राष्ट्रवाद ही होगा। कुछ महीने पहले तक विकास के नाम पर चुनावों जाने का दावा करने वाली भाजपा के नेताओं ने अपने भाषणों में विकास को हाशिए पर धकेल दिया है।
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