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सीमा पर सड़क निर्माण के लिए 1648 श्रमिकों को लेकर गुजरी स्पेशल ट्रेन
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मुरादाबाद। लद्दाख और कश्मीर में सड़क निर्माण करने के लिए स्पेशल ट्रेन में सवार होकर 1648 श्रमिक रविवार को मुरादाबाद जंक्शन से गुजरे। यह स्पेशल ट्रेन झारखंड के दुमका से जम्मू-कश्मीर के उद्यमपुर के लिए रवाना हुई है। चौबीस कोच वाली इस ट्रेन में सवार श्रमिकों ने यहां एक घंटा आराम किया। बोले कि सीमा पर चाहे कोई भी विवाद चल रहा हो पर आदेश मिलते ही वे मुस्तैदी से अपने काम को अंजाम देेंगे और आनन फानन में काम पूरा कर देंगे।
बीआरओ (बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन) द्वारा संचालित परियोजनाओं विजयक और हिमांक के अंतर्गत ये सभी श्रमिक कार्य करेंगे। बीते शनिवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। श्रमिकों को जलपान उपलब्ध कराने के लिए रविवार दोपहर दो बजे ट्रेन मुरादाबाद जंक्शन पर रुकी थी। स्टेशन पर सभी श्रमिकों को खाने के पैकेट वितरित किए गए। श्रमिक धंनजय शाह ने बताया कि उन सभी को कश्मीर में सड़क निर्माण का कार्य करना है। इसके लिए श्रम विभाग द्वारा बीआरओ के प्रोजेक्ट के लिए उन्हें काम मिला है। साथ ही उनकी मजदूरी की रकम उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। बता दें कि झारखंड से हर वर्ष सड़क निर्माण के लिए हजारों श्रमिक जाते हैं। जिनमें से अधिकांश दुमका जिले के ही होते हैं। श्रमिकों के बताया कि उन्हें थर्मल स्क्रीनिंग करवाकर ही रवाना किया गया। साथ ही ट्रेन में सेना के अधिकारी, डॉक्टरों व स्टाफ सहित पूरी टीम मौजूद थी।
ट्रेन में उपस्थित मेडिकल ऑफिसर ने बताया कि हर वर्ष श्रमिकों को बीआरओ के प्रोजेक्ट के तहत काम दिया जाता है। सभी की जांच करने के बाद ही ट्रेन में बैठाया गया है। श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मेडिकल टीम भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि एलओसी व एलएसी क्षेत्र में कार्य के लिए बीआरओ द्वारा परियोजनाएं संचालित हैं। भारत-चीन सीमा, लेह-लद्याख व अन्य क्षेत्रों में मार्ग से बर्फ हटाने के लिए, क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत के लिए व नई सड़कें बनाने के लिए श्रमिकों को ले जाया जा रहा है।
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यहां दिखी लापरवाही
स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद श्रमिकों को भोजन तो वितरित किया गया लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं की गई। पानी पीने के लिए श्रमिक ट्रेन से उतरकर स्टेशन पर लगी टोटियों पर जमा हो गए। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का कोई ख्याल नहीं रखा गया। हालांकि स्टेशन परिसर पर पुलिस के जवान मौजूद थे। इसके बावजूद किसी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की जरूरत नहीं समझी। ट्रेन में श्रमिकों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा गया। इसके अलावा किसी ने मास्क पहनना भी उचित नहीं समझा।
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बीआरओ (बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन) द्वारा संचालित परियोजनाओं विजयक और हिमांक के अंतर्गत ये सभी श्रमिक कार्य करेंगे। बीते शनिवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। श्रमिकों को जलपान उपलब्ध कराने के लिए रविवार दोपहर दो बजे ट्रेन मुरादाबाद जंक्शन पर रुकी थी। स्टेशन पर सभी श्रमिकों को खाने के पैकेट वितरित किए गए। श्रमिक धंनजय शाह ने बताया कि उन सभी को कश्मीर में सड़क निर्माण का कार्य करना है। इसके लिए श्रम विभाग द्वारा बीआरओ के प्रोजेक्ट के लिए उन्हें काम मिला है। साथ ही उनकी मजदूरी की रकम उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। बता दें कि झारखंड से हर वर्ष सड़क निर्माण के लिए हजारों श्रमिक जाते हैं। जिनमें से अधिकांश दुमका जिले के ही होते हैं। श्रमिकों के बताया कि उन्हें थर्मल स्क्रीनिंग करवाकर ही रवाना किया गया। साथ ही ट्रेन में सेना के अधिकारी, डॉक्टरों व स्टाफ सहित पूरी टीम मौजूद थी।
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ट्रेन में उपस्थित मेडिकल ऑफिसर ने बताया कि हर वर्ष श्रमिकों को बीआरओ के प्रोजेक्ट के तहत काम दिया जाता है। सभी की जांच करने के बाद ही ट्रेन में बैठाया गया है। श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मेडिकल टीम भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि एलओसी व एलएसी क्षेत्र में कार्य के लिए बीआरओ द्वारा परियोजनाएं संचालित हैं। भारत-चीन सीमा, लेह-लद्याख व अन्य क्षेत्रों में मार्ग से बर्फ हटाने के लिए, क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत के लिए व नई सड़कें बनाने के लिए श्रमिकों को ले जाया जा रहा है।
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यहां दिखी लापरवाही
स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद श्रमिकों को भोजन तो वितरित किया गया लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं की गई। पानी पीने के लिए श्रमिक ट्रेन से उतरकर स्टेशन पर लगी टोटियों पर जमा हो गए। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का कोई ख्याल नहीं रखा गया। हालांकि स्टेशन परिसर पर पुलिस के जवान मौजूद थे। इसके बावजूद किसी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की जरूरत नहीं समझी। ट्रेन में श्रमिकों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा गया। इसके अलावा किसी ने मास्क पहनना भी उचित नहीं समझा।