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शिक्षक संघ का दावा, 28 शिक्षकों की हुई कोरोना से मौत, प्रशासन बोला-शून्य
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मुरादाबाद। पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान जिले के 28 शिक्षक और शिक्षामित्रों और बेसिक शिक्षा विभाग के लेखाधिकारी और कंप्यूटर सहायक की मौत हो चुकी है। लेकिन प्रशासन के अभिलेखों में कोई मौत कोरोना से नहीं हुई है। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित शासनादेश के अंतर्गत एक भी मृतक शिक्षक या शिक्षामित्र नहीं आता। जबकि यदि तारीखों की ही बात करें तो 26 अप्रैल को चुनाव के लिए 25 अप्रैल को रवानगी और 27 को वापसी के बीच ही तीन शिक्षक और एक लेखाधिकारी की मृत्यु हुई है। दावा है कि यह सभी कोरोना पॉजिटिव थे।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सर्वेश शर्मा और जिला मंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पंचायत चुनाव में सैकड़ों शिक्षकों की ड्यूटी लगी थी। मतदान के प्रशिक्षण से ही शिक्षक बीमार और कोरोना संक्रमित होने शुरू हो गए थे। मतदान और मतगणना के बाद तो हालत और अधिक बिगड़ गई। 17 मई को प्रा.वि. हरसैनपुर मूंढापांडे के शिक्षक अनिल कुमार की पहली मृत्यु हुई। उन्होंने प्रशिक्षण लिया था और उसके बाद बीमार हुए थे। इसके बाद शिक्षकों की लगातार मृत्यु होती गई। उन्होंने दावा किया कि 20 मई तक कुल 23 शिक्षकों और 5 शिक्षामित्रों की मृत्यु हो चुकी है। इनमें से अधिकांश शिक्षकों की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आदि दस्तावेज भी संगठन ने जुटा लिए हैं। संगठन ने मांग उठाई कि इन सभी शिक्षकों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी दिलाई जाए।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद तैयार करा रहा सूची
राज्य कर्मचरी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष श्रीकांत यादव ने बताया कि जिला विकास अधिकारी सुशील उपाध्याय की मृत्यु चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने पर हुई है। इसके अलावा कई अन्य सरकारी विभागीय कर्मियों की ड्यूटी चुनाव में लगी थी। संगठन भी ऐसे कर्मियों की सूची बना रहा है जिनकी मृत्यु चुनाव ड्यूटी करने के बाद कोरोना से हुई है।
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पहले शासनादेश से जिले में कोई पात्र नहीं था
दरअसल शासन ने आठ मई को जारी शासनादेश में ड्यूटी पर रवाना होने से पहले घर वापसी के बीच में होने वाली घटना को ही चुनाव ड्यूटी के दौरान होने वाली घटना माना था। इसी शासनादेश की गाइडलाइन के अनुसार जनपदों से सूचनाएं मांगी गई थीं। इस आधार पर प्रशासन ने जिले में चुनाव ड्यूटी के दौरान किसी भी कर्मचारी की मृत्यु ना होने की सूचना शासन को भेजी थी। जिसके बाद शिक्षक संघ और कर्मचारी संगठन खफा थे। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मृतकों के परिवार में आशा जगी है। शिक्षक संघ को भी नए शासनादेश का इंतजार है।
पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान जिले में 29 शिक्षक और शिक्षामित्रों की मृत्यु हुई है। हमने बीएसए कार्यालय और उनके व्हाट्सएप पर मृतकों की सूची भेज दी है। मंडलीय अधिकारियों को भी इसे भेजा गया है। मुख्यमंत्री की पहल शिक्षक हित में है। उनके आदेश से मृतक शिक्षक परिवारों को राहत की उम्मीद जगी है। सरकार केे जल्द संशेधित शासनोदश जारी करना चाहिए ताकि प्रशासन मृतक शिक्षक कर्मचारियों की सूची भेज सके।
- धर्मेद्र प्रताप सिंह, जिला महामंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ
शासनादेश की गाइडलाइन के अनुसार जिले में कोई भी शिक्षक चुनाव ड्यूूटी के दौरान मृत्यु के दायरे में नही आ रहा था। इसी आधार पर शून्य की सूचना भेजी गई थी। इसके बाद अब तक कोई शासनादेश नहीं मिला है। यदि कोई संशोधित शासनोदश मिलेगा तो उसके आधार पर सूचना भेजी जाएगी। शिक्षक संघों ने पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान कुछ शिक्षकों की मृत्यु की जानकारी दी है।
- योगेंद्र सिंह बीएसए
शासनादेश के अनुसार जिले में पंचायत चुनाव की ड्युटी के दौरान किसी की मृत्यु नहीं हुई थी। यही सूचना शासन को भेज दी गई थी। यदि कोई संशोधित सूचना मांगी गई तो उसकी गाइडलाइन के आधार पर सूचना तैयार कर भेज दी जाएगी।
- प्रीति जायसवाल उपजिला निर्वाचन अधिकारी
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प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सर्वेश शर्मा और जिला मंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पंचायत चुनाव में सैकड़ों शिक्षकों की ड्यूटी लगी थी। मतदान के प्रशिक्षण से ही शिक्षक बीमार और कोरोना संक्रमित होने शुरू हो गए थे। मतदान और मतगणना के बाद तो हालत और अधिक बिगड़ गई। 17 मई को प्रा.वि. हरसैनपुर मूंढापांडे के शिक्षक अनिल कुमार की पहली मृत्यु हुई। उन्होंने प्रशिक्षण लिया था और उसके बाद बीमार हुए थे। इसके बाद शिक्षकों की लगातार मृत्यु होती गई। उन्होंने दावा किया कि 20 मई तक कुल 23 शिक्षकों और 5 शिक्षामित्रों की मृत्यु हो चुकी है। इनमें से अधिकांश शिक्षकों की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आदि दस्तावेज भी संगठन ने जुटा लिए हैं। संगठन ने मांग उठाई कि इन सभी शिक्षकों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी दिलाई जाए।
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद तैयार करा रहा सूची
राज्य कर्मचरी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष श्रीकांत यादव ने बताया कि जिला विकास अधिकारी सुशील उपाध्याय की मृत्यु चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने पर हुई है। इसके अलावा कई अन्य सरकारी विभागीय कर्मियों की ड्यूटी चुनाव में लगी थी। संगठन भी ऐसे कर्मियों की सूची बना रहा है जिनकी मृत्यु चुनाव ड्यूटी करने के बाद कोरोना से हुई है।
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पहले शासनादेश से जिले में कोई पात्र नहीं था
दरअसल शासन ने आठ मई को जारी शासनादेश में ड्यूटी पर रवाना होने से पहले घर वापसी के बीच में होने वाली घटना को ही चुनाव ड्यूटी के दौरान होने वाली घटना माना था। इसी शासनादेश की गाइडलाइन के अनुसार जनपदों से सूचनाएं मांगी गई थीं। इस आधार पर प्रशासन ने जिले में चुनाव ड्यूटी के दौरान किसी भी कर्मचारी की मृत्यु ना होने की सूचना शासन को भेजी थी। जिसके बाद शिक्षक संघ और कर्मचारी संगठन खफा थे। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मृतकों के परिवार में आशा जगी है। शिक्षक संघ को भी नए शासनादेश का इंतजार है।
पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान जिले में 29 शिक्षक और शिक्षामित्रों की मृत्यु हुई है। हमने बीएसए कार्यालय और उनके व्हाट्सएप पर मृतकों की सूची भेज दी है। मंडलीय अधिकारियों को भी इसे भेजा गया है। मुख्यमंत्री की पहल शिक्षक हित में है। उनके आदेश से मृतक शिक्षक परिवारों को राहत की उम्मीद जगी है। सरकार केे जल्द संशेधित शासनोदश जारी करना चाहिए ताकि प्रशासन मृतक शिक्षक कर्मचारियों की सूची भेज सके।
- धर्मेद्र प्रताप सिंह, जिला महामंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ
शासनादेश की गाइडलाइन के अनुसार जिले में कोई भी शिक्षक चुनाव ड्यूूटी के दौरान मृत्यु के दायरे में नही आ रहा था। इसी आधार पर शून्य की सूचना भेजी गई थी। इसके बाद अब तक कोई शासनादेश नहीं मिला है। यदि कोई संशोधित शासनोदश मिलेगा तो उसके आधार पर सूचना भेजी जाएगी। शिक्षक संघों ने पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान कुछ शिक्षकों की मृत्यु की जानकारी दी है।
- योगेंद्र सिंह बीएसए
शासनादेश के अनुसार जिले में पंचायत चुनाव की ड्युटी के दौरान किसी की मृत्यु नहीं हुई थी। यही सूचना शासन को भेज दी गई थी। यदि कोई संशोधित सूचना मांगी गई तो उसकी गाइडलाइन के आधार पर सूचना तैयार कर भेज दी जाएगी।
- प्रीति जायसवाल उपजिला निर्वाचन अधिकारी