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दोपहर में गठबंधन तो शाम को कांग्रेसी हो रहे मतदाता
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मुरादाबाद। कांग्रेस और गठबंधन प्रत्याशी मतदाताओं का रुख नहीं भांप पा रहे हैं। दोनों ही प्रत्याशियों में मतदाताओं को रिझाने की होड़ मची है। जो मतदाता दोपहर में गठबंधन प्रत्याशी के जनसंपर्क में सपा का झंडा उठा रहे, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी के जलसों की भीड़ बढ़ा रहे हैं। मतदाता किसके पक्ष में मताधिकार करेंगे, इसको लेकर प्रत्याशी भी दुविधा में हैं।
मुरादाबाद लोकसभा से कांग्रेस, गठबंधन और भाजपा का त्रिकोणीय मुकाबला है। कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान प्रतापगढ़ी और गठबंधन के उम्मीदवार डा. एसटी हसन के बीच मुस्लिम वोटरों को रिझाने की होड़ है। लोकसभा में करीब 47 फीसदी मुसलिम मतदाता हैं। दोनों ही प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य इन्हीं मतदाताओं पर टिका है। नामांकन जुलूस के बाद दोनों ही प्रत्याशियों के जनसंपर्क, जनसभाएं और जलसे मुस्लिम आबादी क्षेत्र में ही हो रहे हैं। चुनाव मैदान में भले ही दोनों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन जनसंपर्क और जलसों की पूरी अपडेट रख रहे हैं। किसी इलाके में गठबंधन प्रत्याशी जनसंपर्क कर रहे हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी उसी इलाके में अपना जलसा कर रहे हैं। इस होड़ में मतदाता खामोश हैं। दोनों ही प्रत्याशियों की जनसभाओं और जलसों में शामिल हो रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गठबंधन और कांग्रेस में चुनाव जीतने से अधिक लोगों को जोड़ने की प्रतिस्पर्द्धा हो रही है। मतदाता भी किसी को नाराज नहीं कर रहे हैं। दोपहर तक गठबंधन प्रत्याशी के साथ जनसंपर्क कर साइकिल दौड़ा रहे हैं तो शाम को कांग्रेसी प्रत्याशी की महफिलों में उमड़ रहे हैं। पिछले कई दिनों से अधिकतर मतदाताओं का यही रुटीन बना है। कई परिवार तो ऐसे हैं जिनके सदस्य दोनों ही प्रत्याशियों के समर्थक हैं। मतदाताओं की खामोशी से प्रत्याशी ही नहीं बल्कि राजनीतिक जानकार भी मूड नहीं भांप पा रहे हैं।
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फतवे पर सियासत
मुरादाबाद। कांग्रेस और गठबंधन में फतवे की सियासत भी होने लगी है। मुसलिम धर्म गुरुओं के नाम से किसी एक प्रत्याशी के समर्थन में वोट डालने की अपील की जा रही हैं। कांग्रेस और गठबंधन प्रत्याशियों ने अपने-अपने सोशल मीडिया एकाउंट से फतवे का जिक्र भी किया है।
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मुरादाबाद लोकसभा से कांग्रेस, गठबंधन और भाजपा का त्रिकोणीय मुकाबला है। कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान प्रतापगढ़ी और गठबंधन के उम्मीदवार डा. एसटी हसन के बीच मुस्लिम वोटरों को रिझाने की होड़ है। लोकसभा में करीब 47 फीसदी मुसलिम मतदाता हैं। दोनों ही प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य इन्हीं मतदाताओं पर टिका है। नामांकन जुलूस के बाद दोनों ही प्रत्याशियों के जनसंपर्क, जनसभाएं और जलसे मुस्लिम आबादी क्षेत्र में ही हो रहे हैं। चुनाव मैदान में भले ही दोनों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन जनसंपर्क और जलसों की पूरी अपडेट रख रहे हैं। किसी इलाके में गठबंधन प्रत्याशी जनसंपर्क कर रहे हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी उसी इलाके में अपना जलसा कर रहे हैं। इस होड़ में मतदाता खामोश हैं। दोनों ही प्रत्याशियों की जनसभाओं और जलसों में शामिल हो रहे हैं।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गठबंधन और कांग्रेस में चुनाव जीतने से अधिक लोगों को जोड़ने की प्रतिस्पर्द्धा हो रही है। मतदाता भी किसी को नाराज नहीं कर रहे हैं। दोपहर तक गठबंधन प्रत्याशी के साथ जनसंपर्क कर साइकिल दौड़ा रहे हैं तो शाम को कांग्रेसी प्रत्याशी की महफिलों में उमड़ रहे हैं। पिछले कई दिनों से अधिकतर मतदाताओं का यही रुटीन बना है। कई परिवार तो ऐसे हैं जिनके सदस्य दोनों ही प्रत्याशियों के समर्थक हैं। मतदाताओं की खामोशी से प्रत्याशी ही नहीं बल्कि राजनीतिक जानकार भी मूड नहीं भांप पा रहे हैं।
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फतवे पर सियासत
मुरादाबाद। कांग्रेस और गठबंधन में फतवे की सियासत भी होने लगी है। मुसलिम धर्म गुरुओं के नाम से किसी एक प्रत्याशी के समर्थन में वोट डालने की अपील की जा रही हैं। कांग्रेस और गठबंधन प्रत्याशियों ने अपने-अपने सोशल मीडिया एकाउंट से फतवे का जिक्र भी किया है।