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अफसर मनाते रहे त्यौहार, बे-बस यात्री
Updated Mon, 27 Aug 2018 02:01 AM IST
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मुरादाबाद।
रक्षाबंधन त्योहार पर रोडवेज बसों की सेवा दुरुस्त करने के परिवहन निगम के दावों की हवा निकल गई। महिलाओं के लिए बसों में फ्री सफर करना तो दूर बसें ही नहीं मिली। मुख्य रोडवेज और पीतल नगरी स्टेशन में यात्री बे-बेस रहे। दिल्ली और आसपास के रूटों पर सर्वाधिक दबाव रहा। स्टेशनों में यात्रियों को कई घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ा। बसें खड़ी होते ही यात्री उनमें टूट पड़े। सीट पाने की होड़ में यात्री खिड़कियों से अंदर घुसते नजर आए। इसके बाद भी यात्रियों को बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ा।
रोडवेज स्टेशन में सुबह से ही यात्रियों का हुजूम उमड़ने लगा। स्टेशन से दिल्ली, नजीबाबाद, धामपुर, बिजनौर, अमरोहा और मेरठ के लिए 95 बसों का संचालन किया गया। दिल्ली और मेरठ के लिए बसों के फेरे बढ़ाने के दावे के बाद भी इन्हीं रूटों पर बसों की सबसे अधिक मारामारी रही। यात्री पूछताछ काउंटरों पर भटकते रहे। काउंटरों से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। बसों के इंतजार में यात्री स्टेशन में जहां तहां अपने सामान के साथ मायूस बैठे नजर आए।
पीतल नगरी डिपो का बुरा हाल रहा। डिपो से संभल, चंदौसी, बरेली, रामपुर, हल्द्वानी और आगरा समेत आसपास के रूटों के लिए 104 बसों का संचालन किया गया। डिपो में बसें खड़ी होते ही यात्री उनमें टूट पड़े। महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी। अधिकतर महिलाएं बच्चों के साथ नजर आई। घंटों इंतजार के बाद बसें लगने पर यात्रियों की भीड़ टूटने से महिलाओं को बस में चढ़ने की जगह नहीं मिली। ऐसे में महिलाएं बच्चों के साथ भटकती रही। स्टेशनों पर लगे डिस्पले बोर्ड में बसों के रूट चार्ट की गड़बड़ी और पूछताछ काउंटरों से यात्रियों को संतोष जनक जवाब नहीं मिला। स्टेशनों से अफसर नदारत रहे। पूछताछ काउंटरों से यात्रियों का बताया गया कि रविवार अवकाश और त्योहार है। इससे यात्री भड़क गए और उन्होंने हंगामा कर दिया। दोनों ही स्टेशनों पर यात्रियों के हंगामे की स्थिति रही। लिहाजा, पुलिस को मौके पर पहुंचकर यात्रियों को शांत कराना पड़ा। हंगामे के बाद स्टेशन प्रबंधन भी पहुंच गए। देर शाम तक बसों की मारामारी रही। उधर स्टेशनों पर कर्मियों ने बताया कि रोजाना की तुलना में यात्रियों का दबाव चार गुने से अधिक रहा। इसके चलते ही बसों की मारामारी रही।
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रक्षाबंधन त्योहार पर रोडवेज बसों की सेवा दुरुस्त करने के परिवहन निगम के दावों की हवा निकल गई। महिलाओं के लिए बसों में फ्री सफर करना तो दूर बसें ही नहीं मिली। मुख्य रोडवेज और पीतल नगरी स्टेशन में यात्री बे-बेस रहे। दिल्ली और आसपास के रूटों पर सर्वाधिक दबाव रहा। स्टेशनों में यात्रियों को कई घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ा। बसें खड़ी होते ही यात्री उनमें टूट पड़े। सीट पाने की होड़ में यात्री खिड़कियों से अंदर घुसते नजर आए। इसके बाद भी यात्रियों को बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ा।
रोडवेज स्टेशन में सुबह से ही यात्रियों का हुजूम उमड़ने लगा। स्टेशन से दिल्ली, नजीबाबाद, धामपुर, बिजनौर, अमरोहा और मेरठ के लिए 95 बसों का संचालन किया गया। दिल्ली और मेरठ के लिए बसों के फेरे बढ़ाने के दावे के बाद भी इन्हीं रूटों पर बसों की सबसे अधिक मारामारी रही। यात्री पूछताछ काउंटरों पर भटकते रहे। काउंटरों से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। बसों के इंतजार में यात्री स्टेशन में जहां तहां अपने सामान के साथ मायूस बैठे नजर आए।
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पीतल नगरी डिपो का बुरा हाल रहा। डिपो से संभल, चंदौसी, बरेली, रामपुर, हल्द्वानी और आगरा समेत आसपास के रूटों के लिए 104 बसों का संचालन किया गया। डिपो में बसें खड़ी होते ही यात्री उनमें टूट पड़े। महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी। अधिकतर महिलाएं बच्चों के साथ नजर आई। घंटों इंतजार के बाद बसें लगने पर यात्रियों की भीड़ टूटने से महिलाओं को बस में चढ़ने की जगह नहीं मिली। ऐसे में महिलाएं बच्चों के साथ भटकती रही। स्टेशनों पर लगे डिस्पले बोर्ड में बसों के रूट चार्ट की गड़बड़ी और पूछताछ काउंटरों से यात्रियों को संतोष जनक जवाब नहीं मिला। स्टेशनों से अफसर नदारत रहे। पूछताछ काउंटरों से यात्रियों का बताया गया कि रविवार अवकाश और त्योहार है। इससे यात्री भड़क गए और उन्होंने हंगामा कर दिया। दोनों ही स्टेशनों पर यात्रियों के हंगामे की स्थिति रही। लिहाजा, पुलिस को मौके पर पहुंचकर यात्रियों को शांत कराना पड़ा। हंगामे के बाद स्टेशन प्रबंधन भी पहुंच गए। देर शाम तक बसों की मारामारी रही। उधर स्टेशनों पर कर्मियों ने बताया कि रोजाना की तुलना में यात्रियों का दबाव चार गुने से अधिक रहा। इसके चलते ही बसों की मारामारी रही।
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