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बीएड के शासनादेश से बढ़ी चिंता
Updated Tue, 27 Nov 2018 02:20 AM IST
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मुरादाबाद।
राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद ने टीचिंग एजूकेशन में एक बार फिर बदलाव किया है। अब युवा शिक्षक बनने के लिए चार वर्ष का बीएड कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि मान्यता लेने से पहले आधारभूत सुविधाएं और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होने से गुणवत्ता आएगी, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है।
एनसीटीई द्वारा 20 नवंबर को जारी नोटिस के अनुसार पूर्व प्राथमिक से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक से माध्यमिक तक चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। कला और विज्ञान वर्ग में प्रवेश इंटरमीडिएट के बाद लिया जा सकता है। विद्यार्थियों को बीए अथवा बीएससी की डिग्री लेने के लिए चयनित किए गए विषयों की भी जानकारी भरनी होगी। इसको करने की अवधि चार शैक्षणिक वर्ष और आठ सेमेस्टर होंगे। यदि कोई समय से पूरा नहीं कर पाता है तो उसे अधिकतम छह वर्ष में पूरा करने की अनुमति दी जा सकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद शैक्षिक सत्र 2019-23 के लिए पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति या मान्यता लेने के लिए शिक्षण संस्थान तीन दिसंबर से 31 दिसंबर तक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। श्री बालाजी अकादमी के प्राचार्य प्रो. वाईके गुप्ता ने बताया कि चार साल का पाठ्यक्रम सफल होगा, इस पर आशंका बनी हुई है। पाठ्यक्रम संचालित करने की मान्यता लेने से पहले संस्थान को अपने यहां मूलभूत सुविधाओं को सुधारने के साथ शिक्षक नियुक्त करने के लिए उनके पास विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षिक योग्यता होना अनिवार्य है। इसके कारण यह बहुत खर्चीला हो जाएगा। इसके बावजूद कितने युवाओं को नौकरी मिलेगी, इसकी भी गारंटी नहीं है। बीएड प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक प्रो. एनके खरे ने बताया कि यह इंट्रीग्रेडिट पाठ्यक्रम है। एनसीटीई ने अभी नोटिस भेजा है, लेकिन हम शासनादेश का इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में संचालित दो वर्षीय पाठ्यक्रम चलता रहेगा या बंद होगा, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है।
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राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद ने टीचिंग एजूकेशन में एक बार फिर बदलाव किया है। अब युवा शिक्षक बनने के लिए चार वर्ष का बीएड कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि मान्यता लेने से पहले आधारभूत सुविधाएं और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होने से गुणवत्ता आएगी, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है।
एनसीटीई द्वारा 20 नवंबर को जारी नोटिस के अनुसार पूर्व प्राथमिक से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक से माध्यमिक तक चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। कला और विज्ञान वर्ग में प्रवेश इंटरमीडिएट के बाद लिया जा सकता है। विद्यार्थियों को बीए अथवा बीएससी की डिग्री लेने के लिए चयनित किए गए विषयों की भी जानकारी भरनी होगी। इसको करने की अवधि चार शैक्षणिक वर्ष और आठ सेमेस्टर होंगे। यदि कोई समय से पूरा नहीं कर पाता है तो उसे अधिकतम छह वर्ष में पूरा करने की अनुमति दी जा सकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद शैक्षिक सत्र 2019-23 के लिए पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति या मान्यता लेने के लिए शिक्षण संस्थान तीन दिसंबर से 31 दिसंबर तक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। श्री बालाजी अकादमी के प्राचार्य प्रो. वाईके गुप्ता ने बताया कि चार साल का पाठ्यक्रम सफल होगा, इस पर आशंका बनी हुई है। पाठ्यक्रम संचालित करने की मान्यता लेने से पहले संस्थान को अपने यहां मूलभूत सुविधाओं को सुधारने के साथ शिक्षक नियुक्त करने के लिए उनके पास विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षिक योग्यता होना अनिवार्य है। इसके कारण यह बहुत खर्चीला हो जाएगा। इसके बावजूद कितने युवाओं को नौकरी मिलेगी, इसकी भी गारंटी नहीं है। बीएड प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक प्रो. एनके खरे ने बताया कि यह इंट्रीग्रेडिट पाठ्यक्रम है। एनसीटीई ने अभी नोटिस भेजा है, लेकिन हम शासनादेश का इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में संचालित दो वर्षीय पाठ्यक्रम चलता रहेगा या बंद होगा, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है।
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