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Moradabad News: जिला अस्पताल में 17 विशेषज्ञों के पद खाली, भटक रहे मरीज
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- दो माह में 500 से ज्यादा मरीज रेफर, आईसीयू की जरूरत वाले हर मरीज को मेरठ की दौड़
- फिजिशियन से मनोचिकित्सक तक नहीं, नेफ्रोलॉजिस्ट-रेडियोलॉजिस्ट की कमी भी बनी संकट
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी उन्हें अस्पताल से बाहर जाने को मजबूर कर रही है। फिजिशियन समेत 17 विशेषज्ञों के पद खाली हैं। मनोचिकित्सक की तैनाती करीब छह माह से नहीं हुई है। नेफ्रोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट समेत कई अहम विशेषज्ञों के न होने से गंभीर मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। नतीजा यह है कि दो माह में जिला और महिला अस्पताल से 500 से अधिक मरीज रेफर किए जा चुके हैं। आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों को मेरठ भेजना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में फिजिशियन, साइकेट्रिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन और यूरोलॉजिस्ट समेत कई विशेषज्ञों की जरूरत है। एमआरआई मशीन उपलब्ध न होने की बात भी सरकारी रिपोर्ट में दर्ज है। वहीं अस्पताल में आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों को उच्च केंद्र के लिए रेफर किया जा रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों के सामने इलाज से पहले ही रेफर होने का संकट खड़ा हो जाता है। सबसे ज्यादा मार मानसिक रोगियों पर पड़ रही है। करीब छह माह से मनोचिकित्सक नहीं होने के कारण मरीजों की नियमित जांच और दवा में बदलाव तक प्रभावित है। मंगलवार को 40 किलोमीटर दूर से बच्चे को दिखाने पहुंची महिला को भी विशेषज्ञ नहीं मिला। काउंसलिंग टीम के नहीं बैठने से उसे दूसरे डॉक्टर को दिखाना पड़ा।
500 से ज्यादा मरीजों को नहीं मिला यहीं इलाज
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का असर सीधे रेफरल पर पड़ रहा है। दो माह में जिला और महिला अस्पताल से 500 से अधिक मरीज रेफर किए गए हैं। आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों को मेरठ भेजना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की कमी के कारण जिला अस्पताल गंभीर मरीजों के लिए इलाज के अंतिम पड़ाव के बजाय रेफर सेंटर बनता जा रहा है। महिला अस्पताल में भी विशेषज्ञों की कमी है। एसएनसीयू में नौ बाल रोग विशेषज्ञों के पद के सापेक्ष केवल तीन डॉक्टर तैनात हैं। चार एनेस्थेटिस्ट की भी आवश्यकता बताई गई है। वहीं रतनपुर कलां, शरीफनगर, ठाकुरद्वारा और बिलारी की चिकित्सा इकाइयों में भी चिकित्साधिकारी और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है।
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मरीजों की जुबानी (फोटो)
मेरे गले में 10 दिन से दुखन है। एक सप्ताह पहले मैं दवा लेने आई थी, उस समय डॉक्टर ने देखा और दवा लिख दी। गला पूरी तरह ठीक नहीं हुआ तो आज दोबारा आई हूं। आज जूनियर डॉक्टर बैठे थे, उन्होंने कहा कि गलारे करो ठीक हो जाओगी, दवा नहीं लिखी।
— शीतल, रसूलपुर
मेरा चार साल का बच्चा है, ठीक से बोल नहीं पाता है। यहां 40 किमी दूर से मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाने आई हूं। पता चला कि मानसिक रोग विशेषज्ञ छह माह से नहीं हैं। काउंसलिंग वाली टीम भी आज नहीं बैठी। अब बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाया है।
— जीनत परवीन, इस्लामनगर
मैं पैर फिसलने के कारण फर्श पर गिर गई थी। यहां डॉक्टर ने देखने के बाद दवा लिखी, बहार की दवा लिख रहे थे लेकिन मैंने मना कर दिया। हमारे पास पैसे नहीं हैं। बाहर की दवा कहां से लेंगे।
— नाजिया, अगवानपुर
बुखार की दवा तो मिल गई लेकिन खांसी का सिरप नहीं मिला है। दवा काउंटर पर स्टाप ने कह दिया कि कल आ जाना मिल जाएगा। अब कल काम छोड़कर दोबारा नहीं आंऊगा।
— विजय सिंह, सिरसखेड़ा
वर्जन
विशेषज्ञों की तैनाती के लिए लगातार स्वास्थ्य निदेशालय से पत्राचार किया जा रहा है। एमआरआई मशीन जल्द स्थापित होने की उम्मीद है। मानसिक रोगियों के लिए काउंसलिंग टीम सोमवार, बुधवार और शुक्रवार में कमरा नंबर 22 में बैठती है।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, एसआईसी
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- फिजिशियन से मनोचिकित्सक तक नहीं, नेफ्रोलॉजिस्ट-रेडियोलॉजिस्ट की कमी भी बनी संकट
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी उन्हें अस्पताल से बाहर जाने को मजबूर कर रही है। फिजिशियन समेत 17 विशेषज्ञों के पद खाली हैं। मनोचिकित्सक की तैनाती करीब छह माह से नहीं हुई है। नेफ्रोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट समेत कई अहम विशेषज्ञों के न होने से गंभीर मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। नतीजा यह है कि दो माह में जिला और महिला अस्पताल से 500 से अधिक मरीज रेफर किए जा चुके हैं। आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों को मेरठ भेजना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में फिजिशियन, साइकेट्रिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन और यूरोलॉजिस्ट समेत कई विशेषज्ञों की जरूरत है। एमआरआई मशीन उपलब्ध न होने की बात भी सरकारी रिपोर्ट में दर्ज है। वहीं अस्पताल में आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों को उच्च केंद्र के लिए रेफर किया जा रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों के सामने इलाज से पहले ही रेफर होने का संकट खड़ा हो जाता है। सबसे ज्यादा मार मानसिक रोगियों पर पड़ रही है। करीब छह माह से मनोचिकित्सक नहीं होने के कारण मरीजों की नियमित जांच और दवा में बदलाव तक प्रभावित है। मंगलवार को 40 किलोमीटर दूर से बच्चे को दिखाने पहुंची महिला को भी विशेषज्ञ नहीं मिला। काउंसलिंग टीम के नहीं बैठने से उसे दूसरे डॉक्टर को दिखाना पड़ा।
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500 से ज्यादा मरीजों को नहीं मिला यहीं इलाज
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का असर सीधे रेफरल पर पड़ रहा है। दो माह में जिला और महिला अस्पताल से 500 से अधिक मरीज रेफर किए गए हैं। आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों को मेरठ भेजना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की कमी के कारण जिला अस्पताल गंभीर मरीजों के लिए इलाज के अंतिम पड़ाव के बजाय रेफर सेंटर बनता जा रहा है। महिला अस्पताल में भी विशेषज्ञों की कमी है। एसएनसीयू में नौ बाल रोग विशेषज्ञों के पद के सापेक्ष केवल तीन डॉक्टर तैनात हैं। चार एनेस्थेटिस्ट की भी आवश्यकता बताई गई है। वहीं रतनपुर कलां, शरीफनगर, ठाकुरद्वारा और बिलारी की चिकित्सा इकाइयों में भी चिकित्साधिकारी और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है।
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मरीजों की जुबानी (फोटो)
मेरे गले में 10 दिन से दुखन है। एक सप्ताह पहले मैं दवा लेने आई थी, उस समय डॉक्टर ने देखा और दवा लिख दी। गला पूरी तरह ठीक नहीं हुआ तो आज दोबारा आई हूं। आज जूनियर डॉक्टर बैठे थे, उन्होंने कहा कि गलारे करो ठीक हो जाओगी, दवा नहीं लिखी।
— शीतल, रसूलपुर
मेरा चार साल का बच्चा है, ठीक से बोल नहीं पाता है। यहां 40 किमी दूर से मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाने आई हूं। पता चला कि मानसिक रोग विशेषज्ञ छह माह से नहीं हैं। काउंसलिंग वाली टीम भी आज नहीं बैठी। अब बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाया है।
— जीनत परवीन, इस्लामनगर
मैं पैर फिसलने के कारण फर्श पर गिर गई थी। यहां डॉक्टर ने देखने के बाद दवा लिखी, बहार की दवा लिख रहे थे लेकिन मैंने मना कर दिया। हमारे पास पैसे नहीं हैं। बाहर की दवा कहां से लेंगे।
— नाजिया, अगवानपुर
बुखार की दवा तो मिल गई लेकिन खांसी का सिरप नहीं मिला है। दवा काउंटर पर स्टाप ने कह दिया कि कल आ जाना मिल जाएगा। अब कल काम छोड़कर दोबारा नहीं आंऊगा।
— विजय सिंह, सिरसखेड़ा
वर्जन
विशेषज्ञों की तैनाती के लिए लगातार स्वास्थ्य निदेशालय से पत्राचार किया जा रहा है। एमआरआई मशीन जल्द स्थापित होने की उम्मीद है। मानसिक रोगियों के लिए काउंसलिंग टीम सोमवार, बुधवार और शुक्रवार में कमरा नंबर 22 में बैठती है।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, एसआईसी