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छोटू-छुटकी को भी पुनर्वास की आस
Updated Tue, 13 Nov 2018 02:41 AM IST
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मुरादाबाद। राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष के संज्ञान पर रविवार को जान जोखिम में डालकर छह फीट ऊंची रस्सी पर नट कला का प्रदर्शन कर रही बच्ची को बचाया गया था। इसका मूल कारण परिवार का खर्च चलाने के लिए करतब दिखाना था। अध्यक्ष की कार्रवाई के बाद सोमवार को विभिन्न स्थानों पर ऐसे नजारे देखने को मिले, जहां नाबालिग बच्चे अपनों की भूख मिटाने के लिए काम कर रहे थे। उन्हें भी संबंधित संस्थाओं से अपने पुनर्वास की आस है। आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि बाल संरक्षण इकाइयों को साथ मिलकर इस बुराई के खिलाफ अभियान चलाना होगा।
रेती स्ट्रीट, टाउन हाल पर बच्चे कचौड़ी पकाते हुए और बर्तन धोते हुए मिले, जबकि बारादरी रोड पर ओटोमोबाइल की दुकान पर बाइक ठीक करते हुए देखे गए। सभी बच्चों का कहना है कि परिजनों की कमाई से घर का गुजारा नहीं हो पा रहा है। परिवार के भरण-पोषण की खातिर काम कर रहे हैं, जबकि उनका सपना भी पढ़ाई कर अपना भविष्य संवारने का है। इस संबंध में चाइल्ड लाइन की समन्वयक श्रद्धा शर्मा ने बताया कि करीब पांच माह से बाल संरक्षण के लिए अभियान नहीं चला है। पास उनके कोई फोन करता है तो बच्चे की मदद की जाती है। वहीं, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गुलजार अहमद का कहना है कि अभियान बाल श्रम विभाग चलाता है। वह हमारे यहां बच्चों को मुक्त कराकर लाते हैं। हमारे द्वारा सीधे तौर पर कोई अभियान नहीं चलाया गया है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने बताया कि समाज पर इमोशनल अत्याचार है। आने वाले समय में यदि कहीं कोई श्रम दिखाई देता है तो उस पर कार्रवाई होगी। 14 नवंबर आ रहा है। उस दिन बच्चों को जागरूक करें। बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों को सामाजिक संगठन, चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिक यूनिट, जिला बाल संरक्षण इकाई, थाने से जुड़ी विशेष पुलिस इकाई के माध्यम से सामाजिक बुराई के खिलाफ गठनबंधन कर छापे मारने होंगे।
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रेती स्ट्रीट, टाउन हाल पर बच्चे कचौड़ी पकाते हुए और बर्तन धोते हुए मिले, जबकि बारादरी रोड पर ओटोमोबाइल की दुकान पर बाइक ठीक करते हुए देखे गए। सभी बच्चों का कहना है कि परिजनों की कमाई से घर का गुजारा नहीं हो पा रहा है। परिवार के भरण-पोषण की खातिर काम कर रहे हैं, जबकि उनका सपना भी पढ़ाई कर अपना भविष्य संवारने का है। इस संबंध में चाइल्ड लाइन की समन्वयक श्रद्धा शर्मा ने बताया कि करीब पांच माह से बाल संरक्षण के लिए अभियान नहीं चला है। पास उनके कोई फोन करता है तो बच्चे की मदद की जाती है। वहीं, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गुलजार अहमद का कहना है कि अभियान बाल श्रम विभाग चलाता है। वह हमारे यहां बच्चों को मुक्त कराकर लाते हैं। हमारे द्वारा सीधे तौर पर कोई अभियान नहीं चलाया गया है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने बताया कि समाज पर इमोशनल अत्याचार है। आने वाले समय में यदि कहीं कोई श्रम दिखाई देता है तो उस पर कार्रवाई होगी। 14 नवंबर आ रहा है। उस दिन बच्चों को जागरूक करें। बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों को सामाजिक संगठन, चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिक यूनिट, जिला बाल संरक्षण इकाई, थाने से जुड़ी विशेष पुलिस इकाई के माध्यम से सामाजिक बुराई के खिलाफ गठनबंधन कर छापे मारने होंगे।
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