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पहली बारिश में ही तालाब बना पुराना शहर
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मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल महानगर मानसून की पहली बारिश को भी झेल नहीं सका। दो घंटे की मूसलाधार बारिश में नाला सफाई के दावों की पोल खुल गई। कूड़ा फंसने से उफनाए नालों का गंदा पानी घरों के सामने भरने से लोग दो से तीन घंटे के लिए कैद हो गए। गनीमत रही कि बारिश थम गई, अन्यथा लोगों के घरों में गंदा पानी दाखिल हो जाता। लोगों को कहते सुना गया कि अगर नालों की सफाई ठीक से की गई होती तो इतना जलभराव न होता।
सुबह से रिमझिम बारिश में मौसम खुशगवार बना दिया था। जैसा की अंदेशा था करीब साढ़े ग्यारह बजे मूसलाधार बारिश होने के बाद असालतपुरा, किसरौल कांठ की पुलिया, रेती स्ट्रीट, झब्बू का नाला, बारादरी, करुला, जेल के पीछे, लाइनपार समेत विभिन्न इलाकों के नाले उफना गए। गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा। मोहल्लों में रहने वालों के लिए घर से निकला ही मुश्किल हो गया। दोपहर में करीब दो बजे बारिश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी। लेकिन करीब गंदा पानी कम होने में करीब एक घंटे का समय लगा।
पानी कम हुआ तो सिल्ट जमी मिली
जब गंदा पानी कम हुआ तो लोगों के घरों के सामने सिल्ट जमा हो चुकी थी। ज्यादातर जगह उसकी सफाई करते हुए लोग नजर आए। गंदगी को साफ करने की भी निगम की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं थी। लोग डंडों के सहारे नालियों में फंसा कूड़ा हटाते हुए नजर आए। खासकर पुराना शहर में लोगों को ज्यादा परेशानी हुई।
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लाखों रुपये खर्च, 200 से ज्यादा कर्मचारी, नतीजा सिफर
मुरादाबाद। 200 से ज्यादा कर्मचारियों ने तकरीबन 30 दिन तक महानगर के 256 नालों की सफाई की। लाखों रुपये के खर्च का भार उठाने के बावजूद नालों की तलीझाड़ सफाई के दावे पहली ही बारिश में डूब गए।
सूत्रों के मुताबिक अंडरग्राउंड नालों से पानी की निकासी नहीं होने की वजह से ही शहर के ज्यादा इलाकों में जलभराव हुआ। दरअसल, शहर का ज्यादातर गंदा पानी की निकासी शहर के 14 अंडरग्राउंड नालों के जरिए ही होता है। इनकी सफाई ठीक से नहीं हो सकी थी। नतीजा पहली बारिश में सबके सामने था।
पिछली बोर्ड बैठक में नालों की सफाई का मुद्दा उठने के बाद नगर आयुक्त संजय चौहान ने कहा था कि शहर में नालों के डिजाइन को तत्काल बदला नहीं जा सकता है। कूड़ा निकालने के बावजूद नालों में पानी रुक-रुक कर गुजर पा रहा है। नालों का डिजाइन बदलने के बाद ही स्थिति में सुधार आ सकेगा। नगर आयुक्त का इशारा यही था कि अभियान के बावजूद जलभराव होने की आशंका है।
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सुबह से रिमझिम बारिश में मौसम खुशगवार बना दिया था। जैसा की अंदेशा था करीब साढ़े ग्यारह बजे मूसलाधार बारिश होने के बाद असालतपुरा, किसरौल कांठ की पुलिया, रेती स्ट्रीट, झब्बू का नाला, बारादरी, करुला, जेल के पीछे, लाइनपार समेत विभिन्न इलाकों के नाले उफना गए। गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा। मोहल्लों में रहने वालों के लिए घर से निकला ही मुश्किल हो गया। दोपहर में करीब दो बजे बारिश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी। लेकिन करीब गंदा पानी कम होने में करीब एक घंटे का समय लगा।
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पानी कम हुआ तो सिल्ट जमी मिली
जब गंदा पानी कम हुआ तो लोगों के घरों के सामने सिल्ट जमा हो चुकी थी। ज्यादातर जगह उसकी सफाई करते हुए लोग नजर आए। गंदगी को साफ करने की भी निगम की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं थी। लोग डंडों के सहारे नालियों में फंसा कूड़ा हटाते हुए नजर आए। खासकर पुराना शहर में लोगों को ज्यादा परेशानी हुई।
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लाखों रुपये खर्च, 200 से ज्यादा कर्मचारी, नतीजा सिफर
मुरादाबाद। 200 से ज्यादा कर्मचारियों ने तकरीबन 30 दिन तक महानगर के 256 नालों की सफाई की। लाखों रुपये के खर्च का भार उठाने के बावजूद नालों की तलीझाड़ सफाई के दावे पहली ही बारिश में डूब गए।
सूत्रों के मुताबिक अंडरग्राउंड नालों से पानी की निकासी नहीं होने की वजह से ही शहर के ज्यादा इलाकों में जलभराव हुआ। दरअसल, शहर का ज्यादातर गंदा पानी की निकासी शहर के 14 अंडरग्राउंड नालों के जरिए ही होता है। इनकी सफाई ठीक से नहीं हो सकी थी। नतीजा पहली बारिश में सबके सामने था।
पिछली बोर्ड बैठक में नालों की सफाई का मुद्दा उठने के बाद नगर आयुक्त संजय चौहान ने कहा था कि शहर में नालों के डिजाइन को तत्काल बदला नहीं जा सकता है। कूड़ा निकालने के बावजूद नालों में पानी रुक-रुक कर गुजर पा रहा है। नालों का डिजाइन बदलने के बाद ही स्थिति में सुधार आ सकेगा। नगर आयुक्त का इशारा यही था कि अभियान के बावजूद जलभराव होने की आशंका है।