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देश के तीन करोड़ बच्चे अभी भी स्कूलों से दूर- रमाकांत राय
Updated Sun, 09 Sep 2018 01:20 AM IST
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बिलारी। कई शिक्षक संगठनों के राष्ट्रीय संगठन नेशनल क्वालीशन फोर एजूकेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमाकांत राय ने कहा कि देश के तीन करोड़ से अधिक बच्चे अभी भी स्कूलों से दूर हैं। दुनिया भर के बाल मजदूरों में से एक चौथाई बाल मजदूर भारत में ही हैं। बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम को पूरी तरह लागू किया जाना जरूरी है।
शिक्षक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शनिवार की दोपहर क्षेत्र के ग्रामोदय महाविद्यालय अमरपुरकाशी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके शिक्षक संगठन से भारत के प्राइमरी, अपर प्राइमरी, हायर सेकेंड्री स्कूलों के शिक्षकों और अन्य शिक्षक संगठनों से संबंधित लगभग 55 लाख शिक्षक और 72 लोकसभा सांसद जुड़े हुए हैं।
रमाकांत राय ने आगे कहा कि वर्ष 2011 में संकलित किए गए आंकड़ों के मुताबिक भारत के सभी राज्यों में छह से 14 वर्ष की आयु के कुल 23 करोड़ 35 लाख बच्चे हैं जिनमें से 19 करोड़ 97 लाख बच्चों का पंजीकरण ही स्कूलों में हो पाया है। भारत में तीन करोड़ 38 लाख बच्चे अभी भी ऐसे हैं जो स्कूलों से दूर हैं। वर्ष 14-15 में 12 लाख बच्चे और वर्ष 15-16 में नौ लाख बच्चे पंजीकरण होने के बाद भी स्कूलों से गायब हो गए। यह आंकड़े काफी चिंतनीय और चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन आंकड़ों को समझें और स्कूलों से दूर बच्चों को स्कूलों में जाकर पढ़ाई की व्यवस्था हो। श्री राय ने आगे बताया कि दुनिया के अनपढ़ में से एक तिहाई भारत में हैं और दुनिया के बाल मजदूरों में से भी एक चौथाई भारत में हैं।
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शिक्षक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शनिवार की दोपहर क्षेत्र के ग्रामोदय महाविद्यालय अमरपुरकाशी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके शिक्षक संगठन से भारत के प्राइमरी, अपर प्राइमरी, हायर सेकेंड्री स्कूलों के शिक्षकों और अन्य शिक्षक संगठनों से संबंधित लगभग 55 लाख शिक्षक और 72 लोकसभा सांसद जुड़े हुए हैं।
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रमाकांत राय ने आगे कहा कि वर्ष 2011 में संकलित किए गए आंकड़ों के मुताबिक भारत के सभी राज्यों में छह से 14 वर्ष की आयु के कुल 23 करोड़ 35 लाख बच्चे हैं जिनमें से 19 करोड़ 97 लाख बच्चों का पंजीकरण ही स्कूलों में हो पाया है। भारत में तीन करोड़ 38 लाख बच्चे अभी भी ऐसे हैं जो स्कूलों से दूर हैं। वर्ष 14-15 में 12 लाख बच्चे और वर्ष 15-16 में नौ लाख बच्चे पंजीकरण होने के बाद भी स्कूलों से गायब हो गए। यह आंकड़े काफी चिंतनीय और चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन आंकड़ों को समझें और स्कूलों से दूर बच्चों को स्कूलों में जाकर पढ़ाई की व्यवस्था हो। श्री राय ने आगे बताया कि दुनिया के अनपढ़ में से एक तिहाई भारत में हैं और दुनिया के बाल मजदूरों में से भी एक चौथाई भारत में हैं।
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