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चीनी के बढ़े दाम से जगी गन्ना भुगतान की आस
Updated Sat, 09 Jun 2018 01:56 AM IST
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मुरादाबाद।
चीनी के दाम एकाएक बढ़ जाने से अब गन्ना किसानों को भुगतान की उम्मीद जगी है। शासन के चीनी की बिक्री को नियंत्रित करने के आदेश का असर बाजार पर आ गया है। इसका लाभ अब किसानों को मिलेगा और मिलों को भी राहत मिलेगी।
गन्ना बकाए को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सड़कों से सरकारी आफिसों तक में किसानों का हंगामा जारी है। किसान अपने गन्ने का भुगतान मांग रहे हैं तो मिील चीनी के सस्ते होने से परेशान थीं। मिल प्रबंधन के अनुसार चीनी केउत्पादन में 32 सौ रुपये से ज्यादा की लागत आ रही थी और बाजार में इसका मूल्य 22-24 सौ रुपये हो गया था। चार दिन पहले तक चीनी का रेट 28 सौ रुपये था। इस मूल्य पर मिल चीनी की बिक्री को तैयार नहीं थीं। इसकेचलते शासन ने चीनी बिक्री का कोटा निर्धारित कर दिया। ऐसे में मिलें अपनी पूरी चीनी को एक साथ नहीं बेच सकेंगी। इसका असर बाजार पर आने लगा है। शुक्रवार को चीनी के दाम बढ़कर 35 सौ रुपये तक पहुंच गए। इससे मिलों की हालत में सुधार होगा और किसानों को गन्ना भुगतान मिलना शुरू हो जाएगा। गन्ना उपायुक्त राजेश मिश्रा ने बताया कि मिलों का बफर स्टाक निर्धारित करने और चीनी की बिक्री को नियंत्रित करने का यह प्रभाव है। इससे मिला और किसान दोनों की स्थिति में सुधार होगा।
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चीनी के दाम एकाएक बढ़ जाने से अब गन्ना किसानों को भुगतान की उम्मीद जगी है। शासन के चीनी की बिक्री को नियंत्रित करने के आदेश का असर बाजार पर आ गया है। इसका लाभ अब किसानों को मिलेगा और मिलों को भी राहत मिलेगी।
गन्ना बकाए को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सड़कों से सरकारी आफिसों तक में किसानों का हंगामा जारी है। किसान अपने गन्ने का भुगतान मांग रहे हैं तो मिील चीनी के सस्ते होने से परेशान थीं। मिल प्रबंधन के अनुसार चीनी केउत्पादन में 32 सौ रुपये से ज्यादा की लागत आ रही थी और बाजार में इसका मूल्य 22-24 सौ रुपये हो गया था। चार दिन पहले तक चीनी का रेट 28 सौ रुपये था। इस मूल्य पर मिल चीनी की बिक्री को तैयार नहीं थीं। इसकेचलते शासन ने चीनी बिक्री का कोटा निर्धारित कर दिया। ऐसे में मिलें अपनी पूरी चीनी को एक साथ नहीं बेच सकेंगी। इसका असर बाजार पर आने लगा है। शुक्रवार को चीनी के दाम बढ़कर 35 सौ रुपये तक पहुंच गए। इससे मिलों की हालत में सुधार होगा और किसानों को गन्ना भुगतान मिलना शुरू हो जाएगा। गन्ना उपायुक्त राजेश मिश्रा ने बताया कि मिलों का बफर स्टाक निर्धारित करने और चीनी की बिक्री को नियंत्रित करने का यह प्रभाव है। इससे मिला और किसान दोनों की स्थिति में सुधार होगा।
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