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सत्यापन के इंतजार में धूल फांक रही किताबें
Updated Thu, 20 Sep 2018 02:08 AM IST
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मुरादाबाद।
बेसिक स्कूलों में सत्र शुरू हुए छह माह बीत चुके हैं। अभी तक उर्दू की किताबें बच्चों के हाथों में नहीं पहुंची हैं। लंबी सरकारी औपचारिकताओं के बाद 20 दिन पहले किताबों की खेप जिले में आई भी तो गोदाम में कैद होकर रह गई। अफसरों का कहना है कि लखनऊ की टीम आकर सत्यापन करेगी उसके बाद ही स्कूलों में किताबों का वितरण किया जाएगा। सरकारी नियम - कायदों के पेंच बच्चों की पढ़ाई पर भारी पड़ रहे हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद से पंजीकृत मदरसों और प्राइमरी स्कूलों में उर्दू भी पढ़ाई जाती है। संस्कृत की जगह उर्दू वैकल्पिक विषय है। मुस्लिम बहुल इलाकों में उर्दू शिक्षकों की तैनाती है। इन स्कूलों में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी अधिक है। उर्दू छात्रों के लिए किताबों की सुधि लेने में अफसरों ने छह माह लगा दिए। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उर्दू किताबों का आर्डर काफी देरी से दिया। इससे किताबें पहुंचने में महीनों लग गए। महीनों बाद किताबें आई और शिक्षा विभाग के दांग स्थित गोदाम में बंद हो गई हैं। किताबों का सत्यापन होना है। इसके लिए लखनऊ से टीम आने का इंतजार है। किताबों के कागज और प्रिंटिंग की जांच रिपोर्ट के बाद ही किताबें स्कूलों तक पहुंचाई जाएंगी। गोदाम तक किताबें पहुंचने की जानकारी मिलने पर उर्दू शिक्षक किताबों के वितरण की गुहार लगा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि छमाही परीक्षाएं होने वाली हैं। बच्चों ने पढ़ाई नहीं की है। ऐसे में उन्हें कब पढ़ाएंगे।
उर्दू की किताबें पहुंच गई हैं। बगैर सत्यापन वितरण नहीं किया जा सकता है। टीम कब आएगी इसकी कोई जानकारी नहीं है। - योगेंद्र कुमार, बीएसए।
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बेसिक स्कूलों में सत्र शुरू हुए छह माह बीत चुके हैं। अभी तक उर्दू की किताबें बच्चों के हाथों में नहीं पहुंची हैं। लंबी सरकारी औपचारिकताओं के बाद 20 दिन पहले किताबों की खेप जिले में आई भी तो गोदाम में कैद होकर रह गई। अफसरों का कहना है कि लखनऊ की टीम आकर सत्यापन करेगी उसके बाद ही स्कूलों में किताबों का वितरण किया जाएगा। सरकारी नियम - कायदों के पेंच बच्चों की पढ़ाई पर भारी पड़ रहे हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद से पंजीकृत मदरसों और प्राइमरी स्कूलों में उर्दू भी पढ़ाई जाती है। संस्कृत की जगह उर्दू वैकल्पिक विषय है। मुस्लिम बहुल इलाकों में उर्दू शिक्षकों की तैनाती है। इन स्कूलों में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी अधिक है। उर्दू छात्रों के लिए किताबों की सुधि लेने में अफसरों ने छह माह लगा दिए। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उर्दू किताबों का आर्डर काफी देरी से दिया। इससे किताबें पहुंचने में महीनों लग गए। महीनों बाद किताबें आई और शिक्षा विभाग के दांग स्थित गोदाम में बंद हो गई हैं। किताबों का सत्यापन होना है। इसके लिए लखनऊ से टीम आने का इंतजार है। किताबों के कागज और प्रिंटिंग की जांच रिपोर्ट के बाद ही किताबें स्कूलों तक पहुंचाई जाएंगी। गोदाम तक किताबें पहुंचने की जानकारी मिलने पर उर्दू शिक्षक किताबों के वितरण की गुहार लगा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि छमाही परीक्षाएं होने वाली हैं। बच्चों ने पढ़ाई नहीं की है। ऐसे में उन्हें कब पढ़ाएंगे।
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उर्दू की किताबें पहुंच गई हैं। बगैर सत्यापन वितरण नहीं किया जा सकता है। टीम कब आएगी इसकी कोई जानकारी नहीं है। - योगेंद्र कुमार, बीएसए।