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सपा - बसपा गठजोड़ से जीत का ख्वाब देख रहीं सलिता
Updated Fri, 07 Sep 2018 02:20 AM IST
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मुरादाबाद।
हार को भांपकर अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले ही इस्तीफा दे चुकी सलिता सिंह ने अभी जिला पंचायत की अध्यक्षी का मोह नहीं छोड़ा है। सलिता ने फिर से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में सपा और बसपा की नजदीकियों को वह जीत के नए गणित के तौर पर देख रही हैं। सलिता के पति सपा नेता और पूर्व मंत्री जगराम सिंह का कहना है कि जिला पंचायत बोर्ड के 34 में से 17 सदस्य मुस्लिम हैं। बोले, बसपा भी अब तो सपा के साथ है। ऐसे में जीत ज्यादा दूर नहीं। इंतजार पर पार्टी से हरी झंडी का रहेगा।
करीब ढाई साल पहले सपा की साइकिल पर बैठकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनी सलिता ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अपनी कुर्सी बचाने की हर मुमकिन कोशिश की। भाजपा सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का साथ मिला तो सलिता को लगा कि अब बाकी का कार्यकाल आसानी से गुजर जाएगा। उन्होंने भाजपा में शामिल होने की भरसक कोशिशें कीं, लेकिन सांसद सर्वेश और मंत्री भूपेंद्र की सियासी अदावत ने सलिता को भाजपा की दहलीज के भीतर नहीं आने दिया। वह सांसद के साथ तमाम कार्यक्रमों में मंच साझा कर खुद के भाजपाई होने का संदेश देती रहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिलीं और बेहतर काम करने का आर्शीवाद भी ले आईं लेकिन इन सबके बावजूद उनकी कुर्सी पर संकट बना रहा। एक साल होते - होते सलिता को अहसास हो गया कि अकेले सांसद के सहारे वह जिला पंचायत को नहीं चला पाएंगी। कोई रास्ता नहीं देख उन्हाेंने बुधवार को इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के अगले ही दिन से सलिता फिर से इस जुगत में लग गई हैं कि कैसे अपनी कुर्सी को वापस हासिल करें। अभी जिला पंचायत का करीब ढाई साल का कार्यकाल बाकी है। जल्द चुनाव आयोग नए सिरे से अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराएगा। सलिता भी अभी से इसकी तैयारियों में जुट गई हैं। सलिता के पति पूर्व मंत्री जगराम सिंह का कहना है वह तैयार हैं, पार्टी यदि चाहेगी तो पत्नी को फिर से चुनाव लड़ाएंगे। पूर्व मंत्री ने कहा कि अब तो समीकरण भी पक्ष में हैं। बसपा के सदस्य भी साथ देंगे। उन्होंने कहा कि 17 मुस्लिम सदस्य भी भाजपा का साथ नहीं देंगे।
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हार को भांपकर अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले ही इस्तीफा दे चुकी सलिता सिंह ने अभी जिला पंचायत की अध्यक्षी का मोह नहीं छोड़ा है। सलिता ने फिर से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में सपा और बसपा की नजदीकियों को वह जीत के नए गणित के तौर पर देख रही हैं। सलिता के पति सपा नेता और पूर्व मंत्री जगराम सिंह का कहना है कि जिला पंचायत बोर्ड के 34 में से 17 सदस्य मुस्लिम हैं। बोले, बसपा भी अब तो सपा के साथ है। ऐसे में जीत ज्यादा दूर नहीं। इंतजार पर पार्टी से हरी झंडी का रहेगा।
करीब ढाई साल पहले सपा की साइकिल पर बैठकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनी सलिता ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अपनी कुर्सी बचाने की हर मुमकिन कोशिश की। भाजपा सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का साथ मिला तो सलिता को लगा कि अब बाकी का कार्यकाल आसानी से गुजर जाएगा। उन्होंने भाजपा में शामिल होने की भरसक कोशिशें कीं, लेकिन सांसद सर्वेश और मंत्री भूपेंद्र की सियासी अदावत ने सलिता को भाजपा की दहलीज के भीतर नहीं आने दिया। वह सांसद के साथ तमाम कार्यक्रमों में मंच साझा कर खुद के भाजपाई होने का संदेश देती रहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिलीं और बेहतर काम करने का आर्शीवाद भी ले आईं लेकिन इन सबके बावजूद उनकी कुर्सी पर संकट बना रहा। एक साल होते - होते सलिता को अहसास हो गया कि अकेले सांसद के सहारे वह जिला पंचायत को नहीं चला पाएंगी। कोई रास्ता नहीं देख उन्हाेंने बुधवार को इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के अगले ही दिन से सलिता फिर से इस जुगत में लग गई हैं कि कैसे अपनी कुर्सी को वापस हासिल करें। अभी जिला पंचायत का करीब ढाई साल का कार्यकाल बाकी है। जल्द चुनाव आयोग नए सिरे से अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराएगा। सलिता भी अभी से इसकी तैयारियों में जुट गई हैं। सलिता के पति पूर्व मंत्री जगराम सिंह का कहना है वह तैयार हैं, पार्टी यदि चाहेगी तो पत्नी को फिर से चुनाव लड़ाएंगे। पूर्व मंत्री ने कहा कि अब तो समीकरण भी पक्ष में हैं। बसपा के सदस्य भी साथ देंगे। उन्होंने कहा कि 17 मुस्लिम सदस्य भी भाजपा का साथ नहीं देंगे।
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