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श्रीराम लीला में धनुष यज्ञ लीला का मनोहारी मंचन
Updated Wed, 14 Nov 2018 01:02 AM IST
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बनियाठेर। क्षेत्र के गांव भुलावई मे चल रही श्रीरामलीला के तीसरे दिन कलाकारों ने धनुष यज्ञ की लीला का मंचन किया।
रामलीला का मंचन के दौरान कलाकारों ने अभिनय के द्वारा रावण के अत्याचार अधिक होने लगे तो भगवान राम ने अयोध्या में जन्म और शिक्षा ग्रहण करने के बाद घर वापसी के दृष्य को जीवंत किया। मुनि विश्वामित्र ने सोचा कि राम ने जन्म लिया है, अब मेरी रक्षा वही करेंगे और यह प्रतिज्ञा करके दशरथ राजा के यहां पहुंचे और यज्ञ की रक्षा करने के लिए राम और लक्ष्मण को साथ भेजने को कहा। राजा दशरथ ने कहा कि आप मुझसे धन दौलत भूमि यहां तक कि मेरे प्राण भी आप ले लो लेकिन मेरे राम लक्ष्मण को मुझसे दूर मत करो। इस पर मुनि विश्वामित्र क्रोधित हुए। इसके बाद राम लक्ष्मण ने मुनि के साथ जाकर राक्षसों का संहार किया। इसके बाद मुनि के साथ ही श्रीराम लक्ष्मण जनकपुर स्वयंवर में भी पहुंचे, जहां उन्होंने शिव धनुष का खंडन किया। पूजा के फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका में पहुंचे, जहां सीता जी के भी दर्शन हुए। इसके बाद परशुराम लक्ष्मण संवाद का भी मनोहारी मंचन किया गया। इस दौरान सभी सदस्य, अध्यक्ष, प्रबंधक व रामलीला कमेटी के पदाधिकारी व सभी कलाकार उपस्थित थे।
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रामलीला का मंचन के दौरान कलाकारों ने अभिनय के द्वारा रावण के अत्याचार अधिक होने लगे तो भगवान राम ने अयोध्या में जन्म और शिक्षा ग्रहण करने के बाद घर वापसी के दृष्य को जीवंत किया। मुनि विश्वामित्र ने सोचा कि राम ने जन्म लिया है, अब मेरी रक्षा वही करेंगे और यह प्रतिज्ञा करके दशरथ राजा के यहां पहुंचे और यज्ञ की रक्षा करने के लिए राम और लक्ष्मण को साथ भेजने को कहा। राजा दशरथ ने कहा कि आप मुझसे धन दौलत भूमि यहां तक कि मेरे प्राण भी आप ले लो लेकिन मेरे राम लक्ष्मण को मुझसे दूर मत करो। इस पर मुनि विश्वामित्र क्रोधित हुए। इसके बाद राम लक्ष्मण ने मुनि के साथ जाकर राक्षसों का संहार किया। इसके बाद मुनि के साथ ही श्रीराम लक्ष्मण जनकपुर स्वयंवर में भी पहुंचे, जहां उन्होंने शिव धनुष का खंडन किया। पूजा के फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका में पहुंचे, जहां सीता जी के भी दर्शन हुए। इसके बाद परशुराम लक्ष्मण संवाद का भी मनोहारी मंचन किया गया। इस दौरान सभी सदस्य, अध्यक्ष, प्रबंधक व रामलीला कमेटी के पदाधिकारी व सभी कलाकार उपस्थित थे।