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अब नौ लखा बेडाक्विलिन दवा से होगा टीबी का इलाज
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मुरादाबाद। ट्यूबरक्लोरसिस (टीबी) के गंभीर मरीजों के लिए सरकार ने नौ लखा दवा बेडाक्विलिन मुफ्त में मुहैया कराई है। इस दवा से मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) श्रेणी के बीच में दवा छोड़ने वाले मरीजों को सिर्फ 9-12 महीने में ठीक करना संभव होगा।
जिला क्षय चिकित्सालय से मिली जानकारी के मुताबिक बेडाक्विलिन की एक शीशी में 188 गोलियां होती है। एक गोली करीब 47 सौ की पड़ती है। शीशी की कीमत 9 लाख रुपये है। डॉ. डीके प्रेमी के मुताबिक यह दवा देने से पहले मरीज का ईसीजी कराते हैं और अपनी निगरानी में ही दवा दी जाती है। यह दवा शुरुआती पांच महीने ही लेनी होती है। अब तक एमडीआर से गंभीर हुए मरीजों को दो साल तक कड़ी निगरानी में दवा लेनी होती है।
कार्डियो टक्सीसिटी सॉल्ट अधिक होने से कराते हैं ईसीजी
डॉक्टरों के मुताबिक एक्सडीआर टीबी के मरीजों के लिए लांच वाली दवा बेडाक्विलिन में कार्डियो टक्सीसिटी सॉल्ट ज्यादा है। इसलिए इसे बिना ईसीजी रिपोर्ट के मरीजों को नहीं दिया जा सकता है। टीबी के इलाज में सरकार द्वारा जोड़ी जाने वाली यह सातवीं दवा है।
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एक्सडीआर मरीजों पर है कारगर
मर्ज की दवा को बीच में छोड़ने वाले टीबी के मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता जनरेट हो जाती है। यह श्रेणी एमडीआर की होती है। एमडीआर श्रेणी के मरीज भी अक्सर दवायें बीच में छोड़ते हैं। एक्सडीआर यानी एक्स्टेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट में तब्दील होते हैं। इस श्रेणी के मरीजों को यह दवा दी जानी है। हालांकि मुरादाबाद में एक भी मरीज ऐसा सामने नहीं आया है।
सरकार से काफी महंगी दवा हमारे पास आ चुकी है। अभी एक्सडीआर श्रेणी का मरीज सामने नहीं आए हैं। इसलिए फिलहाल दवा का इस्तेमाल नहीं हुआ है। - दिनेश कुमार प्रेमी, जिला क्षय रोग अधिकारी
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जिला क्षय चिकित्सालय से मिली जानकारी के मुताबिक बेडाक्विलिन की एक शीशी में 188 गोलियां होती है। एक गोली करीब 47 सौ की पड़ती है। शीशी की कीमत 9 लाख रुपये है। डॉ. डीके प्रेमी के मुताबिक यह दवा देने से पहले मरीज का ईसीजी कराते हैं और अपनी निगरानी में ही दवा दी जाती है। यह दवा शुरुआती पांच महीने ही लेनी होती है। अब तक एमडीआर से गंभीर हुए मरीजों को दो साल तक कड़ी निगरानी में दवा लेनी होती है।
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कार्डियो टक्सीसिटी सॉल्ट अधिक होने से कराते हैं ईसीजी
डॉक्टरों के मुताबिक एक्सडीआर टीबी के मरीजों के लिए लांच वाली दवा बेडाक्विलिन में कार्डियो टक्सीसिटी सॉल्ट ज्यादा है। इसलिए इसे बिना ईसीजी रिपोर्ट के मरीजों को नहीं दिया जा सकता है। टीबी के इलाज में सरकार द्वारा जोड़ी जाने वाली यह सातवीं दवा है।
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एक्सडीआर मरीजों पर है कारगर
मर्ज की दवा को बीच में छोड़ने वाले टीबी के मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता जनरेट हो जाती है। यह श्रेणी एमडीआर की होती है। एमडीआर श्रेणी के मरीज भी अक्सर दवायें बीच में छोड़ते हैं। एक्सडीआर यानी एक्स्टेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट में तब्दील होते हैं। इस श्रेणी के मरीजों को यह दवा दी जानी है। हालांकि मुरादाबाद में एक भी मरीज ऐसा सामने नहीं आया है।
सरकार से काफी महंगी दवा हमारे पास आ चुकी है। अभी एक्सडीआर श्रेणी का मरीज सामने नहीं आए हैं। इसलिए फिलहाल दवा का इस्तेमाल नहीं हुआ है। - दिनेश कुमार प्रेमी, जिला क्षय रोग अधिकारी