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बोर्ड में सदस्यों की जगह पति उठाते रहे मुद्दे
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मुरादाबाद।
सर्किट हाउस में शनिवार को हुई जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में आस्तीनें चढ़ाकर ‘सदन’ की गरिमा की दुहाई और गरमागरम बहस करने वाले छह से अधिक लोग जिला पंचायत बोर्ड के सदस्य ही नहीं हैं। यह सभी बाकायदा अफसरों की मौजूदगी में घंटों तक न सिर्फ तमाम मुद्दे उठाते रहे बल्कि इनमें से कुछ ने हंगामे में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। छह से अधिक महिला सदस्यों की जगह पहुंचे उनके पति और बेटों ने बोर्ड में बाकायदा निर्वाचित सदस्यों की तरह बोर्ड बैठक की कार्यवाही में हिस्सा लिया। खुद जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश रानी के पति और पंचायती राज राज्य मंत्री के पूर्व निजी सचिव महावीर सिंह भी बोर्ड बैठक में मौजूद रहे।
जिला पंचायत सदस्य रेनू सैनी के साथ उनके पति मंगल सिंह भी बोर्ड बैठक में मौजूद थे। जिला पंचायत सदस्य शशिवाला कुछ देर के लिए बोर्ड में दिखीं लेकिन उनके पति सलीम पूरे समय बोर्ड बैठक में मौजूद थे। जिला पंचायत सदस्य मंजू रानी चौधरी के साथ उनके पति भावेश चौधरी भी पूरे वक्त बोर्ड बैठक में शामिल रहे। जिला पंचायत सदस्य ज्योति रानी बोर्ड बैठक में मौजूद थीं, लेकिन उनके स्थान पर बोर्ड में मुद्दे उनके पति अर्जुन सिंह उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि नल खराब होने की शिकायत कई बार बीडीओ से की है लेकिन वह ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य प्रकाशो देवी बोर्ड बैठक में नहीं दिखीं, लेकिन उनके बेटे वीके राज जरूर बोर्ड बैठक में मौजूद थे। जिला पंचायत सदस्य सतवीरी देवी के बेटे चंद्रपाल सिंह बोर्ड में सबसे ज्यादा सक्रिय थे। हालांकि अधिकारियों ने सफाई दी है कि वह बसपा के राज्य सभा सदस्य वीर सिंह के प्रतिनिधि के तौर पर आए थे। एमएलसी जयपाल सिंह के प्रतिनिधि दिनेश ठाकुर भी बोर्ड में खासे सक्रिय थे। बोर्ड में फ्रंट सीट पर काबिज जयवीर यादव की मां विद्या देवी जिला पंचायत सदस्य हैं। एएमए का कहना है कि जयवीर देहात के सपा विधायक हाजी इकराम कुरैशी के प्रतिनिधि के तौर पर बोर्ड में शामिल हुए थे। जिला पंचायत सदस्य शबाना खुद को ज्यादातर वक्त सर्किट हाउस के दूसरे कमरे में बैठी रहीं लेकिन उनके पति नासिर जरूर पूरे वक्त बोर्ड बैठक में मौजूद थे। डा. महमूद भी अपनी पत्नी अंजुम के स्थान पर बोर्ड बैठक में बैठे थे। अंजुम बोर्ड में नहीं दिखीं। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष ने उनकी भी मौजूदगी का दावा किया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश रानी के पति महावीर सिंह पूरे समय बोर्ड बैठक में मौजूद रहे। हंगामा हुआ तो उन्होंने आगे बढ़कर सदस्यों को शांत कराने की भी कोशिश की। निर्वाचित सदस्यों के स्थान पर उनके पति या बेटों की न सिर्फ मौजूदगी बल्कि बोर्ड बैठक में उनके द्वारा विषय रखे जाने के बावजूद अफसर आंखें मूंदे रहे। सीडीओ मृद्ल चौधरी या अपर मुख्य अधिकारी शिशुपाल शर्मा ने इसे रोकने की कोई कोशिश तक नहीं की।
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मेरे सिर में प्रॉब्लम है इसलिए पति को ले गई: मिथलेश
मुरादाबाद। जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश रानी ने बोर्ड बैठक में महिला सदस्यों की जगह उनके पतियों की मौजूदगी को अनुचित बताते हुए आगे से इसका खास ख्याल रखने की बात कही। हालांकि वह महिला सदस्यों के स्थान पर उनके पति और बेटों द्वारा बोर्ड में मुद्दे उठाने की बात को नकार रही हैं। उन्हाेंने कहा कि महिला जिला पंचायत सदस्य घर से निकलेंगी तो पति तो उनके साथ आएंगे ही। लेकिन महिला सदस्यों के पति या बेटों को सिर्फ सर्किट हाउस तक आने की अनुमति थी। बोर्ड बैठक में आने की इजाजत नही थी। सिर्फ निर्वाचित सदस्यों को ही बोर्ड बैठक में एंट्री थी। पुलिस की व्यवस्था भी थी, लेकिन कुछ सदस्यों पति या बेटे आ गए। आगे से इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष से जब उनके पति महावीर सिंह के भी बोर्ड बैठक में मौजूद रहने पर सवाल पूछा गया तो शुरू में तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया। बाद में उन्हाेंने कहा कि उनके सिर में प्रॉब्लम है। डॉक्टर ने सीटी स्कैन की सलाह देते हुए हिदायत दी है कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। बोलीं, अपने पति को मैंने ही साथ आने को बोला था। वह एकाध बार मुझे देखने बोर्ड बैठक में आए, बाकी समय बाहर ही रहे।
बीच बैठक में हुईं कुछ एंट्री: एएमए
मुरादाबाद। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में निर्वाचित सदस्यों के स्थान पर उनके पति या बेटों द्वारा सवाल - जवाब करने के मामले में अपर मुख्य अधिकारी का कहना है कि उन्होंने जांच के बाद ही सदस्यों की एंट्री की व्यवस्था की थी। निर्वाचित सदस्यों को ही बोर्ड बैठक में आने देने के निर्देश स्टाफ को दिए थे। लेकिन बोर्ड बैठक शुरू होने के बाद कुछ सदस्यों पति या बेटे बीच बैठक में आ गए। आगे होने वाली बोर्ड बैठकों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि निर्वाचित सदस्य ही बैठक में आएं। यदि निर्वाचित सदस्य के स्थान पर उनके पति या बेटे ने कोई मुद्दा बोर्ड में रखा है तो उसे बोर्ड की कार्यवाही में शामिल नहीं किया जाएगा।
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सर्किट हाउस में शनिवार को हुई जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में आस्तीनें चढ़ाकर ‘सदन’ की गरिमा की दुहाई और गरमागरम बहस करने वाले छह से अधिक लोग जिला पंचायत बोर्ड के सदस्य ही नहीं हैं। यह सभी बाकायदा अफसरों की मौजूदगी में घंटों तक न सिर्फ तमाम मुद्दे उठाते रहे बल्कि इनमें से कुछ ने हंगामे में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। छह से अधिक महिला सदस्यों की जगह पहुंचे उनके पति और बेटों ने बोर्ड में बाकायदा निर्वाचित सदस्यों की तरह बोर्ड बैठक की कार्यवाही में हिस्सा लिया। खुद जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश रानी के पति और पंचायती राज राज्य मंत्री के पूर्व निजी सचिव महावीर सिंह भी बोर्ड बैठक में मौजूद रहे।
जिला पंचायत सदस्य रेनू सैनी के साथ उनके पति मंगल सिंह भी बोर्ड बैठक में मौजूद थे। जिला पंचायत सदस्य शशिवाला कुछ देर के लिए बोर्ड में दिखीं लेकिन उनके पति सलीम पूरे समय बोर्ड बैठक में मौजूद थे। जिला पंचायत सदस्य मंजू रानी चौधरी के साथ उनके पति भावेश चौधरी भी पूरे वक्त बोर्ड बैठक में शामिल रहे। जिला पंचायत सदस्य ज्योति रानी बोर्ड बैठक में मौजूद थीं, लेकिन उनके स्थान पर बोर्ड में मुद्दे उनके पति अर्जुन सिंह उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि नल खराब होने की शिकायत कई बार बीडीओ से की है लेकिन वह ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य प्रकाशो देवी बोर्ड बैठक में नहीं दिखीं, लेकिन उनके बेटे वीके राज जरूर बोर्ड बैठक में मौजूद थे। जिला पंचायत सदस्य सतवीरी देवी के बेटे चंद्रपाल सिंह बोर्ड में सबसे ज्यादा सक्रिय थे। हालांकि अधिकारियों ने सफाई दी है कि वह बसपा के राज्य सभा सदस्य वीर सिंह के प्रतिनिधि के तौर पर आए थे। एमएलसी जयपाल सिंह के प्रतिनिधि दिनेश ठाकुर भी बोर्ड में खासे सक्रिय थे। बोर्ड में फ्रंट सीट पर काबिज जयवीर यादव की मां विद्या देवी जिला पंचायत सदस्य हैं। एएमए का कहना है कि जयवीर देहात के सपा विधायक हाजी इकराम कुरैशी के प्रतिनिधि के तौर पर बोर्ड में शामिल हुए थे। जिला पंचायत सदस्य शबाना खुद को ज्यादातर वक्त सर्किट हाउस के दूसरे कमरे में बैठी रहीं लेकिन उनके पति नासिर जरूर पूरे वक्त बोर्ड बैठक में मौजूद थे। डा. महमूद भी अपनी पत्नी अंजुम के स्थान पर बोर्ड बैठक में बैठे थे। अंजुम बोर्ड में नहीं दिखीं। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष ने उनकी भी मौजूदगी का दावा किया है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश रानी के पति महावीर सिंह पूरे समय बोर्ड बैठक में मौजूद रहे। हंगामा हुआ तो उन्होंने आगे बढ़कर सदस्यों को शांत कराने की भी कोशिश की। निर्वाचित सदस्यों के स्थान पर उनके पति या बेटों की न सिर्फ मौजूदगी बल्कि बोर्ड बैठक में उनके द्वारा विषय रखे जाने के बावजूद अफसर आंखें मूंदे रहे। सीडीओ मृद्ल चौधरी या अपर मुख्य अधिकारी शिशुपाल शर्मा ने इसे रोकने की कोई कोशिश तक नहीं की।
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मेरे सिर में प्रॉब्लम है इसलिए पति को ले गई: मिथलेश
मुरादाबाद। जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश रानी ने बोर्ड बैठक में महिला सदस्यों की जगह उनके पतियों की मौजूदगी को अनुचित बताते हुए आगे से इसका खास ख्याल रखने की बात कही। हालांकि वह महिला सदस्यों के स्थान पर उनके पति और बेटों द्वारा बोर्ड में मुद्दे उठाने की बात को नकार रही हैं। उन्हाेंने कहा कि महिला जिला पंचायत सदस्य घर से निकलेंगी तो पति तो उनके साथ आएंगे ही। लेकिन महिला सदस्यों के पति या बेटों को सिर्फ सर्किट हाउस तक आने की अनुमति थी। बोर्ड बैठक में आने की इजाजत नही थी। सिर्फ निर्वाचित सदस्यों को ही बोर्ड बैठक में एंट्री थी। पुलिस की व्यवस्था भी थी, लेकिन कुछ सदस्यों पति या बेटे आ गए। आगे से इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष से जब उनके पति महावीर सिंह के भी बोर्ड बैठक में मौजूद रहने पर सवाल पूछा गया तो शुरू में तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया। बाद में उन्हाेंने कहा कि उनके सिर में प्रॉब्लम है। डॉक्टर ने सीटी स्कैन की सलाह देते हुए हिदायत दी है कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। बोलीं, अपने पति को मैंने ही साथ आने को बोला था। वह एकाध बार मुझे देखने बोर्ड बैठक में आए, बाकी समय बाहर ही रहे।
बीच बैठक में हुईं कुछ एंट्री: एएमए
मुरादाबाद। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में निर्वाचित सदस्यों के स्थान पर उनके पति या बेटों द्वारा सवाल - जवाब करने के मामले में अपर मुख्य अधिकारी का कहना है कि उन्होंने जांच के बाद ही सदस्यों की एंट्री की व्यवस्था की थी। निर्वाचित सदस्यों को ही बोर्ड बैठक में आने देने के निर्देश स्टाफ को दिए थे। लेकिन बोर्ड बैठक शुरू होने के बाद कुछ सदस्यों पति या बेटे बीच बैठक में आ गए। आगे होने वाली बोर्ड बैठकों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि निर्वाचित सदस्य ही बैठक में आएं। यदि निर्वाचित सदस्य के स्थान पर उनके पति या बेटे ने कोई मुद्दा बोर्ड में रखा है तो उसे बोर्ड की कार्यवाही में शामिल नहीं किया जाएगा।