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महापौर को दोबारा मिले प्रशासकीय और वितीय अधिकार
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मुरादाबाद। अब विकास के प्रस्तावों के लिए महापौर को कमिश्नर समेत अधिकारियों की मान मनौव्वर नहीं करनी होगी। केंद्रीय वित्त आयोग व नगर निगमों की अवस्थापना विकास निधि से कराए जाने वाले कार्यों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति देने वाली समिति के अध्यक्ष महापौर होंगे। अभी तक इस समिति के अध्यक्ष कमिश्नर हुआ करते थे। प्रमुख सचिव नगर विकास के इस आदेश के नगर निगम में पहुंचने के बाद महापौर खेमे में खुशी का माहौल है। वहीं नगर आयुक्त का कहना है कि अब निगम ज्यादा स्वतंत्र होगा।
नगर निगम की अवस्थापना निधि और 14 वें वित्त आयोग की राशि से होने वाले विकास कार्यों में अपनी प्राथमिकता वाले कार्य शामिल कराने के लिए महापौर को कमिश्नर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से कहना होता था। महापौर के कामों पर कमिश्नर और नगर आयुक्त जब चाहे रोड़ा लगा सकते थे। ऐसा ही कुछ महीने पहले मुरादाबाद नगर निगम में महापौर डॉ. विनोद अग्रवाल और तत्कालीन नगर आयुक्त अवनीश कुमार के बीच तकरार के रूप में नजर आता था। इसका खामियाजा पूरे शहर को उठाना पड़ा। कई विकास के एजेंडे फाइलों से ही बाहर नहीं निकल सके। नए बदलाव के बाद महापौर के आदेश पर ही प्रस्ताव तैयार कराने होंगे।
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सितंबर 2012 से पहले यही व्यवस्था थी लागू
समाजवादी सरकार ने 10 सितंबर 2012 को इस व्यवस्था में बदलाव किया था। सरकार ने महापौर के अधिकार छीनकर कमिश्नर को दिए थे। मौजूदा समय में प्रदेश की 17 नगर निगमों में 15 निकायों में भाजपा के महापौरों का कब्जा है। यही वजह है कि पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू किया गया है।
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इस तरह व्यवस्था में हुआ बदलाव
प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने आदेश जारी किए हैं कि केंद्रीय वित्त आयोग व नगर निगमों की अवस्थापना विकास निधि से कराए जाने वाले कार्यों की प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति करती है। इस समिति में जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, मुख्य नगर अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अभियंता, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होते हैं। अब नई व्यवस्था में इस समिति का अध्यक्ष महापौर को बनाया गया है। हालांकि इस समिति में कमिश्नर के प्रतिनिधि के रूप में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता रहेंगे। महापौर द्वारा कराए गए कामों पर कमिश्नर और जिलाधिकारी को निरीक्षण करने का या शिकायत आने पर जांच कराने के अधिकार होंगे। विकास कार्यों की गुणवत्ता के लिए भी काम करेंगे।
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शासन का आदेश आ गया है। यह अच्छा कदम है। इस फैसले से निकाय ज्यादा स्वतंत्र होगा। शहर में होने वाले विकास कामों में तेजी आएगी। - संजय चौहान, नगर आयुक्त
यह सरकार का अच्छा फैसला है, इस निर्णय के बाद विकास कार्यों में तेजी आएगी। एक महीने पहले यह आदेश हो गया होता तो लंबित कामों के टेंडर कराकर विकास कार्य कराए जा सकते थे। विनोद अग्रवाल, महापौर
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नगर निगम की अवस्थापना निधि और 14 वें वित्त आयोग की राशि से होने वाले विकास कार्यों में अपनी प्राथमिकता वाले कार्य शामिल कराने के लिए महापौर को कमिश्नर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से कहना होता था। महापौर के कामों पर कमिश्नर और नगर आयुक्त जब चाहे रोड़ा लगा सकते थे। ऐसा ही कुछ महीने पहले मुरादाबाद नगर निगम में महापौर डॉ. विनोद अग्रवाल और तत्कालीन नगर आयुक्त अवनीश कुमार के बीच तकरार के रूप में नजर आता था। इसका खामियाजा पूरे शहर को उठाना पड़ा। कई विकास के एजेंडे फाइलों से ही बाहर नहीं निकल सके। नए बदलाव के बाद महापौर के आदेश पर ही प्रस्ताव तैयार कराने होंगे।
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सितंबर 2012 से पहले यही व्यवस्था थी लागू
समाजवादी सरकार ने 10 सितंबर 2012 को इस व्यवस्था में बदलाव किया था। सरकार ने महापौर के अधिकार छीनकर कमिश्नर को दिए थे। मौजूदा समय में प्रदेश की 17 नगर निगमों में 15 निकायों में भाजपा के महापौरों का कब्जा है। यही वजह है कि पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू किया गया है।
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इस तरह व्यवस्था में हुआ बदलाव
प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने आदेश जारी किए हैं कि केंद्रीय वित्त आयोग व नगर निगमों की अवस्थापना विकास निधि से कराए जाने वाले कार्यों की प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति करती है। इस समिति में जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, मुख्य नगर अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अभियंता, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होते हैं। अब नई व्यवस्था में इस समिति का अध्यक्ष महापौर को बनाया गया है। हालांकि इस समिति में कमिश्नर के प्रतिनिधि के रूप में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता रहेंगे। महापौर द्वारा कराए गए कामों पर कमिश्नर और जिलाधिकारी को निरीक्षण करने का या शिकायत आने पर जांच कराने के अधिकार होंगे। विकास कार्यों की गुणवत्ता के लिए भी काम करेंगे।
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शासन का आदेश आ गया है। यह अच्छा कदम है। इस फैसले से निकाय ज्यादा स्वतंत्र होगा। शहर में होने वाले विकास कामों में तेजी आएगी। - संजय चौहान, नगर आयुक्त
यह सरकार का अच्छा फैसला है, इस निर्णय के बाद विकास कार्यों में तेजी आएगी। एक महीने पहले यह आदेश हो गया होता तो लंबित कामों के टेंडर कराकर विकास कार्य कराए जा सकते थे। विनोद अग्रवाल, महापौर