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जेईई एडवांस की प्रवेश परीक्षा का काउंट डाउन शुरू
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मुरादाबाद। जेईई एडवांस की प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र सोमवार से डाउनलोड होना शुरू हो गए हैं। इसी के साथ परीक्षा का काउंट डाउन भी शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरी सप्ताह में विद्यार्थी नया पढ़ने के बजाय प्रश्नपत्र को हल करने का अभ्यास करें, ताकि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें।
स्कालरडेन के प्रबंध निदेशक विवेक ठाकुर ने कहा कि एडंवास की तैयारी बहुत कम समय में नहीं हो सकती। विद्यार्थियों ने पूरे वर्ष तैयारी की है। अब बचे हुए समय में प्रतिदिन नौ से 12 बजे और दो से पांच बजे तक टेस्ट दें। दिन में 12 से दो बजे के ब्रेक टाइम में आराम करें और नई ऊर्जा से परिपूर्ण करें। इसी आदत में खुद को ढालें। इससे निरंतरता बन जाती है और एडवांस में सबसे अधिक फायदा मिलता है। मानसिक स्थिति को सकारात्मक बनाएं। सही समय पर सोना और जगना आवश्यक है। बहुत कुछ ध्यान देने के बजाय जितना आता है, उसे परीक्षा में कैसे प्रयोग करना है, उस पर काम करें। नया न पढ़े। नया पढ़ने के चक्कर में तनाव हो जाता है। सोशल मीडिया और स्मार्ट फोन से बिल्कुल दूर रहें।
आकाश कोचिंग संस्थान के निदेशक विवेक शर्मा ने बताया कि अभिभावक विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाएं। कई बार अति उत्साह में आसान सवालों को गलत कर देते हैं। नाकारात्मक अंकन की वजह से पूरा फर्क उनकी रैंक पर पड़ता है।
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समर्पण करियर इंस्टीट्यूट के निदेशक ललित गोयल का कहना है कि पुराने टॉपिक का अच्छे से अभ्यास करें। विद्यार्थी पिछले 25 वर्ष में आए प्रश्न पत्रों को हल करें। पहली बार कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट हो रहा है। आईआईटी के दो पेपर का पैटर्न अलग होता है। कंप्यूटर पर प्रश्नपत्र हल करने की आदत डालें, ताकि परीक्षा के दिन उन्हें नया न लगे। जो विद्यार्थी मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं, वह काउंसलर की सलाह ले सकते हैं। प्रश्नपत्र में दिए गए दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।
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स्कालरडेन के प्रबंध निदेशक विवेक ठाकुर ने कहा कि एडंवास की तैयारी बहुत कम समय में नहीं हो सकती। विद्यार्थियों ने पूरे वर्ष तैयारी की है। अब बचे हुए समय में प्रतिदिन नौ से 12 बजे और दो से पांच बजे तक टेस्ट दें। दिन में 12 से दो बजे के ब्रेक टाइम में आराम करें और नई ऊर्जा से परिपूर्ण करें। इसी आदत में खुद को ढालें। इससे निरंतरता बन जाती है और एडवांस में सबसे अधिक फायदा मिलता है। मानसिक स्थिति को सकारात्मक बनाएं। सही समय पर सोना और जगना आवश्यक है। बहुत कुछ ध्यान देने के बजाय जितना आता है, उसे परीक्षा में कैसे प्रयोग करना है, उस पर काम करें। नया न पढ़े। नया पढ़ने के चक्कर में तनाव हो जाता है। सोशल मीडिया और स्मार्ट फोन से बिल्कुल दूर रहें।
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आकाश कोचिंग संस्थान के निदेशक विवेक शर्मा ने बताया कि अभिभावक विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाएं। कई बार अति उत्साह में आसान सवालों को गलत कर देते हैं। नाकारात्मक अंकन की वजह से पूरा फर्क उनकी रैंक पर पड़ता है।
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समर्पण करियर इंस्टीट्यूट के निदेशक ललित गोयल का कहना है कि पुराने टॉपिक का अच्छे से अभ्यास करें। विद्यार्थी पिछले 25 वर्ष में आए प्रश्न पत्रों को हल करें। पहली बार कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट हो रहा है। आईआईटी के दो पेपर का पैटर्न अलग होता है। कंप्यूटर पर प्रश्नपत्र हल करने की आदत डालें, ताकि परीक्षा के दिन उन्हें नया न लगे। जो विद्यार्थी मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं, वह काउंसलर की सलाह ले सकते हैं। प्रश्नपत्र में दिए गए दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।