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पोरस’ की छलांग सब पर भारी, ‘रिमझिम’ का रहा जलवा
Wed, 20 Nov 2019 12:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 20 Nov 2019 12:22 AM IST
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अश्वारोहण प्रतियोगिता
- फोटो : अमर उजाला
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22वीं उत्तर प्रदेश पुलिस अश्वारोहण प्रतियोगिता का मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी के घुड़सवारी मैदान पर शुभारंभ हो गई। चार दिवसीय प्रतियोगिता के पहले ही दिन मुरादाबाद प्रशिक्षण जोन ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते।
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मुरादाबाद के मुकेश बाबू ने अश्व पोरस और रिमझिम पर सवार होकर स्वर्ण पदक व रजत पदक अपने नाम किया तो प्रशिक्षण जोन के ही भगवान सिंह ने अश्व मोंटीना पर सवार होकर कांस्य पदक जीता। प्रशिक्षण जोन के ही राज नरेशअश्व अनंत पर सवार होकर चौथे स्थान पर आए।
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प्रतियोगिता का उद्घाटन मुख्य अतिथि आईजी रमित शर्मा ने सुबह नौ बजे रंग बिरंगे गुब्बारे एवं शांति के प्रतीक कबूतर को उड़ाकर किया। इसके बाद प्रदेश स्तर से प्रतिभाग करने वाली सभी टीमों द्वारा मार्च पास्ट के दौरान मुख्य अतिथि को सलामी दी गयी।
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आरआईएमपी प्रेम बाबू द्वारा प्रतिभागियों को शपथ दिलाई गयी। प्रतियोगिता में प्रयागराज, लखनऊ , अलीगढ़, आगरा, वाराणसी एवं प्रशिक्षण जोन मुरादाबाद की टीमों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में कुल 43 घोड़े एवं 24 घुड़सवार भाग ले रहे हैं।
प्रतियोगिता के आरंभ में टेंट पैंगिंग व्यक्तिगत एलिमिनेशन प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इसमें प्रयागराज, लखनऊ अलीगढ़ आगरा वाराणसी एवं प्रशिक्षण जोन मुरादाबाद की टीमों ने भाग लिया। जिसके आधार पर अगले राउंड के लिए प्रतिभागियों का चयन किया जाता है।
टेंट पैंगिंग व्यक्तिगत एलिमिनेशन के प्रथम राउंड में 10 प्रतिभागियों का चयन अगले राउंड के लिए किया गया। इसके उपरांत घुड़सवारी मैदान में शो जंपिंग नोविश की प्रतियोगिता आयोजित की गयी। जिसके बाद विजेताओं को चुना गया। विजेता प्रतिभागियों को पुलिस अधीक्षक जीआरपी पीके तिवारी द्वारा पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में कर्नल सुशील बलवाडा कर्नल बीएस लाकड़ा कोर्स डिजाइनर एकलव्य शर्मा रहे। इस अवसर पर पुलिस उपमहानिरीक्षक पूनम श्रीवास्तव पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार अपर पुलिस अधीक्षक बसंत लाल संयुक्त निदेशक मौ. असलम खान, पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार यादव, सुदेश कुमार प्रतिसार निरीक्षक महीपाल सिंह, प्रशांत कुमार, उपनिरीक्षक संग्राम सिंह, प्रमोद शर्मा एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिस उपाधीक्षक उपनिरीक्षक एवं संस्था के सभी अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
नहीं आए नेल्सन और गैलेक्सी, आगे बढ़ गया स्वास्तिक
22 वीं वार्षिक पुलिस घुड़सवार प्रतियोगिता में शिरकत करने के लिए अलीगढ़ के अश्व नेल्सन और गैलेक्सी तैयार ही नहीं हो पाए। ऐसे में वहां के अश्वारोहियों ने मुरादाबाद के घोड़ों पर ही दांव खेला।
प्रतियोगिता में आगरा टीम के कप्तान दिलशाद अहमद छह घोडे़ बलवान, मस्तमौला, टाईगर, राउडी, तेजस, चेतन, प्रयागराज टीम के कप्तान जयशंकर राय तीन घोड़े रणवीर, करन, महाराजा, लखनऊ टीम के कप्तान शिवाजी दूबे चार घोडे़ रोनाल्डो, सायमंड, राधा, ज्वाला, वाराणसी टीम के कप्तान कृष्णचंद्र यादव तीन घोडे़ सुल्तान, महाराणा, एलेक्जेंडर और मुरादाबाद टीम के कप्तान आरआई प्रेम बाबू 18 घोड़े पवन, प्रबल, परमवीर, स्वास्तिक, रेनू, राखी, नगीना, दक्ष, हीरो, अनंत, मोंटीना, राठौर, रिमझिम, डायमंड, ब्लैक ब्यूटी, शेरू, रामू और हेलन के साथ प्रतिभाग कर रहे हैं।
जबकि अलीगढ़ से आए घुड़सवार एसआईएमपी अशोक कुमार ने बताया कि अलीगढ़ में घोड़े प्रतियोगिता के लिए तैयार नहीं थे। उसके बदले स्वास्तिक से प्रतियोगिता की और वह अगले राउंड में क्वालीफाई कर गया।
दरअसल, प्रतियोगिता की तैयारी के लिए अलीगढ़ में मैदान भी नहीं है। इसी वजह से वह मुरादाबाद के घोड़ों पर सवार होकर अलीगढ़ की ओर से प्रतिभाग कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने प्रतियोगिता में अच्छे नंबर हासिल किए हैं।
उन्होंने बताया कि वह अलीगढ़ से पहले मुरादाबाद में ही कार्यरत थे। यहां पुलिस अकादमी के घोड़ों के बारे में वह अच्छी तरह से परिचित हैं। ऐसे में उनको उम्मीद है कि वह आगे भी प्रतियोगिता में वह अच्छा प्रदर्शन कर सफलता प्राप्त करेंगे।
प्रतियोगिता में आगरा टीम के कप्तान दिलशाद अहमद छह घोडे़ बलवान, मस्तमौला, टाईगर, राउडी, तेजस, चेतन, प्रयागराज टीम के कप्तान जयशंकर राय तीन घोड़े रणवीर, करन, महाराजा, लखनऊ टीम के कप्तान शिवाजी दूबे चार घोडे़ रोनाल्डो, सायमंड, राधा, ज्वाला, वाराणसी टीम के कप्तान कृष्णचंद्र यादव तीन घोडे़ सुल्तान, महाराणा, एलेक्जेंडर और मुरादाबाद टीम के कप्तान आरआई प्रेम बाबू 18 घोड़े पवन, प्रबल, परमवीर, स्वास्तिक, रेनू, राखी, नगीना, दक्ष, हीरो, अनंत, मोंटीना, राठौर, रिमझिम, डायमंड, ब्लैक ब्यूटी, शेरू, रामू और हेलन के साथ प्रतिभाग कर रहे हैं।
जबकि अलीगढ़ से आए घुड़सवार एसआईएमपी अशोक कुमार ने बताया कि अलीगढ़ में घोड़े प्रतियोगिता के लिए तैयार नहीं थे। उसके बदले स्वास्तिक से प्रतियोगिता की और वह अगले राउंड में क्वालीफाई कर गया।
दरअसल, प्रतियोगिता की तैयारी के लिए अलीगढ़ में मैदान भी नहीं है। इसी वजह से वह मुरादाबाद के घोड़ों पर सवार होकर अलीगढ़ की ओर से प्रतिभाग कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने प्रतियोगिता में अच्छे नंबर हासिल किए हैं।
उन्होंने बताया कि वह अलीगढ़ से पहले मुरादाबाद में ही कार्यरत थे। यहां पुलिस अकादमी के घोड़ों के बारे में वह अच्छी तरह से परिचित हैं। ऐसे में उनको उम्मीद है कि वह आगे भी प्रतियोगिता में वह अच्छा प्रदर्शन कर सफलता प्राप्त करेंगे।
छह माह में घोड़े, नौ माह में घुड़सवार होते हैं तैयार
माउंटेड पुलिस, वह पुलिस है जो घोड़ों पर गश्त करती हुई नजर आती है। एक घोडे़ को पुलिस के लिए तैयार करने में छह माह का समय लगता है जबकि उसके घुड़सवार को नौ माह का प्रशिक्षण देकर घुड़सवारी के लिए तैयार किया जाता है। हालांकि इनकी ट्रेनिंग सिपाही की तरह ही होती है।
प्रशिक्षण के लिए तीन से पांच साल तक के घोड़ों को खरीदा जाता है। इनका अधिकतम 20 साल की आयु तक पुलिस द्वारा पेट्रोलिंग और प्रतियोगिताओं में इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस द्वारा घोडे़ फर्मों से खरीदे जाते हैं, इनमें देसी घोड़े की तीन प्रजाति अमृतसरी, भैरो और काठियाबाड़ी है।
ये घोडे़ 60 से 80 हजार रुपये तक में पुलिस को मिल जाते हैं जबकि हाफब्रिड और थैरो प्रजाति के घोड़े 1.60 लाख रुपये से 1.80 लाख रुपये तक में खरीदे जाते हैं। दो घोड़ों की देखभाल के लिए एक साईस होता है जो कि उनकी निगरानी करता है।
दो बार सैंड बाथ, तीन बार मालिश, ऐसे रखा जाता है घोडे़ का प्रतिदिन ख्याल
घोड़े की देखभाल करना आसान नहीं है। लंबे समय से पुलिस अकादमी में घोड़ों की देखभाल का जिम्मा संभाल रहे साईस ओमप्रकाश ने बताया कि घोड़ों को रोजाना दो बार सेंड बाथ कराया जाता है, तीन बार मालिश की जाती है। जिससे की वह बीमार न हों और उनके शरीर में गंदगी न रहे।
ओमप्रकाश ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठते हैं। इसके बाद घोड़ों को साफ सुथरा कर तैयार किया जता है। सुबह छह बजे उनको परेड के लिए लाया जाता है। परेड़ के बाद उनको वापस अस्तबल में लाया जाता है।
यहां पर उनको रेत में लिटाया जाता है। मालिश की जाती है, जिससे की उनकी थकान मिट सके। सेंड बाथ कराने के बाद उनको करीब साढे़ सात बजे खाना दिया जाता है। दोपहर में डेढ़ बजे दोबारा खाना दिया जाता है। फिर मालिश की जाती है।
शाम को चार बजे उनको दोबारा परेड़ के लिए ले जाया जाता है। परेड़ से लाने के बाद दोबारा घोड़ों को रेत में लिटाया जाता है। इसके बाद सेंडबाथ कराया जाता है फिर उनकी मालिश की जाती है। जिससे की उनके शरीर में किसी तरह की गंदगी न रहे। देर शाम करीब साढे़ सात बजे उनको तीसरी बार खाना दिया जाता है। इसके बाद उनको सोने के लिए छोड़ दिया जाता है।
मुरादाबाद। एक किलो चना, दो किलो जौ, एक किलो चोकर, 30 ग्राम नमक, 100 ग्राम तेल, 100 ग्राम गुड़, 25 किलो घास एक घोड़ा रोजाना खाता है। घोड़ों को चना ओर गुड़ काफी पसंद हैं।
ओमप्रकाश ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठते हैं। इसके बाद घोड़ों को साफ सुथरा कर तैयार किया जता है। सुबह छह बजे उनको परेड के लिए लाया जाता है। परेड़ के बाद उनको वापस अस्तबल में लाया जाता है।
यहां पर उनको रेत में लिटाया जाता है। मालिश की जाती है, जिससे की उनकी थकान मिट सके। सेंड बाथ कराने के बाद उनको करीब साढे़ सात बजे खाना दिया जाता है। दोपहर में डेढ़ बजे दोबारा खाना दिया जाता है। फिर मालिश की जाती है।
शाम को चार बजे उनको दोबारा परेड़ के लिए ले जाया जाता है। परेड़ से लाने के बाद दोबारा घोड़ों को रेत में लिटाया जाता है। इसके बाद सेंडबाथ कराया जाता है फिर उनकी मालिश की जाती है। जिससे की उनके शरीर में किसी तरह की गंदगी न रहे। देर शाम करीब साढे़ सात बजे उनको तीसरी बार खाना दिया जाता है। इसके बाद उनको सोने के लिए छोड़ दिया जाता है।
ये है प्रतिदिन खाना.. चना और गुड़ काफी पसंद
मुरादाबाद। एक किलो चना, दो किलो जौ, एक किलो चोकर, 30 ग्राम नमक, 100 ग्राम तेल, 100 ग्राम गुड़, 25 किलो घास एक घोड़ा रोजाना खाता है। घोड़ों को चना ओर गुड़ काफी पसंद हैं।