फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   400 people are tested daily, 80 are found to be diabetic.

Moradabad News: रोजाना 400 लोगों की जांच, 80 निकल रहे डायबिटिक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 14 Nov 2025 02:22 AM IST
विज्ञापन
400 people are tested daily, 80 are found to be diabetic.
मुरादाबाद। खराब दिनचर्या और खानपान के कारण पचपन की उम्र में होने वाली शुगर की बीमारी अब बचपन में हो रही है। जिला अस्पताल में ऐसे केस हैं जिनमें साल साल के बच्चों को इंसुलिन लेना पड़ रहा है। पैथोलॉजी के आंकड़े के मुताबिक रोजाना हो रही औसतन 400 जांचों में से 80 मरीज शुगर से पीड़ित पाए जा रहे हैं। इनमें भी 20 प्रतिशत मरीज 35 या उससे कम उम्र के हैं। पिछले दो माह में जिला अस्पताल में 6200 से ज्यादा मरीजों ने शुगर की रैंडम सैंपलिंग कराई है। इनमें से 1536 लोग शुगर के मरीज पाए गए हैं। इनमें से कई को पहले नहीं पता था कि उन्हें शुगर है। बार-बार बीमार पड़ने के बाद उनकी जांच की गई तो बीमारी की जानकारी हुई। जिला अस्पताल व निजी डॉक्टरों के मुताबिक जिले में करीब पांच सौ से अधिक बच्चे टाइप वन डायबिटीज से जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार सिंह का कहना है कि उनके पास ऐसे सात केस हैं, जो पांच से सात वर्ष के बच्चे हैं और इंसुलिन ले रहे हैं। दो को जन्म से डायबिटीज है और बाकी को जन्म के छह माह बाद हो गई। ऐसे बच्चों की दिनचर्या इंसुलिन इंजेक्शन से शुरू होती है। वहीं खानपान में लापरवाही बरतने से बीस साल तक युवाओं में भी अब टाइप टू डायबिटीज की जद में आने लगे हैं। जीवनशैली और खानपान में बदलाव से इस बीमारी से बचा जा सकता है।
विज्ञापन


ये लक्षण सामने आए तो बच्चे की शुगर जांच कराएं
- चक्कर व पसीना आना
- घबराहट या सुस्ती
- बच्चे को अधिक भूख और प्यास लगे

- रात में बार-बार पेशाब की शिकायत

- परिवार में कोई शुगर पीड़ित है
- बच्चा अधिक मोटा है
00

इस तरह होती है शुगर की बीमारी
आईएमए के अध्यक्ष एमडी मेडिसिन डॉ. सीपी सिंह का कहना है कि पैनक्रियाज में आइलेट्स ऑफ लैंगर हैंस सेल्स इंसुलिन बनाती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को नियंत्रित करती हैं। यह सेल्स कम हो जाती हैं तो इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। तब डायबिटीज होने लगती है। कुछ बच्चों में पैनक्रियाज पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाती है। इसके चलते इंसुलिन समुचित मात्रा में नहीं बनता है। बच्चे के जन्म के वक्त तो पता नहीं चल पाता है लेकिन छह महीने की उम्र में आते-आते इस रोग का पता चलता है। इसे कंजेनाइटल डायबिटीज कहते हैं।
विज्ञापन


00
लोगों में यह भ्रांति है कि चीनी के बजाय गुड़ खाने से शुगर लेवल नहीं बढ़ता या फल खाने से ऐसा नहीं होता। यह भ्रांति पूरी तरह गलत है। ऐसी कोई भी चीज जो जीभ पर रखने में मीठी लगती है वह शुगर रोगियों के लिए हानिकारक है। इंसुलिन की बात करें तो इससे डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक होने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डॉ. सैयद मोहम्मद रजी, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed